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मध्यप्रदेश की सियासत में धर्म: इन बाबाओं का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं बड़े नेता
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Updated Wed, 10 Oct 2018 04:06 PM IST
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मध्य प्रदेश में दखल रखने वाले साधु-संत
- फोटो : Amar Ujala
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राज्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले कंप्यूटर बाबा ने सरकार पर धर्म की उपेक्षा के आरोप लगाए। जिसके बाद राज्य में दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियों कांग्रेस और भाजपा के नेताओं में साधु-संतों का समर्थन हासिल करने की होड़ लग गई है।
कंप्यूटर बाबा ने कहा, "शिवराज सिंह चौहान धर्म के ठीक विपरीत हैं और धर्म का कुछ काम करना ही नहीं चाहते हैं। उनकी धर्म के प्रति उदासीनता को देखते हुए मैंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।"
मध्य प्रदेश में इस बयान को भाजपा हल्के में नहीं ले सकती। प्रदेश में बाबाओं और संत समाज का अहम स्थान है। यहां संतों का जनता पर बहुत प्रभाव है। जिसकी वजह से कोई भी राजनीतिक पार्टी इनकी उपेक्षा करने का जोखिम नहीं उठा सकती। शिवराज सिंह चौहान और भाजपा को कंप्यूटर बाबा के आरोपों पर जनता को जवाब देना पड़ेगा।
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एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ 4 बड़े साधु-संतों ने मोर्चा खोला
राज्य में नेता बाबाओं का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं और चुनाव से पहले उनका समर्थन हासिल करना चाहते हैं। हाल ही में शिवराज ने मालवा-निमाड़ में मजबूत पकड़ रखने वाले कथावाचक कमलकिशोर नागर से मिले थे। 14 अक्टूबर को भाजपाध्यक्ष अमित शाह खजुराहो में आचार्य विद्यासागर जी के दर्शन करने जा रहे हैं।
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर अलग पार्टी बनाकर प्रदेश में भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। इनके अलावा दद्दा जी और पंडोखर सरकार के यहां मंत्री-नेताओं का आना-जाना लगा है। इन सभी संतों ने किसी राजनीतिक दल के पक्ष में खुलकर कभी कोई बयान नहीं दिया और अपना मत हमेशा रखते रहे हैं। एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ चार बड़े साधु-संतों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
आइए जानते हैं इस मध्य प्रदेश की सियासत में दखल रखने वाले इन साधु-संतों के बारे में :
कंप्यूटर बाबा
कंप्यूटर बाबा ने राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है जिसके बाद वे फिर चर्चा में हैं।
वे दिगंबर अखाड़ा और रामानंद संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं। भाजपा के कई नेता उनके करीबी माने जाते हैं।
चुनाव से ठीक पहले सरकार में मंत्री पद छोड़ने के बाद उन्होंने कहा, "अब किसी सरकार पर कोई भरोसा नहीं रहा। संतों की लड़ाई खुद संत समाज लड़ेगा।"
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कंप्यूटर बाबा ने कहा, "शिवराज सिंह चौहान धर्म के ठीक विपरीत हैं और धर्म का कुछ काम करना ही नहीं चाहते हैं। उनकी धर्म के प्रति उदासीनता को देखते हुए मैंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।"
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मध्य प्रदेश में इस बयान को भाजपा हल्के में नहीं ले सकती। प्रदेश में बाबाओं और संत समाज का अहम स्थान है। यहां संतों का जनता पर बहुत प्रभाव है। जिसकी वजह से कोई भी राजनीतिक पार्टी इनकी उपेक्षा करने का जोखिम नहीं उठा सकती। शिवराज सिंह चौहान और भाजपा को कंप्यूटर बाबा के आरोपों पर जनता को जवाब देना पड़ेगा।
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एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ 4 बड़े साधु-संतों ने मोर्चा खोला
राज्य में नेता बाबाओं का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं और चुनाव से पहले उनका समर्थन हासिल करना चाहते हैं। हाल ही में शिवराज ने मालवा-निमाड़ में मजबूत पकड़ रखने वाले कथावाचक कमलकिशोर नागर से मिले थे। 14 अक्टूबर को भाजपाध्यक्ष अमित शाह खजुराहो में आचार्य विद्यासागर जी के दर्शन करने जा रहे हैं।
