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एक्स-रे से काम चले तो सिटी स्कैन से बचें
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 09 Nov 2013 05:06 PM IST
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जीएमसीएच-32 के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के बीएससी मेडिकल टेक्नोलॉजी के स्टूडेंट और हॉस्पिटल ने शुक्रवार को वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे मनाया।
विशेषज्ञों ने स्टूडेंट को एक्स-रे के दौरान निकलने वाली खतरनाक विकिरणों के बारे में बताया। प्रोफेसर सुमन कोचर ने बताया कि लोगों के पास विकिरण का दस प्रतिशत हिस्सा एक्सरे, सिटी स्कैन व अन्य रेडियोलॉजी डायग्नोस्टिक से पहुंचता है।
ये काफी खतरनाक विकिरण होते हैं। एक्स-रे कहीं ज्यादा विकिरणें सीटी स्कैन के समय शरीर में पहुंचती हैं। इसलिए ध्यान रहे की जब एक्स-रे से काम न चले और बहुत जरूरी हो तभी सीटी स्कैन कराएं।
यदि रेडियोग्राफर पूरी सर्तकता से मशीनों का इस्तेमाल करे तो लोगों को इस खतरनाक विकिरण से बचाया जा सकता है। सभी रेडिएशन वर्करों ने एक्सरे के अविष्कारक डब्ल्यूसी रोएंटगेन को श्रद्धांजलि दी। रोएंटगेन ने 8 नवंबर 1895 को एक्सरे की खोज की।
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सीनियर रेडियोग्राफर लक्ष्मीकांत तिवारी ने बताया कि लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। सरकारों को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए। जगह-जगह एक्सरे और सिटी स्कैन हो रहे हैं लेकिन हर जगह एक्सपर्ट नहीं हैं।
मशीनों के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर है कि नहीं। इस पर निगरानी के लिए कोई भी गर्वमेंट बॉडी नहीं है। इसके लिए जल्द से जल्द सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
यदि ऐसा नहीं किया गया तो लोगों के लिए ये खतरनाक विकिरण परेशानी का सबब बने सकते हैं। मरीजों को भी कई जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा। जो इस प्रकार हैं-
1. डॉक्टर सिटी स्कैन के लिए लिखे तो पूछे कि क्या एक्सरे से काम चल सकता है।
2. छाती के एक्स-रे के समय 0.1 मिली सीर्वट रेडिएशन का डोज जबकि सिटी स्कैन में 8 मिली सीर्वट रेडिएशन का डोज शरीर में जाता है।
3. एक्सरे से काम न चले तभी सिटी स्कैन से करवाएं।
4. एक्स-रे रूम में जाएं तो लेड एप्रन जरूर पहनें। यदि लेड एप्रन नहीं है तो वहां से एक्सरे या सिटी स्कैन न कराएं।
5. जब किसी प्रेग्नेंट लेडी का एक्सरे और सिटी स्कैन हो रहा हो तो उसे इस बारे में जरूर बताएं।
6. एक्स-रे रूम में सिर्फ मरीज होना चाहिए।
7. यदि साथ में कोई अटेंडेंट जाता है तो उसे लेड एप्रन पहनना चाहिए।
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विशेषज्ञों ने स्टूडेंट को एक्स-रे के दौरान निकलने वाली खतरनाक विकिरणों के बारे में बताया। प्रोफेसर सुमन कोचर ने बताया कि लोगों के पास विकिरण का दस प्रतिशत हिस्सा एक्सरे, सिटी स्कैन व अन्य रेडियोलॉजी डायग्नोस्टिक से पहुंचता है।
ये काफी खतरनाक विकिरण होते हैं। एक्स-रे कहीं ज्यादा विकिरणें सीटी स्कैन के समय शरीर में पहुंचती हैं। इसलिए ध्यान रहे की जब एक्स-रे से काम न चले और बहुत जरूरी हो तभी सीटी स्कैन कराएं।
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यदि रेडियोग्राफर पूरी सर्तकता से मशीनों का इस्तेमाल करे तो लोगों को इस खतरनाक विकिरण से बचाया जा सकता है। सभी रेडिएशन वर्करों ने एक्सरे के अविष्कारक डब्ल्यूसी रोएंटगेन को श्रद्धांजलि दी। रोएंटगेन ने 8 नवंबर 1895 को एक्सरे की खोज की।
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सीनियर रेडियोग्राफर लक्ष्मीकांत तिवारी ने बताया कि लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। सरकारों को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए। जगह-जगह एक्सरे और सिटी स्कैन हो रहे हैं लेकिन हर जगह एक्सपर्ट नहीं हैं।
मशीनों के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर है कि नहीं। इस पर निगरानी के लिए कोई भी गर्वमेंट बॉडी नहीं है। इसके लिए जल्द से जल्द सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
यदि ऐसा नहीं किया गया तो लोगों के लिए ये खतरनाक विकिरण परेशानी का सबब बने सकते हैं। मरीजों को भी कई जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा। जो इस प्रकार हैं-
1. डॉक्टर सिटी स्कैन के लिए लिखे तो पूछे कि क्या एक्सरे से काम चल सकता है।
2. छाती के एक्स-रे के समय 0.1 मिली सीर्वट रेडिएशन का डोज जबकि सिटी स्कैन में 8 मिली सीर्वट रेडिएशन का डोज शरीर में जाता है।
3. एक्सरे से काम न चले तभी सिटी स्कैन से करवाएं।
4. एक्स-रे रूम में जाएं तो लेड एप्रन जरूर पहनें। यदि लेड एप्रन नहीं है तो वहां से एक्सरे या सिटी स्कैन न कराएं।
5. जब किसी प्रेग्नेंट लेडी का एक्सरे और सिटी स्कैन हो रहा हो तो उसे इस बारे में जरूर बताएं।
6. एक्स-रे रूम में सिर्फ मरीज होना चाहिए।
7. यदि साथ में कोई अटेंडेंट जाता है तो उसे लेड एप्रन पहनना चाहिए।