सरकारी वकीलों की नियुक्ति पर कोर्ट ने मांगा जवाब, कहा- दस्तावेज पेश करे सरकार
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यूपी में सरकारी वकीलों की नियुक्ति को लेकर उठे विवादों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश सरकार से इनके नियुक्ति संबंधी सारे दस्तावेज शुक्रवार तक पेश करने का आदेश दिया है।
एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस दया शंकर त्रिपाठी की पीठ ने बृहस्पतिवार को कहा कि सभी नियुक्तियों का भविष्य याचिका पर निर्णय के अधीन रहेगा। इस पर शुक्रवार को भी सुनवाई होगी। हालांकि कोर्ट ने सरकार को नियुक्तियों के दौरान हुई गलतियां दुरुस्त करने का अवसर भी दिया है।
महेंद्र सिंह पवार द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष रखने और पैरवी के लिए करीब 350 वकीलों की नियुक्ति में गड़बड़ियां की गई हैं। राज्य सरकार ने इनकी सूची सात जुलाई 2017 को जारी की थी। लेकिन नियुक्तियों में वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
यूपी में लागू विधि परामर्शी नियमावली के भाग पांच व छह का उल्लंघन करते हुए भी कई नियुक्तियां की गई हैं। वकील बुलबुल गोदियाल ने याची की ओर से उसका पक्ष रखा।
सरकार का जवाब आने के बाद ही हो सकता है कोई निर्णय
पीठ ने कहा कि इन नियुक्तियों की कानूनी वैधता है या नहीं, यह नियुक्ति प्रक्रिया और इसके लिए जारी नोटिफिकेशन की जांच के बाद ही साफ हो पाएगा। ऐसे में सरकार का जवाब आने के बाद ही इस मामले में कोई निर्णय हो सकता है।
उधर, हाईकोर्ट में महाधिवक्ता ने कहा- सूची पर पुनर्विचार करेगी सरकार
इलाहाबाद। प्रदेश के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि सरकारी वकीलों की सूची पर सरकार पुनर्विचार कर रही है। इसलिए उसके कुछ ज्यादा समय दिया जाए। सरकारी वकीलों के पैनल को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई है।
महाधिवक्ता की मांग पर कोर्ट ने 8 अगस्त को सुनवाई की तारीख तय की है। याचिका में कहा गया है कि राज्य विधि अधिकारियों की सूची बनाते समय सुप्रीमकोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।