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‘विष्णुपुर’ में है 16 मंदिरों की संस्कृति का जिक्र
Updated Sun, 16 Dec 2018 01:51 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
जीएसटी विभाग में अधीक्षक तपस चक्रवर्ती की लिखी पुस्तक ‘मंदिरों का नगर विष्णुपुर’ में 16 मंदिरों की संस्कृति का जिक्र है। शनिवार को सुभाष रोड स्थित एक होटल में उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने पुस्तक का विमोचन किया।
पुस्तक विमोचन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि साहित्य से संस्कृति का सुंदर रूप देखने को मिलता है। साथ ही यह समाज का आईना है। उन्होंने कहा कि गढ़वाली और कुमाऊंनी बोली के उत्थान के लिए भी सरकार की ओर से काम किया जा रहा है। पुस्तक के लेखक तपस ने बताया कि पुस्तक में बंगाल के बांकुरा जिले के विष्णुपर में मल्ल वंश द्वारा स्थापित 16 मंदिरों का जिक्र है। टैराकोटा से बने इन मंदिरों में दो चाला और चार चाला की विशेष तरह का स्थापत्य देखने को मिलती है। उन्होंने बताया कि एक टूर के दौरान यहां के मंदिरों के संरक्षण और पर्यटन के विकास के उद्देश्य से उन्हें यह पुस्तक लिखने की प्रेरणा मिली। तपस इससे पहले दो पुस्तकें ‘तिनके’ और ‘रुक जाना नहीं’ लिख चुके हैं। ‘रुक जाना नहीं’ के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा राज्य भाषा गौरव सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ मिश्र, डॉॅ. जितने ठाकुर, डॉ. प्रमोद भारतीय, योगेश अग्रवाल, राजीव बलूनी, अमित चौहान आदि मौजूद रहे।
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जीएसटी विभाग में अधीक्षक तपस चक्रवर्ती की लिखी पुस्तक ‘मंदिरों का नगर विष्णुपुर’ में 16 मंदिरों की संस्कृति का जिक्र है। शनिवार को सुभाष रोड स्थित एक होटल में उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने पुस्तक का विमोचन किया।
पुस्तक विमोचन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि साहित्य से संस्कृति का सुंदर रूप देखने को मिलता है। साथ ही यह समाज का आईना है। उन्होंने कहा कि गढ़वाली और कुमाऊंनी बोली के उत्थान के लिए भी सरकार की ओर से काम किया जा रहा है। पुस्तक के लेखक तपस ने बताया कि पुस्तक में बंगाल के बांकुरा जिले के विष्णुपर में मल्ल वंश द्वारा स्थापित 16 मंदिरों का जिक्र है। टैराकोटा से बने इन मंदिरों में दो चाला और चार चाला की विशेष तरह का स्थापत्य देखने को मिलती है। उन्होंने बताया कि एक टूर के दौरान यहां के मंदिरों के संरक्षण और पर्यटन के विकास के उद्देश्य से उन्हें यह पुस्तक लिखने की प्रेरणा मिली। तपस इससे पहले दो पुस्तकें ‘तिनके’ और ‘रुक जाना नहीं’ लिख चुके हैं। ‘रुक जाना नहीं’ के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा राज्य भाषा गौरव सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ मिश्र, डॉॅ. जितने ठाकुर, डॉ. प्रमोद भारतीय, योगेश अग्रवाल, राजीव बलूनी, अमित चौहान आदि मौजूद रहे।
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