{"_id":"5a571f784f1c1b1e1b8b4757","slug":"khatri-society-administers-business-to-kanpur","type":"story","status":"publish","title_hn":"खत्री समाज ने कानपुर को दिलाई व्यापारिक पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खत्री समाज ने कानपुर को दिलाई व्यापारिक पहचान
राहुल शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 11 Jan 2018 02:37 PM IST
विज्ञापन
खत्री समाज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसी भी शहर को उसकी पहचान दिलाने में अलग-अलग समाज के लोगों को सराहनीय योगदान होता है। ये लोग किसी न किसी रूप में शहर और वहां की सभ्यता को आगे बढ़ाते हैं। कानपुर को भी पहचान दिलाने के में कई समाजों का योगदान रहा है। इनमें से खत्री समाज भी एक है। शहर को व्यापारिक पहचान दिलाने का श्रेय मुख्य रूप से इसी समाज के लोगों को जाता है। कानपुर में सबसे पहले साइकिल, ईंट, फोम, ज्वैलरी का कारोबार इसी समाज ने शुरू किया था।
72 साल पूर्व सबसे पहले रोशनलाल महाना आए थे शहर
करीब 72 साल पहले 1946 में पश्चिमी पंजाब (वर्तमान में पाकिस्तान) से रोशनलाल महाना शहर आए थे। उन्होंने लाल बंगला में किराने का काम शुरू किया। साथ ही अपने मित्र डिफेंस इंचार्ज हरजिंदर सिंह की मदद से समाज के लोगों को लाल बंगला इलाके में बसाना शुरू कर दिया। महाना ने इसके बाद ईंट भट्ठा कारोबार शुरू किया। कुछ सालों बाद इसी समाज के देशराज मलिक ने साइकिल की सीट का काम शुरू किया तो जीवनराम सेठ ने ज्वैलरी का काम शुरू किया। साथ ही जीवनराम एंड संस नाम से फोम और रबर का भी काम डाला। इसके बाद 1960 में मलिक देशराज कपूर और कृष्ण कुमार कपूर ने दादानगर कोआपरेटिव इस्टेट की स्थापना की।
व्यापार के साथ-साथ राजनीति में भी समाज के लोगों ने बनाई पहुंच
यहां छोटी-बड़ी सैकड़ों इकाइयां हैं, जिनमें हजारों लोगों को रोजगार मिला। उधर, लाला काशीनाथ सेठ ज्वैलर्स, भगतराम जयनारायण ज्वैलर्स और के. ज्वैलर्स ने सोने चांदी का काम बढ़ाते हुए कई शोरूम खोले। नई-नई डिजाइन की ज्वैलरी को भी बाजार में उतारा। इसी बीच कानपुर खत्री सभा की स्थापना हुई। सभा के पहले अध्यक्ष बने राजा बहादुर गोपी नारायण। अब कार्यकारिणी के गठन के लिए हर तीन साल में चुनाव होता है। अखिल भारतीय खत्री महासभा के संस्थापक रामजी सेठ ने बताया कि वर्तमान में कानपुर में खत्री समाज के करीब पांच लाख लोग रहते हैं। यह आबादी स्वरूप नगर, तिलक नगर, काकादेव, गोविंद नगर, बिरहाना रोड, लाल बंगला आदि में है।
विज्ञापन
राजनीति में भी छात्र खत्री समाज के लोग
शिव नारायण टंडन, तीन बार सांसद रहे। पशुपति नाथ मेहरोत्रा, तीन बार विधायक रहे। सतीश महाना, सात बार से विधायक हैं। अजय कपूर, तीन बार विधायक रहे। रामनाथ महेंद्र, विश्व हिंदू परिषद के कोषाध्यक्ष हैं।
समाज के पर्व
दशहरा में शस्त्र पूजन, दीपावली की पूजा, होली महोत्सव अादि हैं।
शहर को खत्री समाज की देन
खत्री धर्मशाला बिरहाना रोड
जीएनके इंटर कॉलेज बड़ा चौराहा
खत्री धर्मशाला लालबंगला
खत्री समाज के बड़े कारोबारी और उनकी फर्म
मुन्ना लाल एंड संस माल रोड
केसी कपूर एंड संस तिलक नगर
लाला काशीनाथ सेठ ज्वैलर्स, कुंवर सेठ बिरहाना रोड
अन्नपूर्णा बिस्कुट, नवीन खन्ना दादानगर
पीडी गुबा एंड संस आर्यनगर
जीवनराम एंड संस रामजी सेठ
भगतराम जय नारायण ज्वैलर्स, रामनाथ महेंद्र
अमरनाथ मेहरोत्रा पप्पू रामजी प्रेस दादानगर
विजय कपूर मलिक, दादानगर कोआपरेटिव इस्टेट
स्टेटस क्लब विकास मल्होत्रा
के. ज्वैलर्स बिरहाना रोड
खत्री समाज की उपजातियां
कपूर, सेठ, महाना, खन्ना, मेहरोत्रा, टंडन, मल्होत्रा, तलवार, कोहली, गुबा, आनंद आदि।
कानपुर खत्री समाज का चुनाव जल्द
