आज भले ही टीम इंडिया का विश्व के हर कोने में दबदबा हो, लेकिन 90 के दशक के शुरुआती दौर में ऐसा नहीं था। विदेशी सरजमीं पर भारतीय शेर मेमना बन जाया करते। अब जब 27 दिसंबर से भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे की शुरुआत हो रही है, तो आइए अतीत के पन्नों को पलटते हैं और 1991-92 की यादें ताजा करते हैं, जब भारतीय टीम चार माह ऑस्ट्रेलिया में थी और त्रिकोणीय श्रृंखला के साथ, चार टेस्ट मैच की सीरीज और फिर विश्व कप खेलकर स्वदेश लौटी थी।
AUSvIND: 28 साल पहले पर्थ की खतरनाक पिच पर 19 वर्षीय सचिन ने दिखाया था दम
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शुरुआती चार में से तीन टेस्ट मैच भारतीय टीम हार चुकी थी। सिडनी में खेला गया तीसरा टेस्ट ड्रॉ रहा था। जहां भारत के वर्तमान हेड कोच रवि शास्त्री ने दोहरा शतक जड़ा था। सचिन तेंदुलकर ने भी दम दिखाते हुए 148 रन बनाए थे। पांचवां और अंतिम टेस्ट मैच पर्थ में खेला जाना था। उन दिनों वाका की पिच आज की तरह नहीं होती थी, गेंदबाजों को मिलने वाला अतिरिक्त उछाल विकेट को बल्लेबाजों का कब्रगाह बनाता था, लेकिन अगर एक बार कोई खिलाड़ी क्रीज पर जम जाए तो फिर रन बनाना भी आसान हो जाता था।
पर्थ टेस्ट में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया के लिए डेविड बून ने शानदार शतक जड़ा। पूरी श्रृंखला भर भारतीय बल्लेबाजी जिस तरह से फेल हो रही थी, उसे देखते हुए मेजबान के 346 रन दबाव बनाने के लिए काफी थे। जिसका डर था वही हुआ। वाका में कप्तान अजहरुद्दीन, श्रीकांत, मांजरेकर, वेंगसरकर, कपिल देव सरीखे सभी दिग्गज फेल हुए। क्रीज पर कोई भी बल्लेबाज अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब नहीं हो पाया, सिवाए एक के।
क्रेग मैकडरमोट, मर्व ह्यूज्स और माइक व्हिटनी जैसे लंबे और खतरनाक पेसर्स के सामने अड़ जाने वाले इस बल्लेबाज का नाम सचिन तेंदुलकर था। महज 19 साल के सचिन को कट, पुल और स्टेट ड्राइव खेलता देख कोई भी शख्स खुद को ताली बजाने से रोक नहीं पाता। यह तेंदुलकर की विलक्षण प्रतिभा ही तो थी कि उन्होंने विपरित हालातों में 16 चौके की मदद से 114 रन बना दिए। सचिन के बाद किसी भी भारतीय बल्लेबाज का सर्वाधिक स्कोर 43 रन था, जो दसवें क्रम पर आए विकेटकीपर किरण मोरे ने बनाया था। दोनों के बीच 81 रन की साझेदारी भी हुई, जिसके सहारे भारतीय टीम सम्मानजनक स्कोर बना पाई।
सचिन के शतक के बावजूद भारत सिर्फ 272 रन ही बना पाया। इस तरह पहली पारी के आधार पर अब ऑस्ट्रेलिया के पास 74 रन की अहम बढ़त थी। दूसरी पारी में डीन जोंस (150) और टॉम मूडी (101) ने सैकड़ा जड़कर पारी 367/6 पर घोषित की। टीम इंडिया के सामने 442 रन का असंभव लक्ष्य था। भारत 141 रन पर ऑलआउट हो गया। भले ही मैच में 300 रन की करारी शिकस्त मिली। सीरीज भी 0-4 से गंवानी पड़ी, लेकिन भारतीय क्रिकेट को सचिन तेंदुलकर के रूप में ऐसा बल्लेबाज मिल चुका था, जो दुश्मन के घर में घुसकर आंखों में आंखें डालने की काबिलियत रखता हो।