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वेतन कटौती से भड़के ऊर्जा निगम के कर्मियों ने निकाली रैली
Updated Thu, 21 Dec 2017 10:41 PM IST
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श्रीनगर। सातवां वेतनमान लागू करने के बाद आई वेतन विसंगति की तरफ सरकार का ध्यान खींचने के लिए ऊर्जा निगम के तीनों प्रतिष्ठानों (उत्तराखंड ऊर्जा निगम, उत्तराखंड लघु जल विद्युत निगम और विद्युत पारेषण निगम) के अधिकारियों/कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को जनजागरण रैली निकाली। रैली में रुद्रप्रयाग, पौड़ी, चमोली और टिहरी जिलों के ऊर्जा निगमों के विभिन्न संगठनों ने प्रतिभाग किया। रैली के बाद एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया।
बृहस्पतिवार को श्रीनगर स्थित 132 केवी विद्युत सब स्टेशन में विभिन्न स्थानों से आए नियमित और संविदा कर्मचारी और अधिकारी उत्तराखंड विद्युत अधिकारी/कर्मचारी संघर्ष समिति के बैनर तले एकत्रित हुए। यहां आयोजित सभा में कहा गया कि सरकार की हठधर्मिता के कारण निगमों के कर्मचारी/अधिकारी 5 जनवरी से हड़ताल पर जाने को मजबूर हैं। कहा गया कि चंद नौकरशाह ऊर्जा कर्मियों को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती पर उतारू हैं।
बिजली कर्मियों की जोखिमपूर्ण सेवा को देखते हुए वर्ष 1979 से उनको विशेष वेतन भत्ते मिलते आए हैं। सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू होने के बाद केंद्र सरकार के उपक्रम ओएनजीसी और एनटीपीसी के कर्मचारियों को भी यह सुविधा मिलती आ रही है। इसके विपरीत उत्तराखंड में इसमें कटौती की जा रही है।
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उन्होंने समयबद्ध वेतनमान को 10, 20 और 30 वर्ष करने पर रोष प्रकट किया। उन्होंने पे मेट्रिक्स की विसंगति को दूर करते हुए 31 दिसंबर 2015 तक लागू पूर्ववर्ती व्यवस्था यथावत करने और संविदा कर्मियों के संबंध में श्रम न्यायालय की ओर से पारित आदेश के अनुरूप शासनादेश निर्गत करने की मांग की। सभा के बाद कर्मियों ने बाजार क्षेत्र में रैली निकाली। सभा की अध्यक्षता सेवानिवृत्त इंजीनियर आरएस शुक्ला ने की।
रैली में केंद्रीय अध्यक्ष जीएन कोठियाल, विनीत गुप्ता, राम कुमार, आरपी नौटियाल, मुकेश कुमार, अभिनव रावत, ज्योति भाष्कर रावत, जगत राम भट्ट, महावीर लखेड़ा, एमएल आर्य व विपिन गौतम आदि शामिल थे।
बृहस्पतिवार को श्रीनगर स्थित 132 केवी विद्युत सब स्टेशन में विभिन्न स्थानों से आए नियमित और संविदा कर्मचारी और अधिकारी उत्तराखंड विद्युत अधिकारी/कर्मचारी संघर्ष समिति के बैनर तले एकत्रित हुए। यहां आयोजित सभा में कहा गया कि सरकार की हठधर्मिता के कारण निगमों के कर्मचारी/अधिकारी 5 जनवरी से हड़ताल पर जाने को मजबूर हैं। कहा गया कि चंद नौकरशाह ऊर्जा कर्मियों को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती पर उतारू हैं।
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बिजली कर्मियों की जोखिमपूर्ण सेवा को देखते हुए वर्ष 1979 से उनको विशेष वेतन भत्ते मिलते आए हैं। सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू होने के बाद केंद्र सरकार के उपक्रम ओएनजीसी और एनटीपीसी के कर्मचारियों को भी यह सुविधा मिलती आ रही है। इसके विपरीत उत्तराखंड में इसमें कटौती की जा रही है।
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उन्होंने समयबद्ध वेतनमान को 10, 20 और 30 वर्ष करने पर रोष प्रकट किया। उन्होंने पे मेट्रिक्स की विसंगति को दूर करते हुए 31 दिसंबर 2015 तक लागू पूर्ववर्ती व्यवस्था यथावत करने और संविदा कर्मियों के संबंध में श्रम न्यायालय की ओर से पारित आदेश के अनुरूप शासनादेश निर्गत करने की मांग की। सभा के बाद कर्मियों ने बाजार क्षेत्र में रैली निकाली। सभा की अध्यक्षता सेवानिवृत्त इंजीनियर आरएस शुक्ला ने की।
रैली में केंद्रीय अध्यक्ष जीएन कोठियाल, विनीत गुप्ता, राम कुमार, आरपी नौटियाल, मुकेश कुमार, अभिनव रावत, ज्योति भाष्कर रावत, जगत राम भट्ट, महावीर लखेड़ा, एमएल आर्य व विपिन गौतम आदि शामिल थे।