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योगराज सिंह ने बेटे को बनाया फाैलाद : युवराज ने कैंसर से जूझ भारत की झोली में डाला था विश्व कप
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जीरकपुर। कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता, कभी धरती तो कभी आसमान है पिता ...। हरेक पिता की चाहत है कि अपने बच्चों का कद अपने से ऊंचा देखे। ऐसा ही ख्वाब देखा इंटरनेशनल क्रिकेटर युवराज सिंह और विक्टर योगराज के पिता योगराज सिंह ने।
उन्होंने न सिर्फ यह ख्वाब देखा बल्कि उसको हकीकत में बदलने के लिए अपने बच्चों को ऐसी ट्रेनिंग दी जिसको देखकर पहले लोग कहते थे कि आप क्या कर रहे हैं, पर जब दुनिया ने उनके ट्रेंड बच्चे को इंटरनेशनल मैदान में खेलते देखा तो वाह वाह करती
रही। उन्होंने बचपन में युवी को ट्रेनिंग देने के साथ-साथ उसमें हर परिस्थिति से जूझने का साहस कूट-कूटकर भर दिया था। यही वजह थी कि कैंसर से जूझने के बावजूद 2011 का विश्व कप युवराज ने भारत की झोली में डाला था और मैन ऑफ द सीरीज भी बने थे।
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अमेरिका से फिल्म डायरेक्शन की डिग्री ली
मोहाली में एक कांफ्रेंस के दौरान पहुंचे योगराज सिंह ने कहा कि उनको बेहद खुशी है कि उनका दूसरा बेटा अमेरिका से फिल्म डायरेक्शन की डिग्री लेकर भारत आ गया हैं। योगराज ने कहा कि उनको खुशी होती है कि सारी दुनिया ही उनका परिवार है।
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उन्होंने कहा कि युवराज और विक्टर पर उनको उतना ही गर्व है जितना गर्व बेटी ऐमी पर है। युवराज ने मेरा नाम ऊंचा किया तो वहीं विक्टर ने अपनी फिल्म के डायरेक्शन से दुनिया में नाम करने का प्रयास करने को आतुर है।
विक्टर योगराज सिंह बोले मेरे पिता मेरे रोल मॉडल
विक्टर योगराज सिंह ने कहा कि मेरे पिता मेरे रोल मॉडल हैं। उन्होंने मुझे और युवी भाई को कभी नहीं डांटा। वे जितने सख्त स्क्रीन पर दिखते हैं उतने नहीं हैं। किसी भी गलती पर वे आराम से समझाते हैं। और मैं जब ऐक्टिंग करता था और आज जब मैं डायरेक्शन कर रहा हूं तो उनका मार्गदर्शन हमेशा मेरे काम आता है। मुझे उनकी कुड़ी हरयाणे वल दी फिल्म अच्छी लगती है। मैं अपने पिता को फादर्स डे पर संवेदनशीलता और केयर देना चाहूंगा। उनका अच्छा बेटा बनना ही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। मेरे पिता दुनिया के लिए एक बेहतरीन एक्टर हैं पर वे बेहद सरल और सादा जीवन पसंद करते हैं
-जट्ट नूं तां कुर्ता पजामा ही जचदा ए।
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उन्होंने न सिर्फ यह ख्वाब देखा बल्कि उसको हकीकत में बदलने के लिए अपने बच्चों को ऐसी ट्रेनिंग दी जिसको देखकर पहले लोग कहते थे कि आप क्या कर रहे हैं, पर जब दुनिया ने उनके ट्रेंड बच्चे को इंटरनेशनल मैदान में खेलते देखा तो वाह वाह करती
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रही। उन्होंने बचपन में युवी को ट्रेनिंग देने के साथ-साथ उसमें हर परिस्थिति से जूझने का साहस कूट-कूटकर भर दिया था। यही वजह थी कि कैंसर से जूझने के बावजूद 2011 का विश्व कप युवराज ने भारत की झोली में डाला था और मैन ऑफ द सीरीज भी बने थे।
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अमेरिका से फिल्म डायरेक्शन की डिग्री ली
मोहाली में एक कांफ्रेंस के दौरान पहुंचे योगराज सिंह ने कहा कि उनको बेहद खुशी है कि उनका दूसरा बेटा अमेरिका से फिल्म डायरेक्शन की डिग्री लेकर भारत आ गया हैं। योगराज ने कहा कि उनको खुशी होती है कि सारी दुनिया ही उनका परिवार है।
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उन्होंने कहा कि युवराज और विक्टर पर उनको उतना ही गर्व है जितना गर्व बेटी ऐमी पर है। युवराज ने मेरा नाम ऊंचा किया तो वहीं विक्टर ने अपनी फिल्म के डायरेक्शन से दुनिया में नाम करने का प्रयास करने को आतुर है।
विक्टर योगराज सिंह बोले मेरे पिता मेरे रोल मॉडल
विक्टर योगराज सिंह ने कहा कि मेरे पिता मेरे रोल मॉडल हैं। उन्होंने मुझे और युवी भाई को कभी नहीं डांटा। वे जितने सख्त स्क्रीन पर दिखते हैं उतने नहीं हैं। किसी भी गलती पर वे आराम से समझाते हैं। और मैं जब ऐक्टिंग करता था और आज जब मैं डायरेक्शन कर रहा हूं तो उनका मार्गदर्शन हमेशा मेरे काम आता है। मुझे उनकी कुड़ी हरयाणे वल दी फिल्म अच्छी लगती है। मैं अपने पिता को फादर्स डे पर संवेदनशीलता और केयर देना चाहूंगा। उनका अच्छा बेटा बनना ही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। मेरे पिता दुनिया के लिए एक बेहतरीन एक्टर हैं पर वे बेहद सरल और सादा जीवन पसंद करते हैं
-जट्ट नूं तां कुर्ता पजामा ही जचदा ए।