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर अलग पार्टी बनाकर प्रदेश में भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। इनके अलावा दद्दा जी और पंडोखर सरकार के यहां मंत्री-नेताओं का आना-जाना लगा है। इन सभी संतों ने किसी राजनीतिक दल के पक्ष में खुलकर कभी कोई बयान नहीं दिया और अपना मत हमेशा रखते रहे हैं। एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ चार बड़े साधु-संतों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
आइए जानते हैं इस मध्य प्रदेश की सियासत में दखल रखने वाले इन साधु-संतों के बारे में :
कंप्यूटर बाबा
कंप्यूटर बाबा ने राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है जिसके बाद वे फिर चर्चा में हैं।
वे दिगंबर अखाड़ा और रामानंद संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं। भाजपा के कई नेता उनके करीबी माने जाते हैं।
चुनाव से ठीक पहले सरकार में मंत्री पद छोड़ने के बाद उन्होंने कहा, "अब किसी सरकार पर कोई भरोसा नहीं रहा। संतों की लड़ाई खुद संत समाज लड़ेगा।"
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती
पंडोखर सरकार
पंडोखर सरकार का मूल नाम गुरुशरण शर्मा है। वे दतिया जिले के पंडोखर गांव के हैं। हनुमानजी का ईष्ट है इन्हें। इनके दो लाख से ज्यादा अनुयायी हैं।
मंत्री उमाशंकर गुप्ता, विश्वास सारंग, महापौर आलोक शर्मा समेत ग्वालियर-दतिया के कई मंत्री इनके भक्त हैं। पंडोखर सरकार दतिया की तीन सीट पर असर है।
ऋषभचंद्रसूरीश्वर
ऋषभचंद्रसूरीश्वर जैन समाज के मोहनखेड़ा तीर्थ के प्रमुख और मशहूर ज्योतिषशास्त्री हैं। जैन बाहुल्य क्षेत्र में इनकी अपील काफी असर रहती है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ इनसे दो बार मिल चुके हैं। राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अक्सर इनसे मिलने जाते हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी साल 2013 में इनका आशीर्वाद लेने पहुंचे थे।
भाजपा ने पिछले साल इन्हें पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति में जगह दी थी। ऋषभचंद्रसूरीश्वर देशहित के मुद्दों पर मुखर वक्ता हैं।
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ज्योतिर्मठ-द्वारकापीठ दोनों ही पीठ पर आसीन हैं।
उनके भक्तों की संख्या बहुत ज्यादा है। महाकौशल की 38 सीटों पर वे खासा असर रखते थे।
स्वरूपानंद सरस्वती संघ और भाजपा के विरोधी माने जाते हैं।
जब दिग्विजय मुख्यमंत्री थे तब स्वरूपानंद सरस्वती जी काफी ताकतवर माने जाते थे।
देव प्रभाकर (दद्दाजी)
देव प्रभाकर जी सागर के गृहस्थ संत हैं। प्रदेश के तीन मंत्री इनके शिष्य हैं।
मंत्री भूपेंद्रसिंह, नरोत्तम मिश्रा, संजय पाठक, अभिनेता आशुतोष राणा, राजपाल यादव शिष्य।
सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी में 5 लाख से ज्यादा अनुयायी हैं। सोशल मीडिया फेसबुक-ट्विटर में सक्रिया नहीं हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अच्छी-खासी पकड़ रखते हैं।
पंडोखर सरकार का मूल नाम गुरुशरण शर्मा है। वे दतिया जिले के पंडोखर गांव के हैं। हनुमानजी का ईष्ट है इन्हें। इनके दो लाख से ज्यादा अनुयायी हैं।
मंत्री उमाशंकर गुप्ता, विश्वास सारंग, महापौर आलोक शर्मा समेत ग्वालियर-दतिया के कई मंत्री इनके भक्त हैं। पंडोखर सरकार दतिया की तीन सीट पर असर है।
ऋषभचंद्रसूरीश्वर
ऋषभचंद्रसूरीश्वर जैन समाज के मोहनखेड़ा तीर्थ के प्रमुख और मशहूर ज्योतिषशास्त्री हैं। जैन बाहुल्य क्षेत्र में इनकी अपील काफी असर रहती है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ इनसे दो बार मिल चुके हैं। राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अक्सर इनसे मिलने जाते हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी साल 2013 में इनका आशीर्वाद लेने पहुंचे थे।
भाजपा ने पिछले साल इन्हें पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति में जगह दी थी। ऋषभचंद्रसूरीश्वर देशहित के मुद्दों पर मुखर वक्ता हैं।
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ज्योतिर्मठ-द्वारकापीठ दोनों ही पीठ पर आसीन हैं।
उनके भक्तों की संख्या बहुत ज्यादा है। महाकौशल की 38 सीटों पर वे खासा असर रखते थे।
स्वरूपानंद सरस्वती संघ और भाजपा के विरोधी माने जाते हैं।
जब दिग्विजय मुख्यमंत्री थे तब स्वरूपानंद सरस्वती जी काफी ताकतवर माने जाते थे।
देव प्रभाकर (दद्दाजी)
देव प्रभाकर जी सागर के गृहस्थ संत हैं। प्रदेश के तीन मंत्री इनके शिष्य हैं।
