हाईकोर्ट ने कहा-वीरभद्र मामले में सुपर जांच एजेंसी न बने ईडी
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दिल्ली हाईकोर्ट ने हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच संबंधी दस्तावेज अदालत से साझा न करने पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के प्रति नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि ईडी इस प्रकार सुपर जांचकर्ता के रूप में काम नहीं कर सकती।
अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि याची यानी वीरभद्र व अन्य को दस्तावेज देखने की इजाजत नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि अगर आप अदालत के साथ कुछ भी साझा नहीं करना चाहते तो साफ है कि यह गड़बड़ है।
आप ऐसे काम नहीं कर सकते जैसे कि आप सुपर जांचकर्ता हों। उन्होंने कहा कि वे याचिका के आधार पर नोटिस जारी करेंगे और आप याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों पर जवाब दे सकते हैं। न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि आप नोटिस से पहले ही अग्रिम सुनवाई चाहते हैं और वे भी सुनवाई के दौरान मामले से संबंधित अपनी संतुष्टि चाहते हैं।
31 मई तक दस्तावेज जमा करने को कहा
अदालत ने ईडी को मामले से संबंधित सभी दस्तावेज पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 31 मई तय कर दी है। ईडी के अधिवक्ता ने कहा कि वे एक सप्ताह में सभी रिकार्ड अदालत के समक्ष पेश कर देंगे।
अदालत वीरभद्र और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर दलीलें सुन रही है, जिसमें उन्होंने अपने परिसर में की गई छापेमारी व दस्तावेज जब्त करने संबंधी आधार व कारणों की जानकारी मांगी है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान वीरभद्र व अन्य को भी यह साफ कर दिया कि जांच के कारण व जांच की लाइन का खुलासा नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा हुआ तो यह जांच और स्रोत का समझौता हो जाएगा।
अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी रिकार्ड व छापेमारी इत्यादि के कारणों को मात्र निर्णायक प्राधिकरण के समक्ष केवल देखने के लिए पेश करती है। याची इस प्रकार की मांग नहीं कर सकता।