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यहां जांच कराने में छूटते हैं गर्भवती को पसीने
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यहां जांच कराने में छूटते हैं गर्भवती को पसीने
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। केंद्र सरकार गर्भवती महिलाओं की प्रसव से पूर्व आठ बार जांच कराने का मॉडल तैयार कर रही है, लेकिन राजधानी में तो एक बार जांच कराना ही मुश्किल है। यहां दून महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए महिलाओं को चार दिन तक का इंतजार करना पड़ता है। ऐसा संसाधनों की कमी के चलते होना बताया जाता है, जिन्हें पूरा करने में विभाग लंबे समय से दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।
मौजूदा व्यवस्था के तहत गर्भवती महिलाओं की प्रसव से पूर्व चार बार जांच की जानी चाहिए। इसमें अल्ट्रासाउंड की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसमें बच्चे की स्थिति का पता लगाया जाता है, लेकिन राजधानी के दून महिला अस्पताल में यही व्यवस्था लचर हो चली है। यहां मशीनें तो दो हैं लेकिन रेडियोलॉजिस्ट सिर्फ एक है। एक दिन में इन दोनों मशीनों से 70 से 80 अल्ट्रासाउंड हो सकते हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 40 ही हो पाते हैं। ऐसे में महिलाओं को बेवजह लाइन में लगना पड़ता है। यहां अल्ट्रासाउंड के लिए वेटिंग भी काफी लंबी होती है।
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हमें रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत है। यदि रेडियोलॉजिस्ट की भर्ती हो जाती है तो अल्ट्रासाउंड के लिए वेटिंग नहीं रहेगी। काम के बोझ को देखते हुए कभी कभी बाहर से रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था की जाती है। उस दिन स्थिति आम दिनों की अपेक्षा ठीक रहती है।
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- डॉ. केके टम्टा, चिकित्सा अधीक्षक
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सुबह से लाइन में लगी हूं। यहां इसी तरह लाइन में लगना पड़ता है। जिससे काफी परेशानियां होती हैं। यहां बैठने को भी जगह नहीं मिलती है।
- सरोज
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अल्ट्रासाउंड के लिए दूसरी बार आई हूं। पहले भी मुझे काफी देर तक इंतजार करना पड़ा था और आज भी यही स्थिति है।
- मोनिका
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टिहरी से यहां आई हूं। मुझे नहीं लगता है कि मेरा नंबर आज आ पाएगा। इसलिए अगले दिन का भी मन बना लिया है।
- भारती
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हर बार इसी तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है। पिछली बार जब आई थी तो चार दिन का इंतजार करना पड़ा था। यहां पर भीड़भाड़ बहुत रहती है तो समस्या ज्यादा होती है।
- राम प्यारी
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। केंद्र सरकार गर्भवती महिलाओं की प्रसव से पूर्व आठ बार जांच कराने का मॉडल तैयार कर रही है, लेकिन राजधानी में तो एक बार जांच कराना ही मुश्किल है। यहां दून महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए महिलाओं को चार दिन तक का इंतजार करना पड़ता है। ऐसा संसाधनों की कमी के चलते होना बताया जाता है, जिन्हें पूरा करने में विभाग लंबे समय से दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।
मौजूदा व्यवस्था के तहत गर्भवती महिलाओं की प्रसव से पूर्व चार बार जांच की जानी चाहिए। इसमें अल्ट्रासाउंड की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसमें बच्चे की स्थिति का पता लगाया जाता है, लेकिन राजधानी के दून महिला अस्पताल में यही व्यवस्था लचर हो चली है। यहां मशीनें तो दो हैं लेकिन रेडियोलॉजिस्ट सिर्फ एक है। एक दिन में इन दोनों मशीनों से 70 से 80 अल्ट्रासाउंड हो सकते हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 40 ही हो पाते हैं। ऐसे में महिलाओं को बेवजह लाइन में लगना पड़ता है। यहां अल्ट्रासाउंड के लिए वेटिंग भी काफी लंबी होती है।
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हमें रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत है। यदि रेडियोलॉजिस्ट की भर्ती हो जाती है तो अल्ट्रासाउंड के लिए वेटिंग नहीं रहेगी। काम के बोझ को देखते हुए कभी कभी बाहर से रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था की जाती है। उस दिन स्थिति आम दिनों की अपेक्षा ठीक रहती है।
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- डॉ. केके टम्टा, चिकित्सा अधीक्षक
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सुबह से लाइन में लगी हूं। यहां इसी तरह लाइन में लगना पड़ता है। जिससे काफी परेशानियां होती हैं। यहां बैठने को भी जगह नहीं मिलती है।
- सरोज
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अल्ट्रासाउंड के लिए दूसरी बार आई हूं। पहले भी मुझे काफी देर तक इंतजार करना पड़ा था और आज भी यही स्थिति है।
- मोनिका
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टिहरी से यहां आई हूं। मुझे नहीं लगता है कि मेरा नंबर आज आ पाएगा। इसलिए अगले दिन का भी मन बना लिया है।
- भारती
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हर बार इसी तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है। पिछली बार जब आई थी तो चार दिन का इंतजार करना पड़ा था। यहां पर भीड़भाड़ बहुत रहती है तो समस्या ज्यादा होती है।
- राम प्यारी