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नए मंदिर में बिराजे बौठा एवं चालदा महाराज
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
साहिया। जौनसार बाबर परगने के भंजरा-पंचरा स्थित बोठा माहसू एवं चालदा माहसू देवता नए मंदिर में मंगलवार को वैदिक विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। देवताओं के नए मंदिर में विराजमान होने के अवसर पर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। इस दौरान लोगों ने देव दर्शन के साथ ही प्रसाद ग्रहण किया।
मान्यता के अनुसार तीन सौ साल पूर्व हनोल स्थित बोठा माहसू व चालदा माहसू खत सिलगांव के पंचरा-भंजरा गांव के एक स्थान पर खतवासियों के सुख दु:ख में साथ देने के लिए प्रकट हुए थे। इस दौरानखतवासियों ने मंदिर की स्थापना की थी। तीन सौ साल पुराने मंदिर की जर्जर हालत को देखते हुए खतवासियों ने पांच साल पूर्व मंदिर हनोल की तर्ज पर नया मंदिर बनाने का निर्णय लिया। गत माह मंदिर निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद मंगलवार को गर्भ गृह में प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। तड़के चार बजे देव चिह्नों को स्नान कराने के बाद मंदिर में हवन व पूजा अर्चना की गई। सुबह 10 बजे दोनों ही देवताओं को सोने चांदी जड़ित पालकियों में सजाया गया और गांव के प्राकृतिक जल स्रोत पर स्नान के लिए ले जाया गया। स्नान कराने के बाद दोनों देवताओं को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान कराया गया। इस अवसर पर कई गांवों से उमड़े श्रद्धालुओं ने देव दर्शन और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान पुजारी भोपालदत्त शर्मा, मंदिर समिति अध्यक्ष कृपाराम शर्मा, प्रताप सिंह बिष्ट, मोहर सिंह चौहान, लाल सिंह चौहान, सुरेंद्र सिंह चौहान, मायाराम पंवार, तुलसी राम शर्मा, मोतीराम शर्मा, मातबर सिंह पंवार आदि मौजूद रहे।
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साहिया। जौनसार बाबर परगने के भंजरा-पंचरा स्थित बोठा माहसू एवं चालदा माहसू देवता नए मंदिर में मंगलवार को वैदिक विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। देवताओं के नए मंदिर में विराजमान होने के अवसर पर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। इस दौरान लोगों ने देव दर्शन के साथ ही प्रसाद ग्रहण किया।
मान्यता के अनुसार तीन सौ साल पूर्व हनोल स्थित बोठा माहसू व चालदा माहसू खत सिलगांव के पंचरा-भंजरा गांव के एक स्थान पर खतवासियों के सुख दु:ख में साथ देने के लिए प्रकट हुए थे। इस दौरानखतवासियों ने मंदिर की स्थापना की थी। तीन सौ साल पुराने मंदिर की जर्जर हालत को देखते हुए खतवासियों ने पांच साल पूर्व मंदिर हनोल की तर्ज पर नया मंदिर बनाने का निर्णय लिया। गत माह मंदिर निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद मंगलवार को गर्भ गृह में प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। तड़के चार बजे देव चिह्नों को स्नान कराने के बाद मंदिर में हवन व पूजा अर्चना की गई। सुबह 10 बजे दोनों ही देवताओं को सोने चांदी जड़ित पालकियों में सजाया गया और गांव के प्राकृतिक जल स्रोत पर स्नान के लिए ले जाया गया। स्नान कराने के बाद दोनों देवताओं को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान कराया गया। इस अवसर पर कई गांवों से उमड़े श्रद्धालुओं ने देव दर्शन और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान पुजारी भोपालदत्त शर्मा, मंदिर समिति अध्यक्ष कृपाराम शर्मा, प्रताप सिंह बिष्ट, मोहर सिंह चौहान, लाल सिंह चौहान, सुरेंद्र सिंह चौहान, मायाराम पंवार, तुलसी राम शर्मा, मोतीराम शर्मा, मातबर सिंह पंवार आदि मौजूद रहे।
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