राज्यपाल वोहरा ने जेटली से मांगा बकाया फंड
- वोहरा ने जेटली को पत्र लिखकर किया आग्रह
- रियासत के लिए बकाया फंड जल्द जारी करें
- निगम और पंचायत चुनाव पर एसएसी ने की समीक्षा
- एसएसी ने दी सिविल अकाउंटिंग सिस्टम को मंजूरी
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राज्यपाल एनएन वोहरा ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से आग्रह किया है कि रियासत के बकाया फंड को तत्काल जारी करवाया जाए। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार राज्यपाल ने पत्र लिखकर कहा कि प्रदेश को उक्त राशि की तत्काल जरूरत है।
राज्यपाल ने बाढ़ पीड़ित व्यापारियों के लिए ब्याज में छूट के 800 करोड़ रुपये जल्द जारी करवाने के लिए हस्तक्षेप करने को कहा। केंद्रीय कर (2015-16) में रियासत की सर्व शिक्षा अभियान की 649 करोड़ रुपये की अंतिम किश्त और मनरेगा की 305 करोड़ की अंतिम किश्त भी बकाया है।
राज्यपाल ने बाढ़ में क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1194 करोड़ रुपये जारी करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री का शुक्रिया भी अदा किया। उन्होंने जेटली को बताया कि इस मद के लगभग एक हजार करोड़ रुपये पीड़ितों को वितरित किए जा चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि सरकार वर्तमान वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले बकाया राशि चाहती है, ताकि इसका सदुपयोग हो सके। राज्यपाल वोहरा की अध्यक्षता में राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) ने रियासत में निगम और पंचायत चुनाव करवाने के लिए इससे संबंधित मुद्दों की समीक्षा की।
परिषद ने पाया कि शहरी स्थानीय निकाय और पंचायतों की कानूनी बाधाओं को हल कर लिया गया है। चुनाव के संबंध में अंतिम फैसले के लिए दोनों चुनावों के कार्यक्रमों को नई सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
एसएसी ने दी सिविल अकाउंटिंग सिस्टम को मंजूरी
निर्माण से जुड़े विभागों में अब राशि का भुगतान सिविल अकाउंटिंग सिस्टम से किया जाएगा। एसएसी ने नई व्यवस्था को मंजूरी देते हुए पहले चरण में केवल राजस्व व्यय यानी वेतन से जुड़े खर्चों पर इसे लागू करने का फैसला किया है।
अगले चरण में पूंजी कार्य यानी निर्माण से जुड़े मामलों की राशि का भुगतान भी नई व्यवस्था के अधीन लाया जाएगा। वित्त सचिव ने बताया कि वर्तमान में राशि का भुगतान चेक ड्राइंग सिस्टम से किया जाता है। कोष विभाग के माध्यम से जारी होने वाली राशि का लेखा-जोखा रखने में कई खामियां रह जाती हैं।
इससे साफ होता है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत न तो सरकार की वित्तीय स्थिति और ना ही अकाउंट की पूरी पारदर्शिता का लक्ष्य पूरा हो पा रहा है। अकाउंटेंट जनरल ने आडिट के दौरान पीडब्ल्यूडी, पीडीडी और वन विभाग से जुड़ी देनदारियों के आंकड़ों पर सवाल खड़े किए हैं।
इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए चेक सिस्टम को पूरी तरह से खत्म करना जरूरी है। इसके लिए सिविल अकाउंटिंग सिस्टम को पहली अप्रैल से पीडब्ल्यूडी, पीएचई, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, पीडीडी सहित निर्माण क्षेत्र से जुड़े अन्य विभागों में लागू किया जाएगा। एसएसी की बैठक में राज्यपाल के सलाहकार खुर्शीद अहमद गनेई, परवेज दिवान, मुख्य सचिव बीआर शर्मा, वित्त आयुक्त बीबी व्यास, वित्त सचिव नवीन कुमार चौधरी प्रमुख रूप से उपस्थित थे।