{"_id":"5aed5cf94f1c1b84098b843b","slug":"wrong-treatment-of-patient-in-pgi-rohtak","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"PGI का गजब कारनामा- दर्द हाथ में, एमआरआई जांच लिखी गर्दन की, रिपोर्ट मिली कमर की","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
PGI का गजब कारनामा- दर्द हाथ में, एमआरआई जांच लिखी गर्दन की, रिपोर्ट मिली कमर की
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Sat, 05 May 2018 03:33 PM IST
विज्ञापन
consult doctor
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीजीआई में हो गया गजब का कारनामा, आने वाले मरीज को बीमारी कोई थी और उसकी जांच कुछ ओर हो गई, मामला जानकर हैरान हो जाएंगे। क्योंकि जांचकर्ता रिपोर्ट किसी और चीज की भी दे सकते हैं। यहां ऐसा लापरवाही के चलते होता है या भूलवश यह तो यहां के अधिकारी ही बता सकते हैं। लेकिन सच्चाई तो यह है कि इन गलतियों का खामियाजा भुगतना हर हाल में मरीज को ही पड़ता है।
ऐसी ही एक अव्यवस्था का शिकार हुए हैं प्रेमनगर निवासी सुनील कुमार। पीड़ित ने बताया कि वह बांये हाथ में सुन्नपन व दर्द की समस्या का उपचार कराने पीजीआईएमएस की मेडिसन ओपीडी में आये थे। चार अप्रैल को मेडिसन के डॉक्टरों ने उनको दवा लिखी और पांच अप्रैल को जांच कराई। 11 अप्रैल को सुनील को अस्थि रोग विभाग में भेज दिया गया।
यहां डॉक्टरों ने एमआरआई जांच कराने के लिए कहा और जांच फार्म भर कर दे दिया। उसने 15 अप्रैल को 2100 रुपये फीस दे कर एमआरआई जांच करवाई। लंबी कतार के चलते सुबह पांच बजे जांच कराने का नंबर आया और रिपोर्ट भी 25 अप्रैल को उसे दी गई। लेकिन जब डॉक्टर ने एमआरआई की रिपोर्ट देखी तो कहा कि उसने गर्दन के ऊपर एमआरआई जांच कराने को कहा था, उसने कमर की जांच क्यों करवा ली।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऐसी ही एक अव्यवस्था का शिकार हुए हैं प्रेमनगर निवासी सुनील कुमार। पीड़ित ने बताया कि वह बांये हाथ में सुन्नपन व दर्द की समस्या का उपचार कराने पीजीआईएमएस की मेडिसन ओपीडी में आये थे। चार अप्रैल को मेडिसन के डॉक्टरों ने उनको दवा लिखी और पांच अप्रैल को जांच कराई। 11 अप्रैल को सुनील को अस्थि रोग विभाग में भेज दिया गया।
विज्ञापन
यहां डॉक्टरों ने एमआरआई जांच कराने के लिए कहा और जांच फार्म भर कर दे दिया। उसने 15 अप्रैल को 2100 रुपये फीस दे कर एमआरआई जांच करवाई। लंबी कतार के चलते सुबह पांच बजे जांच कराने का नंबर आया और रिपोर्ट भी 25 अप्रैल को उसे दी गई। लेकिन जब डॉक्टर ने एमआरआई की रिपोर्ट देखी तो कहा कि उसने गर्दन के ऊपर एमआरआई जांच कराने को कहा था, उसने कमर की जांच क्यों करवा ली।
विज्ञापन
नहीं दिया जांच के लिए भरा फॉर्म
सांकेतिक तस्वीर
जब सुनील सीआरएस ओपीडी में जांच कर्ताओं के पास गया तो वहां उसे बताया गया कि वह गलत जांच क्यों करेंगे, जो डॉक्टर ने जांच लिखी होगी वही तो की जाएगी। इस संबंध में सुनील ने बताया कि जब उसने जांच फार्म मांगा तो उसे टरका दिया गया और कहा गया कि वह अपने डॉक्टर से बात करें।
अब वह जांच फार्म किससे मांगे और वह दुबारा जांच का खर्चा क्यों वहन करें। यहां कोई जांच फार्म तक देने को तैयार नहीं है कि इस केस में गलती किससे हुई है। डॉक्टर बगैर जांच रिपोर्ट के दवा लिखने को तैयार नहीं है, उसकी समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। वह अब अपनी शिकायत सीएम विंडो पर डालने पर मजबूर है।
अब वह जांच फार्म किससे मांगे और वह दुबारा जांच का खर्चा क्यों वहन करें। यहां कोई जांच फार्म तक देने को तैयार नहीं है कि इस केस में गलती किससे हुई है। डॉक्टर बगैर जांच रिपोर्ट के दवा लिखने को तैयार नहीं है, उसकी समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। वह अब अपनी शिकायत सीएम विंडो पर डालने पर मजबूर है।