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चिकित्सकों और संसाधनों की कमी से प्रसूताओं को झेलनी पड़ती है दिक्कत
Updated Wed, 04 Jul 2018 10:32 PM IST
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श्रीनगर। गढ़वाल के केंद्र बिंदु में स्थित राजकीय मेडिकल कालेज श्रीनगर के स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से कई बार जच्चा-बच्चा की जान पर बन आती है। कई बार गर्भवती महिलाओं को रेफर कर दिया जाता है, या प्रसव से कुछ दिन पूर्व अनाधिकृत रूप से उनको देहरादून जाने की सलाह दे दी जाती है।
यही स्थिति बाल रोग विभाग/एनआइसीयू (शिशु गहन निगरानी केंद्र) की है। एनआईसीयू में स्थापित चारों वेंटिलेटर खराब चल रहे हैं। दो वेंटिलेटर पहले ही खराब हो चुके थे, जबकि दो हाल में खराब हुए हैं। ऐसी स्थिति में चिकित्सकों के समक्ष गंभीर परेशानी झेल रहे नवजात शिशु को रेफर करने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचता।
पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली व टिहरी के आंशिक क्षेत्र से अकसर गर्भवती महिलाओं को रेफर कर मेडिकल कॉलेज श्रीनगर भेजा जाता है, लेकिन कई बार उनको यहां भी उपचार नहीं मिल पाता है, जिसके चलते उनको देहरादून जाना पड़ता है। ऐसे में कभी-कभी गर्भवती महिला की रास्ते में जान भी चली जाती है।
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दिक्कत यह है कि स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग और बाल रोग विभाग चिकित्सकों की कमी झेल रहे हैं। स्त्री रोग विभाग में प्रोफेसर/विभागाध्यक्ष डा. सुचित्रा जैन, एसोसिएट प्रोफेसर डा. नवज्योति वोरा और सहायक प्रोफेसर डा. संध्या ही कार्यरत हैं, जबकि यहां एक प्रोफेसर, दो एसोसिएट प्रोफेसर, पांच सहायक प्रोफेसर और तीन सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों सहित कुल 11 विशेषज्ञ चिकित्सक होने चाहिए। ऐसे ही बाल रोग विभाग में भी एचओडी/प्रोफेसर आनंद जैन व दो सहायक प्रोफेसर डा. वरुण तिवाड़ी व डा. राकेश कुमार तैनात हैं। यहां भी एक एचओडी/प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर, दो सहायक प्रोफेसर और तीन सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर होने चाहिए।
------------
-वेंटिलेटर ठीक करने के लिए संबंधित फर्म को पत्र भेजा गया है। अस्पताल में जितनी गर्भवती महिलाएं आ रही हैं, उनके प्रसव कराए जा रहे हैं।
-प्रो. केपी सिंह, चिकित्सा अधीक्षक बेस अस्पताल
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यही स्थिति बाल रोग विभाग/एनआइसीयू (शिशु गहन निगरानी केंद्र) की है। एनआईसीयू में स्थापित चारों वेंटिलेटर खराब चल रहे हैं। दो वेंटिलेटर पहले ही खराब हो चुके थे, जबकि दो हाल में खराब हुए हैं। ऐसी स्थिति में चिकित्सकों के समक्ष गंभीर परेशानी झेल रहे नवजात शिशु को रेफर करने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचता।
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पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली व टिहरी के आंशिक क्षेत्र से अकसर गर्भवती महिलाओं को रेफर कर मेडिकल कॉलेज श्रीनगर भेजा जाता है, लेकिन कई बार उनको यहां भी उपचार नहीं मिल पाता है, जिसके चलते उनको देहरादून जाना पड़ता है। ऐसे में कभी-कभी गर्भवती महिला की रास्ते में जान भी चली जाती है।
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दिक्कत यह है कि स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग और बाल रोग विभाग चिकित्सकों की कमी झेल रहे हैं। स्त्री रोग विभाग में प्रोफेसर/विभागाध्यक्ष डा. सुचित्रा जैन, एसोसिएट प्रोफेसर डा. नवज्योति वोरा और सहायक प्रोफेसर डा. संध्या ही कार्यरत हैं, जबकि यहां एक प्रोफेसर, दो एसोसिएट प्रोफेसर, पांच सहायक प्रोफेसर और तीन सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों सहित कुल 11 विशेषज्ञ चिकित्सक होने चाहिए। ऐसे ही बाल रोग विभाग में भी एचओडी/प्रोफेसर आनंद जैन व दो सहायक प्रोफेसर डा. वरुण तिवाड़ी व डा. राकेश कुमार तैनात हैं। यहां भी एक एचओडी/प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर, दो सहायक प्रोफेसर और तीन सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर होने चाहिए।
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-वेंटिलेटर ठीक करने के लिए संबंधित फर्म को पत्र भेजा गया है। अस्पताल में जितनी गर्भवती महिलाएं आ रही हैं, उनके प्रसव कराए जा रहे हैं।
-प्रो. केपी सिंह, चिकित्सा अधीक्षक बेस अस्पताल