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वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे: कोरोना काल ने गंभीर कर दी लिवर की बीमारी, इलाज में देरी से मृत्युदर बढ़ी 

Wed, 28 Jul 2021 08:50 AM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ 
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़  Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 28 Jul 2021 08:50 AM IST
सार

कोरोना काल में नॉन कोविड मरीजों का इलाज बंद होने के कारण लिवर के मरीजों की हालत ज्यादा खराब हो गई है।  पीजीआई में संचालित लिवर क्लीनिक, लिवर न्यूट्रीशन क्लीनिक और लिवर ट्रांसप्लांट के मरीजों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या अधिक है। 

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World Hepatitis Day: Corona Period made Liver Disease Serious at Chandigarh
लिवर - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

कोरोना काल में अस्पतालों की ओपीडी के साथ ही इलाज की अन्य सुविधाएं बाधित होने से सबसे ज्यादा नुकसान लिवर की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को हो रहा है। गौरतलब है कि हेपेटाइटिस मुख्य रूप से लिवर की बीमारी है। पीजीआई हेपेटॉलजी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी के दौर में लिवर के मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध नहीं हो सका। फॉलोअप न मिलने से ऐसे मरीजों की मृत्यु में तेजी से इजाफा हुआ है। 

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विभाग के प्रमुख प्रो. विरेंद्र सिंह का कहना है कि अब तक इससे कितने मरीजों की मौत हुई है, इसका आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है। लेकिन फॉलोअप के रिकॉर्ड बता रहे हैं कि यह मरीजों के लिए बेहद जानलेवा साबित हुआ है। ऐसे में अब जरूरी है कि लिवर की बीमारी से जूझ रहे मरीज इलाज में जरा भी अनदेखी न करें। 

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पुरुषों की स्थिति ज्यादा खराब

पीजीआई में संचालित लिवर क्लीनिक, लिवर न्यूट्रीशन क्लीनिक और लिवर ट्रांसप्लांट के मरीजों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या अधिक है। हेपेटॉलजी विभाग के प्रमुख प्रो. विरेंद्र सिंह का कहना है कि शराब इसका एक मुख्य कारण है। उनका कहना है कि शराब के सेवन से लिवर से संबंधित कई प्रकार के संक्रमण तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके अलावा दवाओं का अधिक सेवन भी लिवर सेल में सूजन का प्रमुख कारण बन रहा है। इसलिए बिना डॉक्टर के सलाह के किसी भी दवा को न लें। 

एक नजर 2019-20 की पीजीआई की ओपीडी के आंकड़ों पर
                                   लिवर क्लीनिक    लिवर न्यूट्रीशन क्लीनिक    लिवर ट्रांसप्लांट

पुरुष मरीजों की संख्या        7121                       07                               87
महिला मरीजों की संख्या      3451                       4                                 19

ये लक्षण न करें नजरअंदाज

उल्टी होना, कम भूख लगना, थकावट, दस्त होना, पीलिया, लगातार वजन घटना, शरीर में खुजली होना, पेट में तरल पदार्थ बनना।

इससे खराब हो रहा लिवर
लिवर कई वजहों से खराब होता है। वायरल हेपेटाइटिस, सिरोसिस, ज्यादा शराब, ज्यादा तली-भुनी और मसालेदार खाना प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

लिवर का महत्व
यकृत या जिगर शरीर का एक अंग है, जो केवल कशेरुकी प्राणियों में पाया जाता है। इसका कार्य विभिन्न चयापचयों को करना, प्रोटीन को संश्लेषित करना, और पाचन के लिए आवश्यक जैव रासायनिक बनाना है।
 
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आज शाम सात बजे से विशेषज्ञ से पूछिए सवाल

विभाग के प्रो. अजय दूसेजा ने बताया कि वायरल हेपेटाइटिस के बढ़ते मरीजों पर काबू के लिए जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से बुधवार को ई-पब्लिक फोरम का आयोजन किया गया है। शाम 7 से रात 8.15 बजे तक वेबिनार का आयोजन किया जाएगा। उसमें 30 मिनट का सत्र जनता के सवालों के लिए रखा गया है। https://webinarx{z.in/livercare-pgimer लिंक पर नि:शुल्क पंजीकरण किया जा सकता है।

हेपेटाइटिस मुख्य रूप से लिवर की बीमारी है। इससे बचाव के लिए बच्चों का तय समय पर टीकाकरण कराएं। वहीं लक्षण दिखने पर समय रहते इलाज शुरू करवाएं, क्योंकि इसके इलाज में महज तीन महीने का समय लगता है। बीमारी गंभीर होने पर जान भी जा सकती है। -प्रो. विरेंद्र सिंह, पीजीआई हेपेटॉलजी विभाग के प्रमुख

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