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महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर की नगर परिक्रमा
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
हरबर्टपुर की विवेक विहार कॉलोनी में शुक्रवार से श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। कथा से पूर्व महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर नगर परिक्रमा की। कथा स्थल से शुरू हुई कलश यात्रा राष्ट्रीय राजमार्ग से होती हुई हरबर्टपुर चौक, सहारनपुर रोड, विकासनगर रोड से गुजरकर नगर की परिक्रमा करते हुए कथा स्थल पर समाप्त हुई।
कथा वाचक शक्ति प्रसाद देवली ने कलश जल से व्यास पीठ को अभिसिंचित कर कथा का शुभारंभ किया। पहले दिन कथा वाचक ने श्रीमद्भागवत पुराण की महत्ता का वर्णन करते हुए कहा कि कलियुग में भागवत कथा श्रवण से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। कलियुग के प्रवेश करते ही राजा परीक्षित की बुद्धि का हरण हुआ और उन्होंने अज्ञानता वश तपस्या में लीन ऋषि के गले में सर्प डाल दिया। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए राजा परीक्षित ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। कथा श्रवण से ही उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। बताया कि सनातन धर्म में मनुष्य को पाप कर्म करने से रोकने के लिए पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में अनेक प्रसंग दिए गए हैं। इन प्रसंगों के श्रवण से जीवन में सात्विकता आती है। सात्विक जीवन ही व्यक्ति को पुण्य की ओर ले जाता है और जो व्यक्ति पुण्य कर्म करता है वह मोक्ष की प्राप्ति करता है। इस दौरान पछवादून विकास मंच संयोजक अतुल शर्मा, वीर सिंह राणा, हरीचंद नागवाल, मंजू शर्मा, रतन सिंह राणा, सुंदर सिंह, लीला राणा, प्रभा जोशी, अर्चना मार्कंडेय, निर्मला खत्री, अंशू थापा, दीपा नेगी, आदेश गर्ग आदि मौजूद रहे।
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हरबर्टपुर की विवेक विहार कॉलोनी में शुक्रवार से श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। कथा से पूर्व महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर नगर परिक्रमा की। कथा स्थल से शुरू हुई कलश यात्रा राष्ट्रीय राजमार्ग से होती हुई हरबर्टपुर चौक, सहारनपुर रोड, विकासनगर रोड से गुजरकर नगर की परिक्रमा करते हुए कथा स्थल पर समाप्त हुई।
कथा वाचक शक्ति प्रसाद देवली ने कलश जल से व्यास पीठ को अभिसिंचित कर कथा का शुभारंभ किया। पहले दिन कथा वाचक ने श्रीमद्भागवत पुराण की महत्ता का वर्णन करते हुए कहा कि कलियुग में भागवत कथा श्रवण से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। कलियुग के प्रवेश करते ही राजा परीक्षित की बुद्धि का हरण हुआ और उन्होंने अज्ञानता वश तपस्या में लीन ऋषि के गले में सर्प डाल दिया। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए राजा परीक्षित ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। कथा श्रवण से ही उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। बताया कि सनातन धर्म में मनुष्य को पाप कर्म करने से रोकने के लिए पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में अनेक प्रसंग दिए गए हैं। इन प्रसंगों के श्रवण से जीवन में सात्विकता आती है। सात्विक जीवन ही व्यक्ति को पुण्य की ओर ले जाता है और जो व्यक्ति पुण्य कर्म करता है वह मोक्ष की प्राप्ति करता है। इस दौरान पछवादून विकास मंच संयोजक अतुल शर्मा, वीर सिंह राणा, हरीचंद नागवाल, मंजू शर्मा, रतन सिंह राणा, सुंदर सिंह, लीला राणा, प्रभा जोशी, अर्चना मार्कंडेय, निर्मला खत्री, अंशू थापा, दीपा नेगी, आदेश गर्ग आदि मौजूद रहे।
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