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अपने मनचाहे स्टेशन पर ट्रेन रुकवा देते हैं यहां के स्टूडेंट, ऐसा है भौकाल
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 16 Jul 2017 10:24 AM IST
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कुछ अरसे की खामोशी के बाद उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के अतर्रा में छात्रों ने फिर से वही रवैया अपनाना शुरू कर दिया है। जब आप यहां के छात्रों की इस मनमानी के बारे में जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे...
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यहां यूपी के बांदा जिले में मनचाहे स्थान पर ट्रेन न रोकने से छात्रों का गुस्सा अक्सर फूटता रहा है। कुछ अरसे की खामोशी के बाद छात्रों ने फिर से अपनी वहीं हरकत शुरू कर दी है।
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चेन खींचकर ट्रेन रोककर पत्थरबाजी करना छात्रों का भौकाल बन गया है। छात्रों की भीड़ के हाथों में पत्थर देखकर हर कोई घबरा जाता है। बीच में कई दिन तक ये सिलसिला ठंडा रहा था लेकिन एकबार फिर से वहीं सब शुरू हो गया है। इन्हें रोक पाना पुलिस के लिए भी बड़ी जद्दोजहद का काम है।
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ताजा मामले में छात्रों ने पथराव कर ट्रेन के कई शीशे तोड़ दिए गए। दो यात्रियों को मामूली चोटें आई हैं। शनिवार को दोपहर इलाहाबाद-झांसी पैसेंजर ट्रेन लगभग चार घंटा की देरी से दोपहर 1:30 बजे आई। स्टेशन में महाविद्यालय के तमाम छात्र ट्रेन में सवार हो गए। महाविद्यालय के नजदीक लोहिया पुल पर चालक द्वारा ट्रेन न रोके जाने पर छात्रों ने चेन पुलिंग कर पैसेंजर ट्रेन रोक दी। छात्रों का एक जत्था इंजन पर चढ़ गया।
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चालक देवेंद्र सिंह और सहायक चालक अशोक वर्मा के साथ अभद्रता की। इंजन से उतरने के बाद छात्रों ने बोगियों पर पथराव शुरू कर दिया। ट्रेन में बैठे किसान सुधीर कुमार व व्यापारी रोहित पत्थर लगने से घायल हो गए। लगभग 20 मिनट बाद ट्रेन आगे रवाना हुई।
उधर, स्टेशन प्रबंधक का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। बांदा जीआरपी थानाध्यक्ष इंद्र मोहन बडोला ने बताया कि सूचना मिलने पर सिपाहियों को भेजा गया था। तब तक ट्रेन चल चुकी थी और कोई छात्र मौके पर मौजूद नही था। थानाध्यक्ष ने कहा कि किसी ने कोई तहरीर नहीं दी है।
उधर, स्टेशन प्रबंधक का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। बांदा जीआरपी थानाध्यक्ष इंद्र मोहन बडोला ने बताया कि सूचना मिलने पर सिपाहियों को भेजा गया था। तब तक ट्रेन चल चुकी थी और कोई छात्र मौके पर मौजूद नही था। थानाध्यक्ष ने कहा कि किसी ने कोई तहरीर नहीं दी है।