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डॉ. ने बताया रिस्क, एंबुलेंस कर्मियों ने करा दिया प्रसव

Mon, 16 May 2016 05:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, दाड़लाघाट/अर्की (सोलन)
ब्यूरो/अमर उजाला, दाड़लाघाट/अर्की (सोलन) Updated Mon, 16 May 2016 05:04 PM IST
सार

  • अर्की अस्पताल से शिमला के लिए रेफर महिला ने रास्ते में दिया बच्चे को जन्म
  • अर्की अस्पताल से 17 किलोमीटर आगे शिमला-मंडी एनएच पर कराया प्रसव
  • सोलन-बिलासपुर सीमा से सटे मलोखर का जच्चा-बच्चा अब केएनएच में दाखिल

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Pregnant woman delivers in 108 ambulance
एंबुलेंस में गर्भवती की सफल‌ डिलीवरी के बाद गोद में बच्चे को उठाए फार्मासिसट और चालक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डॉक्टर ने मुश्किल और जच्चा-बच्चा के लिए खतरा बताकर जिस प्रसव से हाथ खड़े कर दिए, उसे 108 एंबुलेंस के फार्मासिस्ट और ड्राइवर ने सफलता पूर्वक करा दिया। मामला हिमाचल के सोलन जिले का है। अर्की अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर महज औपचारिकता निभाई जा रही है।

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सोलन-बिलासपुर सीमा से सटे मलोखर निवासी लालचंद ने बताया कि वह अपनी पत्नी पार्वती देवी (26) को प्रसव पीड़ा के कारण अर्की अस्पताल ले आया। अस्पताल में रात तीन बजे प्रसूता की हालत क्रिटिकल कहते हुए गंभीर अवस्था में उसे शिमला रेफर कर दिया।
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पत्नी प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। 108 एंबुलेंस सेवा से वे शिमला के लिए निकल पड़े। अर्की अस्पताल के मुताबिक उनकी पत्नी की हालत गंभीर थी। लेकिन अर्की अस्पताल से लगभग 17 किलोमीटर आगे शिमला-मंडी एनएच पर सोलह मील नामक जगह पर उनकी पत्नी की हालत बिगड़ने लगी।

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फार्मासिस्ट और ड्राइवर ने कराया प्रसव

Pregnant woman delivers in 108 ambulance
बीएमओ का कहना है कि महिला का पल्स रेट काफी लो था। इसलिए रिस्क नहीं लिया। - फोटो : डेमो पिक

हालत देखते हुए 108 वाहन में कार्यरत ईएमटी फार्मासिस्ट संजय कुमार और ड्राइवर संजीव कुमार ने प्राथमिक चिकित्सा देते हुए प्रसव करवाने की कोशिश की और सफल प्रसव करवा दिया। लालचंद के अनुसार जच्चा-बच्चा दोनों ठीक हैं और कमल नेहरू अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।

तो अस्पताल में क्यों नहीं कराई डिलिवरी
लालचंद का कहना है कि जब 108 के कर्मचारियों ने आराम से प्रसव करवा दिया तो क्या अस्पताल में यह प्रसव नहीं हो सकता था। क्षेत्र में जहां 108 के ईएनटी फार्मासिस्ट और ड्राइवर की सूझबूझ व अपने काम के प्रति निष्ठा की प्रशंसा हो रही है, वहीं क्षेत्र में अस्पताल की कार्यशैली पर रोष जताया जा रहा है।

लो था पल्स रेट, इसलिए नहीं लिया रिस्क
बीएमओ अर्की एसएल वर्मा ने बताया कि मलोखर से यह केस आया था। ड्यूटी पर डॉक्टर ने गर्भवती महिला की जांच की। महिला की पल्स रेट काफी लो थी। गायनी का पद भी खाली है। ऐसे में डॉक्टर किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते थे। इसीलिए महिला को शिमला रेफर किया गया।  कहा कि अर्की अस्पताल में स्वीकृत छह पदों में से महज दो डॉक्टरों के पद भरे हैं। इससे भारी परेशानी हो रही है।

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