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स्ट्रीट लाइटों की गुणवता की जांच के आदेश
Updated Fri, 12 Oct 2018 01:44 AM IST
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स्ट्रीट लाइटों की गुणवत्ता की जांच के आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राजधानी की सड़कों पर निजी कंपनी की ओ से लगाई जा रही स्ट्रीट लाइटों की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। आईआईटी रुड़की और यूपीसीएस को स्ट्रीट लाइटों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्ट्रीट लाइटों की लगाने की धीमी गति पर भी नगर आयुक्त की ओर से निजी कंपनी को नोटिस जारी किया जा चुका है।
नगर आयुक्त वीके जोगदंडे ने बताया कि निजी कंपनी ईईएसएल को शहर में 42 हजार स्ट्रीट लाइटें लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिनमें से कंपनी अभी तक 25 हजार स्ट्रीट लाइटें लगा चुकी है। कई स्ट्रीट लाइटों की गुुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। जिसकी जांच कराई जा रही है। जांच की जिम्मेदारी आईआईटी रुड़की व यूपीसीएल को सौंपी गई है।
उन्होंने बताया कि ईईएसएल कंपनी की ओर से 30 से लेकर 90 वाट की स्ट्रीट लाइटें लगाए जाने से बिजली की खपत में भारी कमी आई है। पूरे शहर में स्ट्रीट लाइटें लगाने के बाद जहां बिजली की खपत आधी हो जाएगी, वहीं स्ट्रीट लाइट मद में हर साल खर्च होने वाले करोड़ों रुपये में से काफी बचत होगी। स्ट्रीट लाइटें लगाने में की जा रही देरी के चलते भी कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। यदि निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं किया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राजधानी की सड़कों पर निजी कंपनी की ओ से लगाई जा रही स्ट्रीट लाइटों की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। आईआईटी रुड़की और यूपीसीएस को स्ट्रीट लाइटों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्ट्रीट लाइटों की लगाने की धीमी गति पर भी नगर आयुक्त की ओर से निजी कंपनी को नोटिस जारी किया जा चुका है।
नगर आयुक्त वीके जोगदंडे ने बताया कि निजी कंपनी ईईएसएल को शहर में 42 हजार स्ट्रीट लाइटें लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिनमें से कंपनी अभी तक 25 हजार स्ट्रीट लाइटें लगा चुकी है। कई स्ट्रीट लाइटों की गुुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। जिसकी जांच कराई जा रही है। जांच की जिम्मेदारी आईआईटी रुड़की व यूपीसीएल को सौंपी गई है।
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उन्होंने बताया कि ईईएसएल कंपनी की ओर से 30 से लेकर 90 वाट की स्ट्रीट लाइटें लगाए जाने से बिजली की खपत में भारी कमी आई है। पूरे शहर में स्ट्रीट लाइटें लगाने के बाद जहां बिजली की खपत आधी हो जाएगी, वहीं स्ट्रीट लाइट मद में हर साल खर्च होने वाले करोड़ों रुपये में से काफी बचत होगी। स्ट्रीट लाइटें लगाने में की जा रही देरी के चलते भी कंपनी को नोटिस जारी किया गया है। यदि निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं किया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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