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जिला मजिस्ट्रेट ने एएचपीसीएल को जारी किया कारण बताओ नोटिस
Updated Tue, 06 Feb 2018 10:32 PM IST
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श्रीनगर। पेयजल योजना के लिए धनराशि देने में लगातार टालमटोल कर रही एएचपीसीएल (अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी लि.) को जिलाधिकारी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। डीएम सुशील कुमार ने आदेशों की लगातार अवहेलना करने पर अनुबंध की अवशेष धनराशि हर्जाना सहित वसूलने की चेतावनी दी है।
श्रीनगर जल विद्युत परियोजना निर्माण के बाद पानी के संकट को देखते हुए एएचपीसीएल वित्त पोषित श्रीनगर-पौड़ी वैकल्पिक स्रोत पेयजल योजना बनाने के लिए पेयजल निगम, जल संस्थान और एएचपीसीएल के बीच 30 मार्च 2012 को अनुबंध हुआ। इसकी अनुमानित लागत 12 करोड़ 70 लाख 98 हजार तय हुई। करार के मुताबिक कंपनी को 28 फरवरी 2013 तक पूर्ण धनराशि देनी थी, लेकिन कंपनी ने आज तक सिर्फ पांच करोड़ रुपये दिए। यह धनराशि भी 4 मार्च 2016 को दी गई।
गढ़वाल आयुक्त और जिलाधिकारी स्तर पर इस मामले में बैठक आयोजित की गई। शासन स्तर पर 21 मई 2015 को आयोजित बैठक में कंपनी ने तीन माह के भीतर कार्यदायी संस्था को धनराशि उपलब्ध कराने की बात कही, लेकिन कंपनी ने अपना यह वायदा भी पूरा नहीं किया। जिलाधिकारी की मौजूदगी में 21 सितंबर 2017 को बैठक संपन्न हुई, जिसमें कंपनी ने अक्तूबर के प्रथम सप्ताह तक 5 करोड़ देने और शेष धनराशि मई 2018 तक देने का आश्वासन दिया, लेकिन कंपनी ने फिर भी धनराशि नहीं दी।
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जिलाधिकारी ने बताया कि सभी तथ्यों से स्पष्ट होता है कि कंपनी की ओर से अनुबंध की अवहेलना के कारण योजना निर्माण में देरी हुई है। इस वजह से जनता को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि कंपनी जानबूझकर ऐसा कर रही है। जिलाधिकारी ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
श्रीनगर जल विद्युत परियोजना निर्माण के बाद पानी के संकट को देखते हुए एएचपीसीएल वित्त पोषित श्रीनगर-पौड़ी वैकल्पिक स्रोत पेयजल योजना बनाने के लिए पेयजल निगम, जल संस्थान और एएचपीसीएल के बीच 30 मार्च 2012 को अनुबंध हुआ। इसकी अनुमानित लागत 12 करोड़ 70 लाख 98 हजार तय हुई। करार के मुताबिक कंपनी को 28 फरवरी 2013 तक पूर्ण धनराशि देनी थी, लेकिन कंपनी ने आज तक सिर्फ पांच करोड़ रुपये दिए। यह धनराशि भी 4 मार्च 2016 को दी गई।
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गढ़वाल आयुक्त और जिलाधिकारी स्तर पर इस मामले में बैठक आयोजित की गई। शासन स्तर पर 21 मई 2015 को आयोजित बैठक में कंपनी ने तीन माह के भीतर कार्यदायी संस्था को धनराशि उपलब्ध कराने की बात कही, लेकिन कंपनी ने अपना यह वायदा भी पूरा नहीं किया। जिलाधिकारी की मौजूदगी में 21 सितंबर 2017 को बैठक संपन्न हुई, जिसमें कंपनी ने अक्तूबर के प्रथम सप्ताह तक 5 करोड़ देने और शेष धनराशि मई 2018 तक देने का आश्वासन दिया, लेकिन कंपनी ने फिर भी धनराशि नहीं दी।
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जिलाधिकारी ने बताया कि सभी तथ्यों से स्पष्ट होता है कि कंपनी की ओर से अनुबंध की अवहेलना के कारण योजना निर्माण में देरी हुई है। इस वजह से जनता को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि कंपनी जानबूझकर ऐसा कर रही है। जिलाधिकारी ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।