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शहीद पुष्पेंद्र सिंह के घर आंसुओं का सैलाब, दोबारा न मिला 7 माह के बेटे को पिता का दुलार

Tue, 14 Aug 2018 07:27 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा Updated Tue, 14 Aug 2018 07:27 PM IST
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Martyrs Army Jawan Pushpendra Singh funeral in Khutiya Village Mathura
शहीद पुष्पेंद्र सिंह का सात माह का बेटा - फोटो : अमर उजाला
मथुरा निवासी सेना के जवान पुष्पेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार शाम को दिल्ली से उनके गांव लाया गया। पार्थिव शरीर आते ही गांव में, जब तक सूरज चांद रहेगा, पुष्पेंद्र का नाम रहेगा, भारत माता की जय के नारे गूंजने लगे।  
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गांव खुटिया निवासी पुष्पेंद्र सिंह श्रीनगर के संगधार में एलओसी पर तैनात थे। सोमवार को पाकिस्तानी की ओर से एक बार फिर गोलीबारी हुई। इसमें सीमा पर तैनात जाट रेजीमेंट के जवान पुष्पेंद्र सिंह शहीद हो गए।
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पुष्पेंद्र सिंह के शहीद होने की खबर से गांव में मातम छा गया। 27 साल के पुष्पेंद्र सिंह का विवाह 17 फरवरी 2016 को ही आगरा के गांव जोनई निवासी सुधा के साथ हुआ था। सात माह पहले ही सुधा ने पुत्र को जन्म दिया है।
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ठीक नहीं है परिवार की माली हालत

Martyrs Army Jawan Pushpendra Singh funeral in Khutiya Village Mathura
रोते बिलखते शहीद के परिजन - फोटो : अमर उजाला

पुष्पेंद्र के घर में मातम पसरा हुआ है। पत्नी सुधा रो रोकर बेसुध हो रही है। बेटे के गम में बूढ़ी मां को होशोहवास नहीं है। पिता भी अपनी पथराई आंखों अपने लाल पार्थिव शरीर कर रहा है। 

इस बीच सबसे ज्यादा चुभ रहा है, उस मासूम बेटे की खामोशी, जो सात माह पहले ही दुनिया में आया। अपने मासूम बेटे को पुष्पेंद्र ढंग से दुलार भी नहीं कर पाए। इससे पहले वो शहीद हो गए। 

 

शहीद के परिवार की माली हालत ठीक नहीं है। उनके पिता राज मिस्त्री का काम करते हैं। बड़े भाई बनवारी लाल रिक्शा चला कर किसी प्रकार परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करते हैं। 

पुष्पेंद्र के फौज में जाने के बाद परिवार वालों को हालात सुधरने की उम्मीद जगी थी, लेकिन नियत को कुछ और ही मंजूर था। बेटे की शहादत पर पिता को गर्व है तो गम भी है। पत्नी रो रोकर बेसुध हो रही है। 

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