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भीम आर्मी ने की शब्बीरपुर कांड की सीबीआई जांच की मांग
Updated Mon, 06 Nov 2017 10:31 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादराबाद।
भीम आर्मी भारत एकता मिशन के प्रदेश प्रभारी महक सिंह की अगुवाई में सोमवार को कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी दीपक रावत को ज्ञापन सौंपकर सहारनपुर जिले के शब्बीरपुर थाना बडगांव में दबंगों की ओर से दलित समाज के लोगों के घरों में आग लगाकर जानलेवा हमले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन ने प्रकरण में शब्बीरपुर के ग्राम प्रधान शिवकुमार तथा सोनू पर रासुका की कार्रवाई करने को अन्याय बताया है।
संगठन ने आरेाप लगाया कि दबंगों ने दलितों के साथ ज्यादती की और उल्टे उन्हें ही फंसाया जा रहा है। भीम आर्मी की ओर से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने ग्राम प्रधान शिवकुमार तथा सोनू पर रासुका हटाने के साथ ही उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की। संगठन के पदाधिकारियों ने आरेाप लगाया कि यूपी सरकार दलितों की आवाज को दबाना चाहती है। यही वजह है कि सरकार हमलावरों का खुलकर साथ दे रही है। जबकि अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा है कि चंद्रशेखर समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ राजनीति से प्रेरित होकर कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने चंदशेखर के साथियों को सभी आरोपों से बरी करते हुए साथियों को जमानत देने व तुरंत रिहा करने का आदेश दिया था, लेकिन प्रशासन ने सरकार के इशारे पर चंद्रशेखर पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाकर रिहाई को रोक दिया। ज्ञापन देने वालों में भीम आर्मी के प्रदेश प्रभारी महक सिंह, राजपाल सिंह, प्रमोद महाजन, बिन्नू चमार, मजीद, मदन, मिथुन, राजेंदर राजू, सचिव संदीप, डा. संजय समेत कई शामिल थे।
बहादराबाद।
भीम आर्मी भारत एकता मिशन के प्रदेश प्रभारी महक सिंह की अगुवाई में सोमवार को कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी दीपक रावत को ज्ञापन सौंपकर सहारनपुर जिले के शब्बीरपुर थाना बडगांव में दबंगों की ओर से दलित समाज के लोगों के घरों में आग लगाकर जानलेवा हमले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन ने प्रकरण में शब्बीरपुर के ग्राम प्रधान शिवकुमार तथा सोनू पर रासुका की कार्रवाई करने को अन्याय बताया है।
संगठन ने आरेाप लगाया कि दबंगों ने दलितों के साथ ज्यादती की और उल्टे उन्हें ही फंसाया जा रहा है। भीम आर्मी की ओर से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने ग्राम प्रधान शिवकुमार तथा सोनू पर रासुका हटाने के साथ ही उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की। संगठन के पदाधिकारियों ने आरेाप लगाया कि यूपी सरकार दलितों की आवाज को दबाना चाहती है। यही वजह है कि सरकार हमलावरों का खुलकर साथ दे रही है। जबकि अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा है कि चंद्रशेखर समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ राजनीति से प्रेरित होकर कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने चंदशेखर के साथियों को सभी आरोपों से बरी करते हुए साथियों को जमानत देने व तुरंत रिहा करने का आदेश दिया था, लेकिन प्रशासन ने सरकार के इशारे पर चंद्रशेखर पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाकर रिहाई को रोक दिया। ज्ञापन देने वालों में भीम आर्मी के प्रदेश प्रभारी महक सिंह, राजपाल सिंह, प्रमोद महाजन, बिन्नू चमार, मजीद, मदन, मिथुन, राजेंदर राजू, सचिव संदीप, डा. संजय समेत कई शामिल थे।
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