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पंजाब: मंत्री रजिया व सिद्धू के सलाहकार की बहू बनीं वक्फ बोर्ड चेयरमैन, पहले भी 'अपनों' की नियुक्तियां रहीं चर्चा में

Sun, 21 Nov 2021 06:30 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 21 Nov 2021 06:30 PM IST
सार

पंजाब सरकार की एक और नियुक्ति चर्चा में है। कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना की बहू जैनब अख्तर को पंजाब वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। मंत्री रजिया सुल्ताना के पति पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा वर्तमान में पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिद्धू के सलाहकार हैं। यही वजह है कि ये नियुक्ति बेहद चर्चा में है। 

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Zainab Akhtar elected as Punjab Wakf Board Chairperson
जैनब अख्तर बनीं पंजाब वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष। - फोटो : @BB__Ashu

विस्तार

पंजाब में एक और बड़े पद पर हुई नियुक्ति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना और कांग्रेस प्रधान सिद्धू के सलाहकार मोहम्मद मुस्तफा की बहू को वक्फ बोर्ड का चेयरपर्सन सरकार ने नियुक्त कर दिया है। बहू जैनब अख्तर ने छुट्टी के दिन शनिवार को नई जिम्मेदारी का कार्यभार संभाल लिया। इससे पहले हाल ही में उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के दामाद तरुणवीर लहल की नियुक्ति को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए थे।

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पंजाब वक्फ बोर्ड के चेयरमैन का पद एक महीने से खाली पड़ा था। इस पद के लिए जैनब अख्तर का नाम बोर्ड के सदस्य एजाज आलम ने प्रस्ताव में रखा, जिस पर अब्दुल वाहिद ने समर्थन किया। जिसके बाद सरकार की ओर से जैनब को वक्फ बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया। विपक्ष के निशाने पर आने से पहले ही शनिवार को कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना और भारत भूषण आशु की मौजूदगी में जैनब ने बोर्ड का कार्यभार संभाल लिया।
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पंजाब की चन्नी सरकार के करीबी लोगों के परिजनों की यह दूसरी बड़ी नियुक्ति है। इससे पहले उपमुख्यमंत्री रंधावा के दामाद की एडिशन एडवोकेट जनरल के पद पर नियुक्ति किए जाने को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए थे। विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा था कि यह कैसी आम आदमी की सरकार है कि यहां पर बेरोजगार युवाओं की जगह सरकार के करीबियों को ही नियुक्ति दी जा रही है।
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इन नियुक्ति पर भी हो चुका है विरोध
सरकार के करीबियों को बड़े पदों पर नियुक्ति दिए जाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कैप्टन की सरकार में भी कई नियुक्तियां विवाद में रह चुकी हैं। विधायक फतेहगंज बाजवा और राकेश पांडे के बेटे को सरकारी नौकरी दिए जाने का विरोध हुआ था। इसके बाद कैबिनेट मंत्री गुरप्रीत कांगड़ के दामाद को भी सरकार नौकरी दी गई थी।

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