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शक्ति के बल पर नहीं हो सकती शांति स्थापित:चिदानंद मुनि
Updated Fri, 24 Aug 2018 01:28 AM IST
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शक्ति के बल पर शांति स्थापित नहीं हो सकती : चिदानंद
ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
मुनिकीरेती। मॉरिशस में चल रहा11वां हिंदी सम्मेलन बृहस्पतिवार को परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों की दिव्य गंगा आरती के साथ संपन्न हो गया। इस मौके पर मॉरिशस के गंगा तालाब के तट पर गंगा की आरती, विश्वशांति पाठ और चुनरी महोत्सव का आयोजन किया गया। आश्रम के मीडिया विभाग के अनुसार मॉरिशस में सम्मेलन के दौरान परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने अतिथियों का शंख घ्वनि, तिलक और रक्षासूत्र बांधकर स्वागत किया। इसके बाद परमार्थ प्रवक्ता नंदिनी त्रिपाठी ने लोगों को गंगा आरती का महत्व, भारतीय संस्कृति और आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि द्वारा विश्व स्तर पर चलाए जा रहे पर्यावरण संरक्षण अभियान की जानकारी दी। स्वामी चिदानंद मुनि ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय संस्कृति शांति की स्थापना का संदेश देती है। हिंदू धर्म तो शांति और सद्भाव की स्थापना के लिए युगों से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि केवल शक्ति के बल पर शांति की स्थापना नहीं हो सकती। समाज में समानता और सद्भाव को स्थापित करना होगा। हिंदी सम्मेलन में परमार्थ निकेतन परिवार की ओर से नंदिनी त्रिपाठी, आचार्य दिलीप क्षेत्री, आचार्य दीपक शर्मा, नरेंद्र बिष्ट, पुनीत मिश्रा, सूर्यप्रकाश, अभय पांडे ने प्रतिभाग किया।
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मुनिकीरेती। मॉरिशस में चल रहा11वां हिंदी सम्मेलन बृहस्पतिवार को परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों की दिव्य गंगा आरती के साथ संपन्न हो गया। इस मौके पर मॉरिशस के गंगा तालाब के तट पर गंगा की आरती, विश्वशांति पाठ और चुनरी महोत्सव का आयोजन किया गया। आश्रम के मीडिया विभाग के अनुसार मॉरिशस में सम्मेलन के दौरान परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने अतिथियों का शंख घ्वनि, तिलक और रक्षासूत्र बांधकर स्वागत किया। इसके बाद परमार्थ प्रवक्ता नंदिनी त्रिपाठी ने लोगों को गंगा आरती का महत्व, भारतीय संस्कृति और आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि द्वारा विश्व स्तर पर चलाए जा रहे पर्यावरण संरक्षण अभियान की जानकारी दी। स्वामी चिदानंद मुनि ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय संस्कृति शांति की स्थापना का संदेश देती है। हिंदू धर्म तो शांति और सद्भाव की स्थापना के लिए युगों से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि केवल शक्ति के बल पर शांति की स्थापना नहीं हो सकती। समाज में समानता और सद्भाव को स्थापित करना होगा। हिंदी सम्मेलन में परमार्थ निकेतन परिवार की ओर से नंदिनी त्रिपाठी, आचार्य दिलीप क्षेत्री, आचार्य दीपक शर्मा, नरेंद्र बिष्ट, पुनीत मिश्रा, सूर्यप्रकाश, अभय पांडे ने प्रतिभाग किया।