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गैरसैंण के हिस्से फिर इंतजार......
Updated Fri, 08 Dec 2017 10:49 PM IST
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भराड़ीसैंण। दशकों से पहाड़ी राज्य और पहाड़ में राजधानी जैसी उम्मीद से भले ही गैरसैंण को बल मिलता हो, लेकिन गैरसैंण में चार बार सरकार की ओर से सत्र आयोजित करने के बाद भी गैरसैंण के हिस्से अभी इंतजार ही है। लोगों का कहना है कि भराड़ीसैंण में विधानसभा सहित तमाम निर्माण कार्यों का दम भरने वाली कांग्रेस हो या घोषणा पत्र में ग्रीष्मकालीन राजधानी की बात करने वाली भाजपा, सब बातें ही करते हैं।
गैरसैंण के राज्य आंदोलनकारी महेशानंद जुयाल का कहना है कि वर्ष 2014 में यहां पहला सत्र टेंट में हुआ था। तब लोगों में अपार उत्साह था। इसमें यहां विधानसभा निर्माण की घोषणा हुई। विधानसभा भवन भूमि पूजन के बाद नवंबर 2015 में राजकीय पॉलीटेक्निक के भवन में दूसरा सत्र आयोजित हुआ, जबकि तीसरा सत्र नवंबर 2016 और चौथा सत्र 7 दिसंबर में भराड़ीसैंण के निर्माणाधीन विधानभवन में आयोजित किया गया, लेकिन स्थानीय लोगों की बहुप्रतीक्षित मांग गैरसैंण जिला और राजधानी दोनों नहीं मिले। हालांकि, शुक्रवार को आयोजित सत्र के दौरान बदरीनाथ के विधायक महेंद्र भट्ट ने गैरसैंण को जिला बनाने की पैरवी सदन के बाहर की, लेकिन सदन के भीतर गैरसैंण को लेकर सरकार और विपक्ष एकराय नहीं बना पाए।
परवाड़ी के प्रधान जोध सिंह नेगी का कहना है कि ग्रामीणों ने विधानसभा भवन के लिए अपना गोचर, पनघट सभी दे दिए, लेकिन दो दिन के सत्र के सिवाय अभी तक लोगों को कुछ नहीं मिला। सिराणा के वीरेंद्र मेहरा का कहना है कि सत्र आयोजन कर पहाड़ का न तो विकास होगा और ना पलायन रुकेगा। चिह्न्ति राज्य आंदोलनकारी दिनेश जोशी ने कहा कि गैरसैंण राज्य आंदोलन की भावना रही है कि गैरसैंण प्रदेश की राजधानी हो, इसके लिए कई आंदोलनकारियों ने शहादत दी है, लेकिन अब तक की सरकारों ने गैरसैंण को महज हाशिए पर रखा।
गैरसैंण के राज्य आंदोलनकारी महेशानंद जुयाल का कहना है कि वर्ष 2014 में यहां पहला सत्र टेंट में हुआ था। तब लोगों में अपार उत्साह था। इसमें यहां विधानसभा निर्माण की घोषणा हुई। विधानसभा भवन भूमि पूजन के बाद नवंबर 2015 में राजकीय पॉलीटेक्निक के भवन में दूसरा सत्र आयोजित हुआ, जबकि तीसरा सत्र नवंबर 2016 और चौथा सत्र 7 दिसंबर में भराड़ीसैंण के निर्माणाधीन विधानभवन में आयोजित किया गया, लेकिन स्थानीय लोगों की बहुप्रतीक्षित मांग गैरसैंण जिला और राजधानी दोनों नहीं मिले। हालांकि, शुक्रवार को आयोजित सत्र के दौरान बदरीनाथ के विधायक महेंद्र भट्ट ने गैरसैंण को जिला बनाने की पैरवी सदन के बाहर की, लेकिन सदन के भीतर गैरसैंण को लेकर सरकार और विपक्ष एकराय नहीं बना पाए।
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परवाड़ी के प्रधान जोध सिंह नेगी का कहना है कि ग्रामीणों ने विधानसभा भवन के लिए अपना गोचर, पनघट सभी दे दिए, लेकिन दो दिन के सत्र के सिवाय अभी तक लोगों को कुछ नहीं मिला। सिराणा के वीरेंद्र मेहरा का कहना है कि सत्र आयोजन कर पहाड़ का न तो विकास होगा और ना पलायन रुकेगा। चिह्न्ति राज्य आंदोलनकारी दिनेश जोशी ने कहा कि गैरसैंण राज्य आंदोलन की भावना रही है कि गैरसैंण प्रदेश की राजधानी हो, इसके लिए कई आंदोलनकारियों ने शहादत दी है, लेकिन अब तक की सरकारों ने गैरसैंण को महज हाशिए पर रखा।
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