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सस्ती बिजली की उम्मीद पर फिरा पानी
Updated Sun, 07 Jan 2018 02:05 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाल/साहिया।
जिस जल विद्युत परियोजना के दम पर ग्रामीणों को सस्ती दरों पर बिजली उपलबध कराने का सपना देखा गया था, वह परियोजना 19 साल से जंक खा रही है। योजना कैसे और कब शुरू होगी यह सवाल पूछने पर संबंधित अधिकारियों को जवाब नहीं सूझ रहा है। अधिकारी हर बार बजट के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजने की बात कहकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल रहे हैं।
बात कर रहे हैं कालसी विकासखंड के अछेड़ खड्ड में लाखों की लागत से बनी मिनी जल विद्युत परियोजना की। 1995-96 में शुरू हुई परियोजना छह माह बाद ही ठप है। आसपास के गांवों को इस परियोजना का लाभ नहीं मिल रहा है। वर्ष 1995-96 में वैकल्पिक ऊर्जा विकास संस्थान ने 60 लाख की लागत से अछेड़ खड्ड (खोक्टा) में मिनी जल विद्युत परियोजना का निर्माण कराया था। परियोजना से 50 किलोवाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था। इससे दोहा, झुसऊ, मटियावा, दोऊ, शिबऊ, कैत्री, गांगरो, डागुरा, कोफ्टी, मरलोऊ, बडोडा और किशोऊ समेत 11 गांवों को बिजली मिलनी थी। परियोजना संचालन की जिम्मेदारी ग्राम समिति को सौंपी गई। बिजली उत्पादन शुरू होने पर छह माह तक परियोजना से जुड़े गांवों के लोगों को सस्ती दर पर बिजली मिलती रही, लेकिन 19 साल पहले दैवीय आपदा के कारण परियोजना को भारी नुकसान हुआ और बिजली उत्पादन बंद हो गया। तब से विभाग ने इसकी सुध नहीं ली है। संजीव चौहान, गोपाल सिंह, सरदार सिंह, शमशेर सिंह ने बताया कि उत्पादन ठप होने से ग्रामीणों को परियोजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों को मजबूरी में ग्रिड की बिजली इस्तेमाल करनी पड़ रही है। बता दें कि राज्य गठन के बाद यह योजना उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा अभिकरण (उरेडा) के अधीन है।
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योजना को शुरू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन खड्ड में पानी कम होने के कारण शुरू नहीं हो सकी। एक बार फिर योजना को नए सिरे से खड़ा करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
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युद्धवीर सिंह बिष्ट, परियोजना अधिकारी, उरेडा
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जिस जल विद्युत परियोजना के दम पर ग्रामीणों को सस्ती दरों पर बिजली उपलबध कराने का सपना देखा गया था, वह परियोजना 19 साल से जंक खा रही है। योजना कैसे और कब शुरू होगी यह सवाल पूछने पर संबंधित अधिकारियों को जवाब नहीं सूझ रहा है। अधिकारी हर बार बजट के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजने की बात कहकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल रहे हैं।
बात कर रहे हैं कालसी विकासखंड के अछेड़ खड्ड में लाखों की लागत से बनी मिनी जल विद्युत परियोजना की। 1995-96 में शुरू हुई परियोजना छह माह बाद ही ठप है। आसपास के गांवों को इस परियोजना का लाभ नहीं मिल रहा है। वर्ष 1995-96 में वैकल्पिक ऊर्जा विकास संस्थान ने 60 लाख की लागत से अछेड़ खड्ड (खोक्टा) में मिनी जल विद्युत परियोजना का निर्माण कराया था। परियोजना से 50 किलोवाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था। इससे दोहा, झुसऊ, मटियावा, दोऊ, शिबऊ, कैत्री, गांगरो, डागुरा, कोफ्टी, मरलोऊ, बडोडा और किशोऊ समेत 11 गांवों को बिजली मिलनी थी। परियोजना संचालन की जिम्मेदारी ग्राम समिति को सौंपी गई। बिजली उत्पादन शुरू होने पर छह माह तक परियोजना से जुड़े गांवों के लोगों को सस्ती दर पर बिजली मिलती रही, लेकिन 19 साल पहले दैवीय आपदा के कारण परियोजना को भारी नुकसान हुआ और बिजली उत्पादन बंद हो गया। तब से विभाग ने इसकी सुध नहीं ली है। संजीव चौहान, गोपाल सिंह, सरदार सिंह, शमशेर सिंह ने बताया कि उत्पादन ठप होने से ग्रामीणों को परियोजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों को मजबूरी में ग्रिड की बिजली इस्तेमाल करनी पड़ रही है। बता दें कि राज्य गठन के बाद यह योजना उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा अभिकरण (उरेडा) के अधीन है।
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योजना को शुरू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन खड्ड में पानी कम होने के कारण शुरू नहीं हो सकी। एक बार फिर योजना को नए सिरे से खड़ा करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
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युद्धवीर सिंह बिष्ट, परियोजना अधिकारी, उरेडा