डॉक्टरों की गुंडागर्दी, एसएन कॉलेज में तीमारदार को पीटा
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एसएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों की गुंडागर्दी कम नहीं हो रही। शनिवार को सर्जरी विभाग में तीमारदार को बुरी तरह से पीटा। यहां तक कि सीनियर डॉक्टरों के समझौते के बाद देर शाम तीमारदार को डरा-धमकाकर मरीज को भगा दिया।
इटावा निवासी धर्मेंद्र कुशवाहा के दो महीने के बेटे अंशू के सिर में खून के थक्के जमने पर चार दिन पहले सर्जरी विभाग में भर्ती करवाया था। धर्मेंद्र ने बताया कि शनिवार की दोपहर डॉक्टर ने बच्चे के सिर का सीटी स्कैन कराने के लिए कहा। पर्ची लेकर सीटी स्कैन सेंटर पर गया तो मरीज का नंबर गलत बताया।
धर्मेंद्र ने वार्ड पहुंचकर डॉक्टर को बात बताई तो डॉक्टर बोले यही नंबर है। इस तरह से तीन बार चक्कर काटने पर भी डॉक्टर ने मरीज का नंबर जांच कर दोबारा नहीं लिखा। इस पर चौथी बार सीटी सेंटर वाले ने कहा कि मरीज के इलाज वाला पर्चा लेकर आ जाओ। तब सही नंबर मिला और सीटी स्कैन हो सका। धर्मेंद्र ने बताया कि वार्ड लौटने पर जूनियर डॉक्टर ने उसे बुरा-भला बोला। कहा, पर्चा क्यों लेकर गए, अभी सीनियर डॉक्टर आए थे, उनको दिखाना था।
इस पर धर्मेंद्र ने कहा कि बार-बार आप गलत नंबर लिख देते थे। पर्चा लेकर गया तब सही नंबर मिला। इस पर गुस्साए डाक्टरों ने धर्मेंद्र को पीटना शुरू कर दिया। धर्मेंद्र ने बताया कि वार्ड में ही उसे थप्पड़ और लातें मारी। अन्य तीमारदार भी डाक्टरों के डर के कारण बीच-बचाव की हिम्मत नहीं जुटा पाए। तीमारदार ने बताया कि 100 नंबर पर फोन किया, लेकिन ये उठा नहीं। बाद में सीनियर डॉक्टरों ने डाक्टर से माफी मंगवाकर मामला शांत कराया। इधर, देर शाम डाक्टरों ने शिशु को जबरन डिस्चार्ज कर दिया।
पीड़ित धर्मेंद्र ने बताया कि शाम को जिस डॉक्टर ने पीटा था, उसने कहा कि बच्चे को कुछ भी हो सकता है, फाइल पर साइन करो और चलते बनो। एसआईसी डॉ. एसके मजूमदार ने बताया कि बिना बताए तीमारदार मरीज की फाइल लेकर चला गया था। इस पर तीमारदार और डॉक्टर में बहस होकर झगड़ा हो गया था। समझौता करा दिया था। मरीज को जबरन डिस्चार्ज किया है, इसकी जांच कराता हूं।
नहीं थम रहा मारपीट का सिलसिला
एसएन कालेज में जूनियर डॉक्टरों का व्यवहार बदतर होता जा रहा है। मरीज-तीमारदारों से आए दिन मारपीट और अभद्रता करते हैं। इमरजेंसी में पिछले दिनों लावारिस को भर्ती कराने आए तीमारदार को जूनियर डॉक्टरों ने अभद्रता की और पीट दिया। शमसाबाद से घायल महिलाओं का इलाज कराने आए थे, उनके परिजनों को भी इमरजेंसी का गेट बंद कर पीटा था।