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पर्यावरण की सबसे बड़ी संरक्षक ग्रामीण महिलाएं: सरोजनी रुलक की ओर से से
Updated Sat, 31 Mar 2018 02:43 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
रूलक की ओर से शुक्रवार को पर्यावरण में निरंतरता बनाए रखने के लिए पर्वतीय महिलाओं की भूमिका एवं योगदान विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैंतुरा ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं पर्यावरण की सबसे बड़ी संरक्षक है।
शुक्रवार को रूलक सभागार में आयोजित सेमिनार में उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं का जीवन जल, जंगल और जमीन पर निर्भर रहा है। उन्होंने हमेशा पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन किया है और इसे आने वाली पीढ़ी को संस्कार के रुप में दिया है। विधायक राजपुर खजानदास ने कहा कि दून में पर्यावरण संरक्षण में मातृ शक्ति की अहम भूमिका है।
दून विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सुनीत नैथानी ने कहा कि महिलाओं ने प्रकृति के संसाधनों का सदुपयोग करते हुए इसे आने वाली पीढ़ी के लिए भी बचाया है।
कार्यक्रम में कुसुम घिल्डियाल, पत्रकार राज कंवर, राज्य संसाधन केन्द्र के निदेशक डॉ. प्रिया जाडू ने अपने विचार व्यक्त किए। सेमीनार के अंत में खुला सत्र हुआ जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव अन्य प्रतिभागियों के साथ सांझा किए। महिलाओं के सुझावों एवं प्रस्तावों को लिखित रुप से सूचीबद्ध कर सेमीनार का समापन किया गया। सेमिनार में पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्त्ता, वार्ड मेंबर एवं पार्षद महिलाओं ने प्रतिभाग किया।
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रूलक की ओर से शुक्रवार को पर्यावरण में निरंतरता बनाए रखने के लिए पर्वतीय महिलाओं की भूमिका एवं योगदान विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैंतुरा ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं पर्यावरण की सबसे बड़ी संरक्षक है।
शुक्रवार को रूलक सभागार में आयोजित सेमिनार में उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं का जीवन जल, जंगल और जमीन पर निर्भर रहा है। उन्होंने हमेशा पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन किया है और इसे आने वाली पीढ़ी को संस्कार के रुप में दिया है। विधायक राजपुर खजानदास ने कहा कि दून में पर्यावरण संरक्षण में मातृ शक्ति की अहम भूमिका है।
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दून विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सुनीत नैथानी ने कहा कि महिलाओं ने प्रकृति के संसाधनों का सदुपयोग करते हुए इसे आने वाली पीढ़ी के लिए भी बचाया है।
कार्यक्रम में कुसुम घिल्डियाल, पत्रकार राज कंवर, राज्य संसाधन केन्द्र के निदेशक डॉ. प्रिया जाडू ने अपने विचार व्यक्त किए। सेमीनार के अंत में खुला सत्र हुआ जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव अन्य प्रतिभागियों के साथ सांझा किए। महिलाओं के सुझावों एवं प्रस्तावों को लिखित रुप से सूचीबद्ध कर सेमीनार का समापन किया गया। सेमिनार में पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्त्ता, वार्ड मेंबर एवं पार्षद महिलाओं ने प्रतिभाग किया।
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