मंत्री भूपेंद्रसिंह, नरोत्तम मिश्रा, संजय पाठक, अभिनेता आशुतोष राणा, राजपाल यादव शिष्य।
सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी में 5 लाख से ज्यादा अनुयायी हैं। सोशल मीडिया फेसबुक-ट्विटर में सक्रिया नहीं हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अच्छी-खासी पकड़ रखते हैं।
देवकीनंदन ठाकुर
स्वामी शांति स्वरूपानंद गिरि
स्वामी शांति स्वरूपानंद गिरि निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर हैं।
विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य और आरएसएस के संपर्क में हैं।
उज्जैन के उत्तर व दक्षिण विधानसभा क्षेत्रों में साल में एक बार भागवत कथा करते हैं। डेढ़ लाख से ज्यादा अनुयायी हैं। गिरी जी सियासी दखल कम रखते हैं।
भैयाजी सरकार
भैयाजी सरकार धूनी वाले बाबाओं की परंपरा से हैं।
नर्मदा पट्टी के किनारे बसे इलाके की करीब 20 विधानसभा क्षेत्रों में इनका जबरदस्त प्रभाव है। समाज के हर वर्ग में इनकी अच्छी पैठ है।
भैयाजी से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह से लेकर मुख्यमंत्री तक संपर्क में हैं।
आगामी चुनाव पर भैयाजी सरकार का कहना है, "मैं राजनीति से दूर हूं। सिर्फ मां नर्मदा की सेवा के लिए बना हूं और उन्हीं के भक्तों का समर्थक हूं।"
देवकीनंदन ठाकुर
प्रख्यात कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर के 10 लाख अनुयाय हैं।
वे सोशल मीडिया में भी बहुत लोकप्रिय हैं। फेसबुक पर उनके करीब 25 लाख फॉलोअर्स हैं।
देवकीनंदर ठाकुल सरकार के मुखर विरोधी हैं। एससी-एसटी एक्ट में हुए बदलाव के खिलाफ उन्होंने आवाज बुलंद की है।
वे अखंड भारत पार्टी बना रहे हैं जो मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ेगी।
स्वामी शांति स्वरूपानंद गिरि निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर हैं।
विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य और आरएसएस के संपर्क में हैं।
उज्जैन के उत्तर व दक्षिण विधानसभा क्षेत्रों में साल में एक बार भागवत कथा करते हैं। डेढ़ लाख से ज्यादा अनुयायी हैं। गिरी जी सियासी दखल कम रखते हैं।
भैयाजी सरकार
भैयाजी सरकार धूनी वाले बाबाओं की परंपरा से हैं।
नर्मदा पट्टी के किनारे बसे इलाके की करीब 20 विधानसभा क्षेत्रों में इनका जबरदस्त प्रभाव है। समाज के हर वर्ग में इनकी अच्छी पैठ है।
भैयाजी से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह से लेकर मुख्यमंत्री तक संपर्क में हैं।
आगामी चुनाव पर भैयाजी सरकार का कहना है, "मैं राजनीति से दूर हूं। सिर्फ मां नर्मदा की सेवा के लिए बना हूं और उन्हीं के भक्तों का समर्थक हूं।"
देवकीनंदन ठाकुर
प्रख्यात कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर के 10 लाख अनुयाय हैं।
वे सोशल मीडिया में भी बहुत लोकप्रिय हैं। फेसबुक पर उनके करीब 25 लाख फॉलोअर्स हैं।
देवकीनंदर ठाकुल सरकार के मुखर विरोधी हैं। एससी-एसटी एक्ट में हुए बदलाव के खिलाफ उन्होंने आवाज बुलंद की है।
वे अखंड भारत पार्टी बना रहे हैं जो मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ेगी।
जिन बाबाओं को मंत्री बनाया, वे अब क्या सोचते हैं
स्वामी नर्मदानंद
रतलाम के क्षेत्रों में इनके हजारों अनुयायी हैं। वे संघ के करीबी माने जाते हैं। आगामी चुनाव पर सवाल किए जाने पर उन्होंने कहा कि उनका ध्यान अध्यात्म पर है और उन्होंने राजनीति पर चर्चा करने से इनकार कर दिया।
योगेंद्र महंत
कंप्यूटर बाबा के साथ थे पर अब उनका साथ छोड़ा है। मंत्री पद पर बने हुए हैं। सरकार के साथ रहने का वादा किया है।
स्वामी हरिहरानंद
मंत्री पद पर हैं पर सक्रिय राजनीति से दूरी बनाई।
सिंहस्थ में स्वामी अवधेशानंद का बड़ी भूमिका रही है। ऐसा ही असर बाबा रामदेव का है। वहीं कमल किशोर नागर, रावतपुरा सरकार, बालयोगी उमेशनाथ का भी अच्छा प्रभाव है।
रतलाम के क्षेत्रों में इनके हजारों अनुयायी हैं। वे संघ के करीबी माने जाते हैं। आगामी चुनाव पर सवाल किए जाने पर उन्होंने कहा कि उनका ध्यान अध्यात्म पर है और उन्होंने राजनीति पर चर्चा करने से इनकार कर दिया।
योगेंद्र महंत
कंप्यूटर बाबा के साथ थे पर अब उनका साथ छोड़ा है। मंत्री पद पर बने हुए हैं। सरकार के साथ रहने का वादा किया है।
स्वामी हरिहरानंद
मंत्री पद पर हैं पर सक्रिय राजनीति से दूरी बनाई।
सिंहस्थ में स्वामी अवधेशानंद का बड़ी भूमिका रही है। ऐसा ही असर बाबा रामदेव का है। वहीं कमल किशोर नागर, रावतपुरा सरकार, बालयोगी उमेशनाथ का भी अच्छा प्रभाव है।
