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पाठ्यक्रम में शामिल हो क्रांतिकारी सुमन की जीवनी
Updated Wed, 13 Jun 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश ।
सुमन स्मृति मंच के अध्यक्ष व वरिष्ठ साहित्यकार आरपी डंगवाल ने राज्य सरकार से संस्कृत में रूपांतरित टिहरी जनक्रांति के महानायक श्रीदेव सुमन की जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की है। कहा कि इससे नौनिहालों को क्रांतिकारी सुमन के जीवन को जानने को मौका मिलेगा और उनका मार्गदर्शन होगा । साहित्यकार आरपी डंगवाल ने कहा कि टिहरी जनक्रांति के महानायक श्रीदेव सुमन का जीवन वृत्त संस्कृत में उपलब्ध है।
प्रदेश सरकार को संस्कृत में रूपांतरित सुमन की जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए, जिससे उनके महान त्याग और बलिदान की गाथा से नौनिहाल रूबरू हो सकेंगे। बताया कि टिहरी कारागार में तत्कालीन सामंती राजा के अत्याचार के कारण श्रीदेव सुमन ने 84 दिन तक भूख हड़ताल की थी। उनका मानना है कि प्रदेश की अनेक वीरगाथाओं में श्रीदेव सुमन की गाथा को जोड़ने से देवभूमि का ऐतिहासिक महत्व और अधिक बढ़ेगा। उन्होंने राज्य सरकार से इस दिशा में पहल करने की पुरजोर वकालत की है।
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सुमन स्मृति मंच के अध्यक्ष व वरिष्ठ साहित्यकार आरपी डंगवाल ने राज्य सरकार से संस्कृत में रूपांतरित टिहरी जनक्रांति के महानायक श्रीदेव सुमन की जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की है। कहा कि इससे नौनिहालों को क्रांतिकारी सुमन के जीवन को जानने को मौका मिलेगा और उनका मार्गदर्शन होगा । साहित्यकार आरपी डंगवाल ने कहा कि टिहरी जनक्रांति के महानायक श्रीदेव सुमन का जीवन वृत्त संस्कृत में उपलब्ध है।
प्रदेश सरकार को संस्कृत में रूपांतरित सुमन की जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए, जिससे उनके महान त्याग और बलिदान की गाथा से नौनिहाल रूबरू हो सकेंगे। बताया कि टिहरी कारागार में तत्कालीन सामंती राजा के अत्याचार के कारण श्रीदेव सुमन ने 84 दिन तक भूख हड़ताल की थी। उनका मानना है कि प्रदेश की अनेक वीरगाथाओं में श्रीदेव सुमन की गाथा को जोड़ने से देवभूमि का ऐतिहासिक महत्व और अधिक बढ़ेगा। उन्होंने राज्य सरकार से इस दिशा में पहल करने की पुरजोर वकालत की है।
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