दिसंबर 2014 में कानपुर खत्री सभा का चुनाव हुआ था। इसमें भरत सेठ अध्यक्ष, मुकुल टंडन महामंत्री और अरविंद टंडन कोषाध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। तब 36 सदस्यीय कार्यकारिणी सर्वसम्मति से निर्वाचित हुई थी। यह कार्यकाल 31 दिसंबर 2017 को पूरा हो चुका है। इस कारण जल्द ही चुनाव होना है। अध्यक्ष भरत सेठ ने बताया कि 11 मार्च को राष्ट्रीय खत्री सभा का चुनाव है। उससे पहले कानपुर खत्री सभा का चुनाव करा लिया जाएगा।
विज्ञापन
72 साल पूर्व सबसे पहले रोशनलाल महाना आए थे शहर
करीब 72 साल पहले 1946 में पश्चिमी पंजाब (वर्तमान में पाकिस्तान) से रोशनलाल महाना शहर आए थे। उन्होंने लाल बंगला में किराने का काम शुरू किया। साथ ही अपने मित्र डिफेंस इंचार्ज हरजिंदर सिंह की मदद से समाज के लोगों को लाल बंगला इलाके में बसाना शुरू कर दिया। महाना ने इसके बाद ईंट भट्ठा कारोबार शुरू किया। कुछ सालों बाद इसी समाज के देशराज मलिक ने साइकिल की सीट का काम शुरू किया तो जीवनराम सेठ ने ज्वैलरी का काम शुरू किया। साथ ही जीवनराम एंड संस नाम से फोम और रबर का भी काम डाला। इसके बाद 1960 में मलिक देशराज कपूर और कृष्ण कुमार कपूर ने दादानगर कोआपरेटिव इस्टेट की स्थापना की।
विज्ञापन
व्यापार के साथ-साथ राजनीति में भी समाज के लोगों ने बनाई पहुंच
यहां छोटी-बड़ी सैकड़ों इकाइयां हैं, जिनमें हजारों लोगों को रोजगार मिला। उधर, लाला काशीनाथ सेठ ज्वैलर्स, भगतराम जयनारायण ज्वैलर्स और के. ज्वैलर्स ने सोने चांदी का काम बढ़ाते हुए कई शोरूम खोले। नई-नई डिजाइन की ज्वैलरी को भी बाजार में उतारा। इसी बीच कानपुर खत्री सभा की स्थापना हुई। सभा के पहले अध्यक्ष बने राजा बहादुर गोपी नारायण। अब कार्यकारिणी के गठन के लिए हर तीन साल में चुनाव होता है। अखिल भारतीय खत्री महासभा के संस्थापक रामजी सेठ ने बताया कि वर्तमान में कानपुर में खत्री समाज के करीब पांच लाख लोग रहते हैं। यह आबादी स्वरूप नगर, तिलक नगर, काकादेव, गोविंद नगर, बिरहाना रोड, लाल बंगला आदि में है।
विज्ञापन
राजनीति में भी छात्र खत्री समाज के लोग
शिव नारायण टंडन, तीन बार सांसद रहे। पशुपति नाथ मेहरोत्रा, तीन बार विधायक रहे। सतीश महाना, सात बार से विधायक हैं। अजय कपूर, तीन बार विधायक रहे। रामनाथ महेंद्र, विश्व हिंदू परिषद के कोषाध्यक्ष हैं।
समाज के पर्व
दशहरा में शस्त्र पूजन, दीपावली की पूजा, होली महोत्सव अादि हैं।
शहर को खत्री समाज की देन
खत्री धर्मशाला बिरहाना रोड
जीएनके इंटर कॉलेज बड़ा चौराहा
खत्री धर्मशाला लालबंगला
खत्री समाज के बड़े कारोबारी और उनकी फर्म
मुन्ना लाल एंड संस माल रोड
केसी कपूर एंड संस तिलक नगर
लाला काशीनाथ सेठ ज्वैलर्स, कुंवर सेठ बिरहाना रोड
अन्नपूर्णा बिस्कुट, नवीन खन्ना दादानगर
पीडी गुबा एंड संस आर्यनगर
जीवनराम एंड संस रामजी सेठ
भगतराम जय नारायण ज्वैलर्स, रामनाथ महेंद्र
अमरनाथ मेहरोत्रा पप्पू रामजी प्रेस दादानगर
विजय कपूर मलिक, दादानगर कोआपरेटिव इस्टेट
स्टेटस क्लब विकास मल्होत्रा
के. ज्वैलर्स बिरहाना रोड
खत्री समाज की उपजातियां
कपूर, सेठ, महाना, खन्ना, मेहरोत्रा, टंडन, मल्होत्रा, तलवार, कोहली, गुबा, आनंद आदि।
कानपुर खत्री समाज का चुनाव जल्द
दिसंबर 2014 में कानपुर खत्री सभा का चुनाव हुआ था। इसमें भरत सेठ अध्यक्ष, मुकुल टंडन महामंत्री और अरविंद टंडन कोषाध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। तब 36 सदस्यीय कार्यकारिणी सर्वसम्मति से निर्वाचित हुई थी। यह कार्यकाल 31 दिसंबर 2017 को पूरा हो चुका है। इस कारण जल्द ही चुनाव होना है। अध्यक्ष भरत सेठ ने बताया कि 11 मार्च को राष्ट्रीय खत्री सभा का चुनाव है। उससे पहले कानपुर खत्री सभा का चुनाव करा लिया जाएगा।