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करोड़ां रुपये के सौर ऊर्जा घोटाले की उच्च स्तरीय जांच शुरू
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रुफटाप सौर ऊर्जा घोटाले की जांच शुरू
जांच समिति में एमएनआरई के अलावा राज्य सरकार के राजस्व विभाग के अधिकारी भी शामिल
क्रासर
अदालत के आदेश पर कराई जा रही जांच
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उरेडा में हुुए 18 करोड़ रुपये के सौर ऊर्जा घोटाले की उच्च स्तरीय जांच अदालत के आदेश पर शुरू हो गई है। इसके लिए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी गई है। समिति में वैकल्पिक नवीन एवं नवीनीकरण ऊर्जा (एमएनआरई) मंत्रालय, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर इनर्जी (नाइस), राज्य का राजस्व विभाग और उरेडा के अधिकारियों को शामिल किया गया है। टीम जल्द राज्य का दौरा करेगी।
बिजली का उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने वैकल्पिक नवीन एवं नवीनीकरण ऊर्जा (एमएनआरई) मंत्रालय की ओर से रुफटाप योजना शुरू की थी। इसके तहत लाभार्थियों को अपने आवासों व व्यावसायिक भवनों की छत पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली का उत्पादन करना था। इसके लिए केंद्र की ओर से 70 फीसदी सब्सिडी दी जा रही थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने कई लाभार्थियों से मिलीभगत कर करोड़ों रुपये का हजम कर डाले। कागजों में सोलर प्लांट लगाकर सब्सिडी की बंदरबाट कर ली गई। किसी ने इसकी शिकायत सीधी प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से की तो विभागीय अधिकारियों की अफरातफरी की स्थिति हो गई। पीएमओ के स्तर पर प्रकरण की जांच कराई गई। बाद में यह मामला अदालत पहुंच गया। अब अदालत ने एमएनआरई मंत्रालय को उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस संबंध में उरेडा के सीईओ एके त्यागी ने बताया कि जांच समिति को काफी दस्तावेज मुहैया करा दिए हैं। कागजों के भौतिक सत्यापन के लिए टीम जल्द प्रदेश का दौरे करेगी।
इनसेट
रिश्तेदाराें को बांट दी थी सब्सिडी
उरेडा के भ्रष्ट अफसरों ने रुफटाप योजना की आड़ में अपने सगेे-संबंधियों को फर्जी तरीके से लाभ पहुंचाकर 18 करोड़ का चूना लगाया था। सरकार ने लाभार्थियों से रिकवरी के आदेश जारी किए थे। ऊर्जा सचिव राधिका झा ने कई माह पूर्व प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए घोटालेबाज अधिकारियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश भी जारी किए थे, लेकिन आज तक इनके खिलाफ कार्रवाई तो दूर उनका चिन्हीकरण तक नहीं हो पाया है।
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जांच समिति में एमएनआरई के अलावा राज्य सरकार के राजस्व विभाग के अधिकारी भी शामिल
क्रासर
अदालत के आदेश पर कराई जा रही जांच
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उरेडा में हुुए 18 करोड़ रुपये के सौर ऊर्जा घोटाले की उच्च स्तरीय जांच अदालत के आदेश पर शुरू हो गई है। इसके लिए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी गई है। समिति में वैकल्पिक नवीन एवं नवीनीकरण ऊर्जा (एमएनआरई) मंत्रालय, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर इनर्जी (नाइस), राज्य का राजस्व विभाग और उरेडा के अधिकारियों को शामिल किया गया है। टीम जल्द राज्य का दौरा करेगी।
बिजली का उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने वैकल्पिक नवीन एवं नवीनीकरण ऊर्जा (एमएनआरई) मंत्रालय की ओर से रुफटाप योजना शुरू की थी। इसके तहत लाभार्थियों को अपने आवासों व व्यावसायिक भवनों की छत पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली का उत्पादन करना था। इसके लिए केंद्र की ओर से 70 फीसदी सब्सिडी दी जा रही थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने कई लाभार्थियों से मिलीभगत कर करोड़ों रुपये का हजम कर डाले। कागजों में सोलर प्लांट लगाकर सब्सिडी की बंदरबाट कर ली गई। किसी ने इसकी शिकायत सीधी प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से की तो विभागीय अधिकारियों की अफरातफरी की स्थिति हो गई। पीएमओ के स्तर पर प्रकरण की जांच कराई गई। बाद में यह मामला अदालत पहुंच गया। अब अदालत ने एमएनआरई मंत्रालय को उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस संबंध में उरेडा के सीईओ एके त्यागी ने बताया कि जांच समिति को काफी दस्तावेज मुहैया करा दिए हैं। कागजों के भौतिक सत्यापन के लिए टीम जल्द प्रदेश का दौरे करेगी।
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रिश्तेदाराें को बांट दी थी सब्सिडी
उरेडा के भ्रष्ट अफसरों ने रुफटाप योजना की आड़ में अपने सगेे-संबंधियों को फर्जी तरीके से लाभ पहुंचाकर 18 करोड़ का चूना लगाया था। सरकार ने लाभार्थियों से रिकवरी के आदेश जारी किए थे। ऊर्जा सचिव राधिका झा ने कई माह पूर्व प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए घोटालेबाज अधिकारियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश भी जारी किए थे, लेकिन आज तक इनके खिलाफ कार्रवाई तो दूर उनका चिन्हीकरण तक नहीं हो पाया है।
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