{"_id":"59e240034f1c1baf678b5c14","slug":"150799981118-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":".शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा: नलिनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
.शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा: नलिनी
Updated Sat, 14 Oct 2017 10:19 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
राजेश शर्मा
हरिद्वार।
विख्यात कत्थक नृत्यांगना नलिनी ने कहा कि शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा है। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत आध्यात्म की तरह है। उन्होंने कहा कि इस विधा से नए पीढ़ी को जोड़े रखने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास जारी है। संगीत को पहली कक्ष से ही पाठ्यक्रम में शामिल कराने के भी प्रयास किए जा रहे हैं।
यहां हरिद्वार नागरिक मंच की ओर से आयोजित गंगा महोत्सव में प्रस्तुति देने आई प्रख्यात नृत्यांगना नलिनी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि शास्त्रीय संगीत आध्यात्म की तरह है।
गंगा महोत्सव सरीखे आयोजन भारतीय संस्कृति के संकेत सूचक है। इस तरह के आयोजनों के माध्यम से भी प्रतिभाओं को काफी प्रोत्साहन मिलता है। कहा कि कलाकार की आत्म संतुष्टि शास्त्रीय संगीत से ही मिल सकती है। हमें जीवन की तरह संगीत में भी संतुलन बैठाना होगा। उन्होंने बताया कि उनके संगीत घराने की ओर से भारतीय संगीत को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत महोत्सवों को बढ़ावा दिया जाना भी शामिल है। इस कार्यक्रम में नलिनी को अपनी बहन कमलिनी के साथ शिरकत करनी थी, लेकिन कमलिनी इलाहाबाद में एक अन्य कार्यक्रम में भाग लेने के कारण वे हरिद्वार नहीं पहुंच पाई। नलिनी ने बताया कि उनकी संस्था देश में शास्त्रीय संगीत को पहली कक्षा से ही पाठ्यक्रम में शामिल कराने के लिए प्रयासरत है। केंद्र सरकार के साथ ही दिल्ली सरकार से भी बातचीत हुई है। दुनिया के कई देशों में अपनी प्रस्तुति दे चुकी नलिनी का मानना है कि कला के मामले में पूरी दुनिया भारत से बहुत पीछे है। हरिद्वार पहुंचने पर नलिनी उनके गुरु नृत्य शिरोमणी जितेंद्र महाराज तथा साथी कलाकारों का संस्कृतिकर्मियों आशीष झा तथा हेमा भंडारी के नेतृत्व में जोरदार स्वागत किया।
हरिद्वार।
विख्यात कत्थक नृत्यांगना नलिनी ने कहा कि शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा है। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत आध्यात्म की तरह है। उन्होंने कहा कि इस विधा से नए पीढ़ी को जोड़े रखने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास जारी है। संगीत को पहली कक्ष से ही पाठ्यक्रम में शामिल कराने के भी प्रयास किए जा रहे हैं।
यहां हरिद्वार नागरिक मंच की ओर से आयोजित गंगा महोत्सव में प्रस्तुति देने आई प्रख्यात नृत्यांगना नलिनी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि शास्त्रीय संगीत आध्यात्म की तरह है।
विज्ञापन
गंगा महोत्सव सरीखे आयोजन भारतीय संस्कृति के संकेत सूचक है। इस तरह के आयोजनों के माध्यम से भी प्रतिभाओं को काफी प्रोत्साहन मिलता है। कहा कि कलाकार की आत्म संतुष्टि शास्त्रीय संगीत से ही मिल सकती है। हमें जीवन की तरह संगीत में भी संतुलन बैठाना होगा। उन्होंने बताया कि उनके संगीत घराने की ओर से भारतीय संगीत को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत महोत्सवों को बढ़ावा दिया जाना भी शामिल है। इस कार्यक्रम में नलिनी को अपनी बहन कमलिनी के साथ शिरकत करनी थी, लेकिन कमलिनी इलाहाबाद में एक अन्य कार्यक्रम में भाग लेने के कारण वे हरिद्वार नहीं पहुंच पाई। नलिनी ने बताया कि उनकी संस्था देश में शास्त्रीय संगीत को पहली कक्षा से ही पाठ्यक्रम में शामिल कराने के लिए प्रयासरत है। केंद्र सरकार के साथ ही दिल्ली सरकार से भी बातचीत हुई है। दुनिया के कई देशों में अपनी प्रस्तुति दे चुकी नलिनी का मानना है कि कला के मामले में पूरी दुनिया भारत से बहुत पीछे है। हरिद्वार पहुंचने पर नलिनी उनके गुरु नृत्य शिरोमणी जितेंद्र महाराज तथा साथी कलाकारों का संस्कृतिकर्मियों आशीष झा तथा हेमा भंडारी के नेतृत्व में जोरदार स्वागत किया।
विज्ञापन