बड़ा खुलासाः ताजमहल के ऊपर मंडरा रहे खतरे से निपटने के नहीं हैं कोई इंतजाम
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ताजमहल की सुरक्षा को लेकर हैरतअंगेज पहलू सामने आए हैं। ताजमहल के ऊपर उड़ने वाले ड्रोन या अन्य उपकरणों से निपटने के लिए ताज सुरक्षा के पास कोई इंतजाम नहीं हैं। इस मसले पर एडीजी ने पूर्व में कुछ निर्णय भी लिए थे, लेकिन वे अब तक अमल में नहीं लाए जा सके हैं।
आगरा में ताजमहल पर ड्रोन या अन्य किसी संदिग्ध उड़ान भरते उपकरण पर तुरंत कार्रवाई के लिए 24 अप्रैल को एडीजी सुरक्षा विजय कुमार ने निर्देश दिए थे। तब से अब तक हर महीने ड्रोन के उड़ान भरने की घटनाएं हो रही हैं और ताज की सुरक्षा तार-तार हो रही है।
ताजमहल के यलो जोन में पुलिस और रेड जोन में तैनात सीआईएसएफ के पास ड्रोन को मार गिराने के लिए एसओपी तक नहीं है। ड्रोन को तकनीक के बल पर गिराया जाए या शूट एट साइट किया जाए। इस पर ताज की सुरक्षा में लगी एजेंसियों पर कोई आदेश नहीं है।
हालांकि अधिकारियों ने तीन प्रस्ताव पर बात की है, लेकिन फैसला किसी पर भी नहीं कर सका है। ये ताजमहल की सुरक्षा को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई हैं।
प्रस्ताव 1
ताजमहल के चारों ओर ड्रोन कंट्रोल सिस्टम के तहत जैमर लगाए जाएं, जो मुख्य गुंबद से लेकर ताज की चारदीवारी पर लगे होंगे। इस परिसर के अंदर कोई भी ड्रोन कैमरा दाखिल नहीं हो पाएगा। ड्रोन कैमरे को रिमोट कंट्रोल से संचालित करने वाले का नियंत्रण ड्रोन के जैमर के नजदीक आते ही कट जाएगा और ड्रोन नीचे गिर पड़ेगा। इस तकनीक पर करीब 40 लाख रुपये खर्च होंगे।
प्रस्ताव 2
ताजमहल पर जैमर लेजर गन का प्रयोग ड्रोन को रोकने के लिए किया जाए। जिस जगह ड्रोन उड़ रहा है, उसकी ओर लेजर गन से निशाना लगाते ही, इससे निकलने वाली तरंगे रिमोट का नियंत्रण ड्रोन से तोड़ देंगी। जैसे- जैसे गन को नीचे किया जाएगा, ड्रोन रिमोट की तरह से नियंत्रित होकर नीचे उतारा जा सकेगा। इस तकनीक पर 28 से 30 लाख रुपये खर्च होंगे।
प्रस्ताव 3
शांत और बिना किसी नुकसान के तकनीक का सहारा लेने की जगह शूट एट साइट का सहारा लिया जा सकता है। ताज के पास जैसे ही ड्रोन नजर आए, उसे शूट कर नीचे गिराया जा सके, लेकिन इसमें बड़ा खतरा है। अगर किसी ड्रोन में विस्फोटक पदार्थ हैं तो यह बड़ा नुकसान कर सकते हैं। शूट एट साइट
के लिए स्टैंडर्ड ऑफ प्रोसिजर बनाना था, लेकिन एडीजी सुरक्षा विजय कुमार की बैठक के बाद भी यह बन न सके।