{"_id":"f6cd9ba6f384077664196261b0552063","slug":"young-man-run-by-4-feets-to-make-limca-book-record-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"4 पैर से दौड़ बना दिया लिम्का बुक रिकॉर्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
4 पैर से दौड़ बना दिया लिम्का बुक रिकॉर्ड
ब्यूरो/अमर उजाला, डबवाली (सिरसा)
Updated Fri, 12 Dec 2014 05:14 PM IST
विज्ञापन
वार्ड नंबर चार निवासी ईस्टवुड स्कूल में 12वीं कक्षा के छात्र गौरवदीप सिंह भाटी पुत्र इंद्रजीत सिंह भाटी ने एक अनूठा रिकॉर्ड बनाकर लिम्का ऑफ रिकार्डस में अपना नाम दर्ज करवाया है। यह रिकार्ड हाथों और पैरों पर की गई अलग तरह की दौड़ का है।
विज्ञापन
गौरवदीप ने दो पैरो व दो हाथों पर दौड़ते हुए 50 मीटर रास्ता केवल 10 सेकेंड में कवर करते हुए एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। गौरवदीप सिंह की उम्र केवल 17 वर्ष है। देश व विश्व में बने रिकॉर्ड्स के बारे में जानने के शौक के कारण ही उसके मन में भी रिकॉर्ड बनाने की इच्छा जागृत हुई।
विज्ञापन
इस दौरान उसका मिड्डुखेड़ा निवासी विश्व रिकॉर्डधारी फ्लावर सिंह से संपर्क हुआ। फ्लावर सिंह ने गौरवदीप को रिकॉर्ड बनाने के लिए प्रेरित करते हुए उसे कई टिप्स दिए। इसके बाद उसने कराटे कोच राजीव ठाकुर के मार्गदर्शन में हाथों और पैरों पर चलने व दौड़ने की प्रेक्टिस की।
विज्ञापन
जी तोड़ मेहनत से वह इस प्रेक्टिस में सफल रहा। बाद में उसने लिम्का बुक में इस अनूठे रिकॉर्ड के लिए आवदेन किया। गुरु नानक कॉलेज में उसने गणमान्य लोगों के समक्ष चार पैरों पर दौड़ते हुए 50 मीटर रास्ते को केवल 10 सेकेंड में कवर कर दिखाया।
उसके इस रिकॉर्ड को लिम्का बुक के अधिकारियों ने भी अप्रूव किया व इस अनोखे रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट अब गौरवदीप को दे दिया गया है। वर्ष 2015 की रिकॉर्ड बुक में गौरवदीप के नाम यह रिकॉर्ड दर्ज होगा।
गौरवदीप ने कहा कि उसे साइकिल दौड़ाने का भी शौक है और वह कई घंटों तक लगातार साइकिल चला लेता है। वह रोजाना करीब 50 किलोमीटर साइकलिंग करता है। पटियाला में आयोजित एक प्रतियोगिता में 200 कि लोमीटर तक लगातार भी वह साइकिल चला चुका है। इसके लिए उसने 10 घंटे का समय लिया व मेडल जीता।
उसने कहा कि वह भविष्य में साइकिल चलाने का वर्ल्ड रिकार्ड भी अपने नाम करना चाहता है। गौरवदीप सिंह इस कामयाबी का श्रेय अपनी मां कुलजीत कौर को देते हैं। उनका कहना है कि मां के आशीर्वाद से ही वह रिकॉर्ड बनाने में सफल रहे हैं।