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पाले से बचने के लिए करें फसलों की सिंचाई
Updated Wed, 17 Jan 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
पाला फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। पाले का सबसे ज्यादा असर आम, लीची और पपीते पर पड़ रहा है। अधिक पाला पड़ने से पौधे झुलस कर मुरझा जाते हैं। विशेषज्ञों की माने तो जमीन में नमी कायम रख कर पाले से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
इन दिनों क्षेत्र में जमकर पाला पड़ रहा है। जिसके चलते किसान चिंतित हैं। जहां पर्वतीय इलाकों में मटर पर इसकी मार पड़ रही है, वहीं निचले इलाकों में आम, लीची और पपीता इससे प्रभावित हो रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डा. एसएस सिंह ने बताया कि पाले का सबसे ज्यादा असर आम पर पड़ता है। ऐसे में सिंचाई ही इसके प्रभाव को कम करने का एक मात्र जरिया है। नियमित सिंचाई से पाले का प्रभाव 70-80 फीसदी कम हो जाता है।
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पांच साल से कम उम्र के लीची और पपीते के पौधों के ऊपर झोपड़ी बनाकर पाले का प्रभाव कम किया जा सकता है। असिंचित क्षेत्रों में मुख्य तने के चारों ओर घास फूस या पुआल की 4-5 इंच मोटी परत बिछाकर पाले के प्रभाव को 60-65 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।
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पाला फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। पाले का सबसे ज्यादा असर आम, लीची और पपीते पर पड़ रहा है। अधिक पाला पड़ने से पौधे झुलस कर मुरझा जाते हैं। विशेषज्ञों की माने तो जमीन में नमी कायम रख कर पाले से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
इन दिनों क्षेत्र में जमकर पाला पड़ रहा है। जिसके चलते किसान चिंतित हैं। जहां पर्वतीय इलाकों में मटर पर इसकी मार पड़ रही है, वहीं निचले इलाकों में आम, लीची और पपीता इससे प्रभावित हो रहा है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डा. एसएस सिंह ने बताया कि पाले का सबसे ज्यादा असर आम पर पड़ता है। ऐसे में सिंचाई ही इसके प्रभाव को कम करने का एक मात्र जरिया है। नियमित सिंचाई से पाले का प्रभाव 70-80 फीसदी कम हो जाता है।
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पांच साल से कम उम्र के लीची और पपीते के पौधों के ऊपर झोपड़ी बनाकर पाले का प्रभाव कम किया जा सकता है। असिंचित क्षेत्रों में मुख्य तने के चारों ओर घास फूस या पुआल की 4-5 इंच मोटी परत बिछाकर पाले के प्रभाव को 60-65 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।