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पेयजल समस्या से निपटने अपने स्तर पर भी करें प्रयास
Updated Sun, 24 Jun 2018 02:28 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश ।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत शनिवार को यमकेश्वर प्रखंड के तल्ला बणास में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने राजकीय प्राथमिक विद्यालय की जीर्णोद्धार योजना का उद्घाटन भी किया। मुख्यमंत्री ने तल्ला बणास, मल्ला बणास, किमसार समेत आसपास की अन्य ग्राम सभाओं में पेयजल की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए लोगों को अपने स्तर पर भी प्रयास करने की जरूरत बताई। कहा कि मनरेगा के तहत पानी के स्रोतों को दोबारा जीवित किया किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार जिस तरह से देहरादून में रिस्पना नदी को पुनर्जीवित करने की कवायद कर रही है, उसी तर्ज पर उत्तराखंड में गांव में लोगों को अपने स्तर पर भी पानी के स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए पेड़ लगाने, तटबंध बनाने जैसे काम मनरेगा के तहत करने चाहिए। इस अवसर पर भागवताचार्य डॉ. दुर्गेश आचार्य ने कहा कि राज्य सरकार को उत्तराखंड को शराब मुक्त बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान उत्तराखंड को शराब नहीं पानी की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि राज्य में 70 फीसदी समस्याओं के लिए बढ़ती शराबखोरी जिम्मेदार है। सरकार को पानी और गंगा को बचाने के लिए युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है। इस अवसर पर कथा आयोजक चेतना नेगी, मनजीत नेगी, ग्राम प्रधान विनोद नेगी, आलम सिंह नेगी, दिगंबर नेगी, महावीर प्रसाद कुकरेती, पीएस राणा आदि मौजूद थे।
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत शनिवार को यमकेश्वर प्रखंड के तल्ला बणास में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने राजकीय प्राथमिक विद्यालय की जीर्णोद्धार योजना का उद्घाटन भी किया। मुख्यमंत्री ने तल्ला बणास, मल्ला बणास, किमसार समेत आसपास की अन्य ग्राम सभाओं में पेयजल की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए लोगों को अपने स्तर पर भी प्रयास करने की जरूरत बताई। कहा कि मनरेगा के तहत पानी के स्रोतों को दोबारा जीवित किया किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार जिस तरह से देहरादून में रिस्पना नदी को पुनर्जीवित करने की कवायद कर रही है, उसी तर्ज पर उत्तराखंड में गांव में लोगों को अपने स्तर पर भी पानी के स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए पेड़ लगाने, तटबंध बनाने जैसे काम मनरेगा के तहत करने चाहिए। इस अवसर पर भागवताचार्य डॉ. दुर्गेश आचार्य ने कहा कि राज्य सरकार को उत्तराखंड को शराब मुक्त बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान उत्तराखंड को शराब नहीं पानी की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि राज्य में 70 फीसदी समस्याओं के लिए बढ़ती शराबखोरी जिम्मेदार है। सरकार को पानी और गंगा को बचाने के लिए युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है। इस अवसर पर कथा आयोजक चेतना नेगी, मनजीत नेगी, ग्राम प्रधान विनोद नेगी, आलम सिंह नेगी, दिगंबर नेगी, महावीर प्रसाद कुकरेती, पीएस राणा आदि मौजूद थे।
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