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हरिद्वार में कांवड़ यात्रा पर लगी पंचकों की टोक
Updated Wed, 12 Jul 2017 10:46 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
श्रावण मास की कांवड़ यात्रा के दौरान पांच दिनों के पंचक व्यवधान डालने के लिए आते हैं। बुधवार सबेरे 9.59 पर पंचक लग गए। पंचकों का समापन 16 जुलाई को रात 12 बजे होगा। पहले दिन कांवड़ यात्रा पर पंचकों का कोई असर नहीं दिखाई दिया। अलबत्ता अब कांवड़ियों की संख्या कम होने के आसार हैं। 16 जुलाई के बाद बहुत जोर- शोर से यात्रा चल पड़ेेगी।
शास्त्रीय विधा के अनुसार जब भी धनिष्ठा, शतभिषा, पूभा, उभा तथा रेवती नक्षत्र एक साथ पड़ते हैं, तब बांस से बने सामान की खरीद और स्पर्श वर्जित है। यद्यपि बदलते दौर में कांवड़ बनाने में बांस का प्रयोग काफी कम होने लगा है। फिर भी बांस की टोकरियों में गंगाजल रखकर ले जाने वालों की संख्या कम नहीं हैं। विशेषकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कांवड़िए पंचकों से बचकर जल भरने आते हैं। इन कांवड़ियों का आगमन 16 जुलाई से होगा और कांवड़ यात्रा का चरमकाल भी उसी दिन से शुरू होगा। बुधवार को पंचक के बावजूद देर शाम तक कांवड़ियों का आगमन होता रहा। माना जा रहा है कि जिन कांवड़ियों को अपने घरों से चलना था वे चार दिन रुककर आएंगे। 16 जुलाई को पहुंचने के बाद रात 12 बजे से कांवड़ भरकर लौटने लगेंगे। हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के कांवड़िए पंचक नहीं मानते। बुधवार को पंचक लगने से पहले सवेरे अंधेरे से कांवड़ियों की वापसी तेजी से होने लगी थी। लौटने वाले जो कांवड़िए पंचकों का परहेज करते हैं, उन्होंने पूरी रात कांवड़ भरी और पंचक लगने से पहले ही हरिद्वार छोड़ दिया। बुधवार को सब्जी मंडी से लेकर विष्णु घाट तक पानी भरे रहने के बावजूद कांवड़िए खरीदारी में व्यस्त रहे।
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पंतद्वीप के बाद अब रोडी मैदान के कांवड़ बाजार में भी जोरदार खरीदारी होने लगी है। पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए अधिकांश कांवड़ियों ने अपने डेरे रोडी के मैदान में लगाए हैं। तड़के बारिश होने पर कांवड़ियों को दुकानों में शरण लेनी पड़ी। इस क्षेत्र के रैन बसेरे और सीसीआर की बिल्डिंग भी कांवड़ियों के काम आई।
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कांवड़ यात्रा के हैं कई नियम
हरिद्वार। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार कांवड़ यात्रा के कई नियम है। मान्यता है कि गूलर का वृक्ष व्यक्ति के सारे पुण्य हर लेता है। इसलिए कांवड़ लेकर गुलर के वृक्ष के नीचे से नहीं निकलना चाहिए। कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले भैरव बाबा की पूजा करें तो रास्ते में थकान नहीं होती। जिस कलश में जल भरना हो उसमें पहले ही आम, पीपल या बड़ के पत्ते डाल दे। ऐसा करने से यात्रा सुगम हो जाती हैं। कांवड़ उठाने के बाद क्रोध करना मना है। केवल शिव नाम का उच्चारण करना चाहिए। यात्रा में निवारण यंत्र साथ रखा जाए तो सभी प्रकार की समस्याओं का निदान हो जाता हैं। पंचकों के दौरान पड़ने वाले नक्षत्र अशुभ माने जाते हैं। इन नक्षत्रों में यात्रा करना ज्योतिष की दृष्टि से वर्जित है।