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ढालिया में न सड़क, न बिजली-पानी
Updated Thu, 22 Jun 2017 09:51 PM IST
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बड़कोट (ब्यूरो)। उत्तरकाशी जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत पौंटी के अंतर्गत अनुसूचित जाति के 22 परिवारों के ढालिया गांव के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामीण रोजमर्रा की खरीदारी के लिए आठ किमी के दुर्गम जंगली रास्ते से होकर तहसील मुख्यालय बड़कोट आते हैं।
50 के दशक में किनौर (हिमाचल) से तीन भाइयों का परिवार यहां आया था। अब यहां 22 परिवार होे गए हैं, लेकिन आज तक यहां सड़क, स्वास्थ्य, संचार की सुविधा नहीं है। ग्रामीण अपनी नगद फसलों को बाजार तक आसानी से नहीं पहुंचा पाते है।
गांव के वार्ड सदस्य ज्ञानी लाल, सुनीलाल, रतीलाल कहते हैं कि 90 के दशक में आंदोलन के बाद तत्कालीन पर्वतीय विकास मंत्री बर्फियालाल जुवांठा और ब्लॉक प्रमुख राजेंद्र सिंह रावत के प्रयासों से बेसिक स्कूल खुला था, लेकिन गांव में अन्य मूलभूत सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। उन्होंने बताया कि गांव में पिछले तीन वर्ष से पेयजल लाइन ठप पड़ी हुई है। ग्रामीण प्राकृतिक जल स्रोत से प्यास बुझा रहे हैं। सड़क सुविधा न होने से वे चौलाई, आलू, दाल आदि को बाजार तक पहुंचा पाते हैं। अधिकांश पैंसा भाडे़ में चल जाता है। इधर, लोनिवि के एई पीएल डोभाल कहते हैं कि ढालिया गांव के लिए जिला योजना से चार किमी सड़क मंजूर हुई, जिसका सर्वे करवाने की तैयारी चल रही है।
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50 के दशक में किनौर (हिमाचल) से तीन भाइयों का परिवार यहां आया था। अब यहां 22 परिवार होे गए हैं, लेकिन आज तक यहां सड़क, स्वास्थ्य, संचार की सुविधा नहीं है। ग्रामीण अपनी नगद फसलों को बाजार तक आसानी से नहीं पहुंचा पाते है।
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गांव के वार्ड सदस्य ज्ञानी लाल, सुनीलाल, रतीलाल कहते हैं कि 90 के दशक में आंदोलन के बाद तत्कालीन पर्वतीय विकास मंत्री बर्फियालाल जुवांठा और ब्लॉक प्रमुख राजेंद्र सिंह रावत के प्रयासों से बेसिक स्कूल खुला था, लेकिन गांव में अन्य मूलभूत सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। उन्होंने बताया कि गांव में पिछले तीन वर्ष से पेयजल लाइन ठप पड़ी हुई है। ग्रामीण प्राकृतिक जल स्रोत से प्यास बुझा रहे हैं। सड़क सुविधा न होने से वे चौलाई, आलू, दाल आदि को बाजार तक पहुंचा पाते हैं। अधिकांश पैंसा भाडे़ में चल जाता है। इधर, लोनिवि के एई पीएल डोभाल कहते हैं कि ढालिया गांव के लिए जिला योजना से चार किमी सड़क मंजूर हुई, जिसका सर्वे करवाने की तैयारी चल रही है।
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