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बैकुंठ चतुर्दशी मेला में खानाबदोश बच्चों का स्टॉल बना आकर्षण
Updated Mon, 26 Nov 2018 10:41 PM IST
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श्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेला एवं विकास प्रदर्शनी में खानाबदोश बच्चों की ओर से बनाए गए क्राफ्ट का स्टॉल यहां आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इन बच्चों के हुनर को मेलार्थियों से भी खूब सराहना मिल रही है। साथ ही इस हुनर के जरिए यह बच्चे अच्छी आमदनी भी कर रहे है।
खानाबदोश इन बच्चों के शिक्षिका संगीता फरासी ने हुनरमंद बनाया है। श्रीनगर के समीप एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका संगीता फरासी खानाबदोश बस्तियों में रहने वाले बच्चों को स्कूल की छुट्टी के बाद पढ़ाती हैं। उन्होंने बच्चों को भीख मांगने और कूड़ा बीनने जैसे कामों से मुक्त कर हुनरमंद बनाया है। भीख के बजाय बच्चों को कला से पैसे कमाने का तरीका बताया। इन बच्चों के हुनर को लोग पहचान मिले, इसके लिए शिक्षिका ने मेले में स्टॉल में प्रदर्शनी लगवाई और अब बच्चे हैंड-क्राफ्ट बेचकर पैसे कमा रहे हैं। बच्चों के रंगीन कागजों की बनाई क्राफ्ट लोगों को खूब पसंद आ रही है। यह बच्चे जहां स्वयं जीने का तरीका सीख गए हैं, वहीं दूसरों को भी मेहनत से जीने की प्रेरणा भी दे रहे हैं।
पालिका ने नहीं दिया सहयोग
मेले के तहत लगने वाले इस स्टाल को लगाने के लिए नगर पालिका ने दिलचस्पी नहीं ली। पालिका ने स्टॉल लगाने के लिए 10 हजार रुपये की रसीद कटवाने के लिए कहा। ऐसे में जब संगीता फरासी को पालिका से मदद नहीं मिली, तो ज्योति प्रशिक्षण संस्थान की आशा डोभाल ने अपने स्टॉल का आधा हिस्सा इन खानाबदोश बच्चों के लिए दे दिया। ताकि बच्चों का हुनर मेले में आने वाले लोग जान सके।
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खानाबदोश इन बच्चों के शिक्षिका संगीता फरासी ने हुनरमंद बनाया है। श्रीनगर के समीप एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका संगीता फरासी खानाबदोश बस्तियों में रहने वाले बच्चों को स्कूल की छुट्टी के बाद पढ़ाती हैं। उन्होंने बच्चों को भीख मांगने और कूड़ा बीनने जैसे कामों से मुक्त कर हुनरमंद बनाया है। भीख के बजाय बच्चों को कला से पैसे कमाने का तरीका बताया। इन बच्चों के हुनर को लोग पहचान मिले, इसके लिए शिक्षिका ने मेले में स्टॉल में प्रदर्शनी लगवाई और अब बच्चे हैंड-क्राफ्ट बेचकर पैसे कमा रहे हैं। बच्चों के रंगीन कागजों की बनाई क्राफ्ट लोगों को खूब पसंद आ रही है। यह बच्चे जहां स्वयं जीने का तरीका सीख गए हैं, वहीं दूसरों को भी मेहनत से जीने की प्रेरणा भी दे रहे हैं।
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पालिका ने नहीं दिया सहयोग
मेले के तहत लगने वाले इस स्टाल को लगाने के लिए नगर पालिका ने दिलचस्पी नहीं ली। पालिका ने स्टॉल लगाने के लिए 10 हजार रुपये की रसीद कटवाने के लिए कहा। ऐसे में जब संगीता फरासी को पालिका से मदद नहीं मिली, तो ज्योति प्रशिक्षण संस्थान की आशा डोभाल ने अपने स्टॉल का आधा हिस्सा इन खानाबदोश बच्चों के लिए दे दिया। ताकि बच्चों का हुनर मेले में आने वाले लोग जान सके।
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