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अब एफआरआई होगी उल्लू के पंजों की जांच
Updated Fri, 25 May 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
रेलवे रोड स्थित एक पूजा सामग्री की दुकान से उल्लू के दो जोड़ी पंजे मिलने के मामले में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट (डब्ल्यूएलआई) ने जांच से इनकार कर दिया है। इंस्टीट्यूट का कहना है कि वह मांस की जांच करते हैं। लिहाजा, अब पंजों को जांच के लिए एफआरआई भेजा जाएगा। जांच में पंजों के उल्लू के ही होने की पुष्टि पर संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वन क्षेत्राधिकारी आरपीएस नेगी ने बताया कि बीती 25 अप्रैल को उनकी टीम ने मुखबिर की सूचना पर रेलवे रोड स्थित एक पूजा सामग्री की दुकान में छापा मारा था, जिसमें उन्हें उल्लू के दो जोड़ी पंजे बरामद हुए थे। दुकान में छापेमारी के विरोध में शहर के अन्य व्यापारी उतर आए थे।
उन्होंने दुकानदार को निर्दोष करार दिया था। इस दौरान यह भी कहा गया था कि पंजे नकली हैं और दुकानदार को फंसाया जा रहा है। मामला बढ़ने पर रेंज कार्यालय ने पंजों को जांच के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट भेज दिया था। करीब एक माह बाद इंस्टीट्यूट से रेंज दफ्तर को रिपोर्ट भेजी गई है, जिसमें कहा गया है कि संस्थान में मांस की जांच की जाती है। लिहाजा, पंजों की जांच संभव नहीं है। इसमें एफआरआई (फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट) में पंजों की जांच कराने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद अब रेंजर ने पंजों को एफआरआई भेजने की तैयार कर ली है।
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रेलवे रोड स्थित एक पूजा सामग्री की दुकान से उल्लू के दो जोड़ी पंजे मिलने के मामले में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट (डब्ल्यूएलआई) ने जांच से इनकार कर दिया है। इंस्टीट्यूट का कहना है कि वह मांस की जांच करते हैं। लिहाजा, अब पंजों को जांच के लिए एफआरआई भेजा जाएगा। जांच में पंजों के उल्लू के ही होने की पुष्टि पर संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वन क्षेत्राधिकारी आरपीएस नेगी ने बताया कि बीती 25 अप्रैल को उनकी टीम ने मुखबिर की सूचना पर रेलवे रोड स्थित एक पूजा सामग्री की दुकान में छापा मारा था, जिसमें उन्हें उल्लू के दो जोड़ी पंजे बरामद हुए थे। दुकान में छापेमारी के विरोध में शहर के अन्य व्यापारी उतर आए थे।
उन्होंने दुकानदार को निर्दोष करार दिया था। इस दौरान यह भी कहा गया था कि पंजे नकली हैं और दुकानदार को फंसाया जा रहा है। मामला बढ़ने पर रेंज कार्यालय ने पंजों को जांच के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट भेज दिया था। करीब एक माह बाद इंस्टीट्यूट से रेंज दफ्तर को रिपोर्ट भेजी गई है, जिसमें कहा गया है कि संस्थान में मांस की जांच की जाती है। लिहाजा, पंजों की जांच संभव नहीं है। इसमें एफआरआई (फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट) में पंजों की जांच कराने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद अब रेंजर ने पंजों को एफआरआई भेजने की तैयार कर ली है।
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