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योगी सरकार ने पूछा-बाबा साहेब का सही नाम लिए जाने पर आपत्ति क्यों?, राज्यपाल ने दी सफाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 30 Mar 2018 02:30 AM IST
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संविधान में बाबा साहेब द्वारा बनाया गया हस्ताक्षर (राज्यापाल द्वारा सरकार को भेजी गई प्रतिलिपि)
- फोटो : amar ujala
भारत के संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आम्बेडकर के नाम के बीच में 'रामजी' लिखा जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने ये फैसला लिया है कि सभी राजकीय अभिलेखों में अब डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर का ही इस्तेमाल होगा।
पढ़ें-CBSE पेपर लीक: सरकार व व्यवस्था गलत हाथों में चले जाने का परिणाम: अखिलेश यादव
इस फैसले पर यूपी के राज्यपाल रामनाईक ने कहा है कि मैं एक मराठी हूं और बाबा साहेब भी मराठी थे। मराठी में पहले परंपरा थी कि बच्चे के नाम के बीच में पिता का नाम जोड़ा जाता था, इसीलिए आम्बेडकर जी का पूरा नाम डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर है। राज्यपाल ने कहा कि संविधान में भी बाबा साहेब ने अपने हस्ताक्षर में पूरा नाम लिखा है, 'डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर' लिखा है।
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राज्यपाल का कहना है कि हिंदी भाषा वाले राज्य उनके नाम को गलत तरीके से लिख रहे हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि उनके नाम को दो भागों में बांट दिया गया है भीम और राव जबकि भीमराव एक ही शब्द है।
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इस फैसले पर यूपी के राज्यपाल रामनाईक ने कहा है कि मैं एक मराठी हूं और बाबा साहेब भी मराठी थे। मराठी में पहले परंपरा थी कि बच्चे के नाम के बीच में पिता का नाम जोड़ा जाता था, इसीलिए आम्बेडकर जी का पूरा नाम डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर है। राज्यपाल ने कहा कि संविधान में भी बाबा साहेब ने अपने हस्ताक्षर में पूरा नाम लिखा है, 'डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर' लिखा है।
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राज्यपाल का कहना है कि हिंदी भाषा वाले राज्य उनके नाम को गलत तरीके से लिख रहे हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि उनके नाम को दो भागों में बांट दिया गया है भीम और राव जबकि भीमराव एक ही शब्द है।
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राज्यपाल ने भेजी थी छाया प्रति
राज्यपाल राम नाईक
- फोटो : amar ujala
मालूम हो कि राज्यपाल राम नाईक ने सरकार को संविधान की आठवीं अनुसूची की मूल प्रति के संलग्नक की छाया प्रति भेजी थी जिसमें बाबा साहब ने अपने हस्ताक्षर करते हुए डॉ. भीम रामजी आम्बेडकर लिखा है। राज्यपाल ने सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा था कि बाबा साहब का नाम गलत लिखा जा रहा है। इसे सही किया जाए।
इसके बाद शासनादेश जारी करके सरकारी अभिलेखों में उनका नाम डॉ. भीम रामजी आम्बेडकर लिखने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि आगरा स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के नाम में अंबेडकर की जगह आंबेडकर लिखने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
इसके बाद शासनादेश जारी करके सरकारी अभिलेखों में उनका नाम डॉ. भीम रामजी आम्बेडकर लिखने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि आगरा स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के नाम में अंबेडकर की जगह आंबेडकर लिखने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
सिद्धार्थनाथ सिंह बोले, अखिलेश यादव ने नहीं माना था राज्यपाल का सुझाव
सिद्धार्थनाथ सिंह
- फोटो : amar ujala
उधर, यूपी सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा है कि बाबा साहेब का सही नाम लिए जाने पर इतनी आपत्ति क्यों? भारतीय संविधान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के नाम में 'रामजी' का भी उल्लेख है।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर राज्यपाल राम नाईक का सुझाव न मानने का अरोप लगाते हुए सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि राज्यपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री को भी यह सुझाव दिया था लेकिन उन्होंने उस पर अमल करना जरूरी नहीं समझा।
हमारी सरकार ने न सिर्फ उनके सुझाव पर विचार किया, बल्कि शासनादेश जारी कर उसका क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया है। इसी क्रम में एक अप्रैल से सभी सरकारी दफ्तरों में उनके सही नाम के साथ फोटो लगाने का कार्य प्रारंभ हो जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर राज्यपाल राम नाईक का सुझाव न मानने का अरोप लगाते हुए सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि राज्यपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री को भी यह सुझाव दिया था लेकिन उन्होंने उस पर अमल करना जरूरी नहीं समझा।
हमारी सरकार ने न सिर्फ उनके सुझाव पर विचार किया, बल्कि शासनादेश जारी कर उसका क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया है। इसी क्रम में एक अप्रैल से सभी सरकारी दफ्तरों में उनके सही नाम के साथ फोटो लगाने का कार्य प्रारंभ हो जाएगा।