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मरम्मत के एक साल में ही क्षतिग्रस्त हुई पावर कैनाल
Updated Sat, 17 Mar 2018 02:11 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
शक्ति पावर कैनाल पर कराए गए क्लोजर कार्य ने एक साल में ही जवाब देना शुरू कर दिया है। मरम्मत के नाम पर नहर की पटरियों पर कराए गए निर्माण कार्य में से ज्यादातर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जिससे क्लोजर कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
बीते साल अप्रैल माह में जल विद्युत निगम ने करोड़ों रुपये की लागत से डाकपत्थर से लेकर ढालीपुर तक 15 किमी लंबी नहर का क्लोजर कार्य किया था। जिसके तहत नहर की सफाई और क्षतिग्रस्त पटरियों की मरम्मत कराई गई थी। लेकिन अब ज्यादातर जगहों पर पटरियां फिर से क्षतिग्रस्त नजर आने लगी है। जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। समाज सेवी भास्कर चुग, आलम, नासिर आदि का कहना है कि नहर मरम्मत के नाम पर निगम प्रबंधन ने ठेकेदारों से मिलीभगत कर धनराशि को ठिकाने लगाने का काम किया गया। निर्माण कार्य की ठीक ढंग से मानीटरिंग नहीं की गई। जिसका नतीजा अब क्षतिग्रस्त पटरियों के रूप में दिखने लगा है।
यूजेवीएनएल(सिविल) के महाप्रबंधक एससी बलूनी ने बताया कि मामले में अधिशासी अभियंता से जांच रिपोर्ट मांगी गई है। ठेकेदारों की जमानत राशि को अभी रिलीज नहीं किया गया है। यदि कहीं पर पटरियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। तो उसकी दुबारा से मरम्मत कराई जाएगी।
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शक्ति पावर कैनाल पर कराए गए क्लोजर कार्य ने एक साल में ही जवाब देना शुरू कर दिया है। मरम्मत के नाम पर नहर की पटरियों पर कराए गए निर्माण कार्य में से ज्यादातर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जिससे क्लोजर कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
बीते साल अप्रैल माह में जल विद्युत निगम ने करोड़ों रुपये की लागत से डाकपत्थर से लेकर ढालीपुर तक 15 किमी लंबी नहर का क्लोजर कार्य किया था। जिसके तहत नहर की सफाई और क्षतिग्रस्त पटरियों की मरम्मत कराई गई थी। लेकिन अब ज्यादातर जगहों पर पटरियां फिर से क्षतिग्रस्त नजर आने लगी है। जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। समाज सेवी भास्कर चुग, आलम, नासिर आदि का कहना है कि नहर मरम्मत के नाम पर निगम प्रबंधन ने ठेकेदारों से मिलीभगत कर धनराशि को ठिकाने लगाने का काम किया गया। निर्माण कार्य की ठीक ढंग से मानीटरिंग नहीं की गई। जिसका नतीजा अब क्षतिग्रस्त पटरियों के रूप में दिखने लगा है।
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यूजेवीएनएल(सिविल) के महाप्रबंधक एससी बलूनी ने बताया कि मामले में अधिशासी अभियंता से जांच रिपोर्ट मांगी गई है। ठेकेदारों की जमानत राशि को अभी रिलीज नहीं किया गया है। यदि कहीं पर पटरियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। तो उसकी दुबारा से मरम्मत कराई जाएगी।
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