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Chandigarh News: कैंबवाला में मकर संक्रांति पर कुश्ती दंगल, हरियाणा-पंजाब के पहलवानों ने दिखाया दम
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संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। मकर संक्रांति के अवसर पर बुधवार को गांव कैंबवाला में पुरानी परंपरा के अनुसार कुश्ती दंगल का आयोजन हुआ। इस दंगल में हरियाणा और पंजाब से आए कई पहलवानों ने अपने दमखम का प्रदर्शन किया। इस बार चार बड़ी झंडी की कुश्तियां आयोजित की गईं।
दंगल के विजेता पहलवानों को इनाम में भैंस और नगद राशि प्रदान की गई। भैंस देनेवालों में गांव के गुरदेव सिंह, भूपिंदर सिंह दीप और विंदर शामिल थे। कुल मिलाकर दो बड़ी कुश्तियों में 41 हजार रुपये और 11 कुश्तियों में 21 हजार रुपये का पुरस्कार वितरित किया गया।
दोपहर 12 बजे से ही पहलवानों का आगमन शुरू हुआ। कड़ाके की ठंड के बावजूद पहलवानों का उत्साह और दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट देखते ही बन रही थी। ढोल की थाप और शोरगुल ने माहौल को और रोमांचक बना दिया।
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कुश्ती कमेटी के प्रधान जोगिंदर सिंह पप्पी, पूर्व सरपंच हरमेश सिंह और गांव निवासी दलीप कुमार सोनू ने बताया कि गांव के हर व्यक्ति ने आयोजन में सहयोग दिया, जिससे यह मेला सफल रहा। इस अवसर पर लाला वाला पीर पर विशाल भंडारा और कव्वाली कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और रात में पीर स्थान पर कव्वाली प्रस्तुत की गई।
इस तरह मकर संक्रांति के दिन कैंबवाला का कुश्ती दंगल और मेला ग्रामीण जीवन की संस्कृति और उत्साह का अद्भुत उदाहरण साबित हुआ।
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चंडीगढ़। मकर संक्रांति के अवसर पर बुधवार को गांव कैंबवाला में पुरानी परंपरा के अनुसार कुश्ती दंगल का आयोजन हुआ। इस दंगल में हरियाणा और पंजाब से आए कई पहलवानों ने अपने दमखम का प्रदर्शन किया। इस बार चार बड़ी झंडी की कुश्तियां आयोजित की गईं।
दंगल के विजेता पहलवानों को इनाम में भैंस और नगद राशि प्रदान की गई। भैंस देनेवालों में गांव के गुरदेव सिंह, भूपिंदर सिंह दीप और विंदर शामिल थे। कुल मिलाकर दो बड़ी कुश्तियों में 41 हजार रुपये और 11 कुश्तियों में 21 हजार रुपये का पुरस्कार वितरित किया गया।
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दोपहर 12 बजे से ही पहलवानों का आगमन शुरू हुआ। कड़ाके की ठंड के बावजूद पहलवानों का उत्साह और दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट देखते ही बन रही थी। ढोल की थाप और शोरगुल ने माहौल को और रोमांचक बना दिया।
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कुश्ती कमेटी के प्रधान जोगिंदर सिंह पप्पी, पूर्व सरपंच हरमेश सिंह और गांव निवासी दलीप कुमार सोनू ने बताया कि गांव के हर व्यक्ति ने आयोजन में सहयोग दिया, जिससे यह मेला सफल रहा। इस अवसर पर लाला वाला पीर पर विशाल भंडारा और कव्वाली कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और रात में पीर स्थान पर कव्वाली प्रस्तुत की गई।
इस तरह मकर संक्रांति के दिन कैंबवाला का कुश्ती दंगल और मेला ग्रामीण जीवन की संस्कृति और उत्साह का अद्भुत उदाहरण साबित हुआ।