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हिमालय रखवाला ही नहीं जीवनदाता भी : चिदानंद मुनि
Updated Mon, 10 Sep 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । हिमालय हमारा रखवाला ही नहीं प्राणदाता और जीवनदाता भी है। हिमालय दिवस को अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने के लिए यूनाइटेड नेशन को घोषणापत्र सौंपा जाएगा। यह बात स्वामी चिदानंद मुनि ने परमार्थ निकेतन आश्रम में हिमालय दिवस के अवसर पर आयोजित हिमालय चिंतन मंथन शिखर सम्मेलन के दौरान कही। सम्मेलन में जल व पर्यावरण वैज्ञानिकों, विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं, शोध छात्रों व विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने शिरकत की और हिमालयी क्षेत्र के संरक्षण, संवर्धन के लिए विमर्श किया। हिमालय चिंतन मंथन शिखर सम्मेेलन का शुभारंभ आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि, प्रख्यात पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, सूबे के वित्त मंत्री प्रकाश पंत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत और कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने संयुक्त रूप से किया।
सम्मेलन के प्रथम सत्र में पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने पर्यावरण विशेषज्ञों से हिमालय के संरक्षण के लिए जल, जंगल, जमीन और वृक्षों के संरक्षण पर चर्चा की। इस अवसर पर डॉ. जोशी ने हिमालय से सभी धर्मों व संतों को जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब भी बड़े संकट आए हैं, तो उसमें धर्मगुरु व संत समाज जुटा है। लिहाजा हिमालयी पर्यावरण के संवर्धन के लिए उनकी भागीदारी जरूरी है।
आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने हिमालय के संरक्षण के लिए इको सिस्टम को बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिमालय के इको सिस्टम को डेवलप करने के लिए देश के सभी नागरिकों को जमीनी स्तर पर प्रयास करने होंगे। हिमालय केवल पहाड़ के लोगों को ही जीवन प्रदान नहीं करता, बल्कि अमेजन के बाद हिमालय ही दुनिया को शुद्ध प्राणवायु देने वाला दूसरा बड़ा स्रोत है। उनका कहना है कि भारत में बहने वाली 11 प्रमुख नदियां हिमालय से ही निकलतीं हैं।
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इस मौके पर संत समाज ने हिमालय संरक्षण के लिए खुद जुड़ेें सबको जोड़ें का आह्वान किया। यहां परमार्थ निकेतन के महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती महाराज, विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह, इमाम उमर अहमद, मौलाना सैयद कोकब मुस्तबा, स्वामी हरिचेतनानंद, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, साध्वी भगवती सरस्वती, अभिनेत्री प्रियंका कोठारी, स्वामी ऋषेश्वरानंद, महंत दुर्गा दास, भास्कर प्रकाश आदि मौजूद थे।
सीएम ने भेजा संदेश
हिमालय दिवस पर परमार्थ निकेतन में आयोजित शिखर सम्मेलन में मौजूद लोगों को प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपना संदेश प्रेषित किया। मुख्यमंत्री की ओर से भेजे गए संदेश में तीन सी अर्थात केयर, कंजर्व, कोऑपरेट और तीन पी यानि प्लान, प्रोड्यूज और प्रमोट के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया गया।
यह प्रस्ताव हुए पारित
- आध्यात्म को केंद्र में रखकर हो विकास की कल्पना।
- हिमालयी पारिस्थितिकी के लिए हवा, मिट्टी, जंगल, पानी को भी उद्योग का दर्जा मिले।
-पीएम के नेतृत्व में समिति का गठन हो, जिसमें हिमायली राज्यों के मुख्यमंत्रियों को शामिल किया जाए।
- पीएम के नेतृत्व में गठित समिति समय समय पर हिमालय की प्रकृति की समीक्षा करे।
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सम्मेलन के प्रथम सत्र में पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने पर्यावरण विशेषज्ञों से हिमालय के संरक्षण के लिए जल, जंगल, जमीन और वृक्षों के संरक्षण पर चर्चा की। इस अवसर पर डॉ. जोशी ने हिमालय से सभी धर्मों व संतों को जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब भी बड़े संकट आए हैं, तो उसमें धर्मगुरु व संत समाज जुटा है। लिहाजा हिमालयी पर्यावरण के संवर्धन के लिए उनकी भागीदारी जरूरी है।
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आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने हिमालय के संरक्षण के लिए इको सिस्टम को बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिमालय के इको सिस्टम को डेवलप करने के लिए देश के सभी नागरिकों को जमीनी स्तर पर प्रयास करने होंगे। हिमालय केवल पहाड़ के लोगों को ही जीवन प्रदान नहीं करता, बल्कि अमेजन के बाद हिमालय ही दुनिया को शुद्ध प्राणवायु देने वाला दूसरा बड़ा स्रोत है। उनका कहना है कि भारत में बहने वाली 11 प्रमुख नदियां हिमालय से ही निकलतीं हैं।
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इस मौके पर संत समाज ने हिमालय संरक्षण के लिए खुद जुड़ेें सबको जोड़ें का आह्वान किया। यहां परमार्थ निकेतन के महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती महाराज, विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह, इमाम उमर अहमद, मौलाना सैयद कोकब मुस्तबा, स्वामी हरिचेतनानंद, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, साध्वी भगवती सरस्वती, अभिनेत्री प्रियंका कोठारी, स्वामी ऋषेश्वरानंद, महंत दुर्गा दास, भास्कर प्रकाश आदि मौजूद थे।
सीएम ने भेजा संदेश
हिमालय दिवस पर परमार्थ निकेतन में आयोजित शिखर सम्मेलन में मौजूद लोगों को प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपना संदेश प्रेषित किया। मुख्यमंत्री की ओर से भेजे गए संदेश में तीन सी अर्थात केयर, कंजर्व, कोऑपरेट और तीन पी यानि प्लान, प्रोड्यूज और प्रमोट के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया गया।
यह प्रस्ताव हुए पारित
- आध्यात्म को केंद्र में रखकर हो विकास की कल्पना।
- हिमालयी पारिस्थितिकी के लिए हवा, मिट्टी, जंगल, पानी को भी उद्योग का दर्जा मिले।
-पीएम के नेतृत्व में समिति का गठन हो, जिसमें हिमायली राज्यों के मुख्यमंत्रियों को शामिल किया जाए।
- पीएम के नेतृत्व में गठित समिति समय समय पर हिमालय की प्रकृति की समीक्षा करे।