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विश्व ब्रेन स्ट्रोक दिवस आज : गलत आदतें दिमाग की नसों में जमा रहीं खून, बना रही ब्रेन स्ट्रोक का शिकार

Sun, 29 Oct 2023 01:32 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 29 Oct 2023 01:32 AM IST
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World Brain Stroke Day today: Wrong habits are causing blood to accumulate in the veins of the brain, making people victims of brain stroke.
चंडीगढ़। अनियमित दिनचर्या, मोटापा और खानपान में लापरवाही के साथ धूम्रपान, शराब का सेवन दिमाग की नसों में खून जमा रहा है। इससे ब्रेन स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह बात पीजीआई के स्ट्रोक केयर यूनिट के प्रभारी न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. धीरज खुराना ने कही।
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उन्होंने कहा कि अचानक तेज सिर दर्द होने लगे, एक तरफ का चेहरा टेढ़ा हो जाए, बोलने में कठिनाई हो, चक्कर आने लगे, भ्रम की स्थिति हो, एक आंख से अचानक दिखना बंद हो जाए तो सचेत हो जाएं। यह ब्रेन स्ट्रोक का लक्षण हाे सकता है। इनमें से एक भी लक्षण सामने आने पर तत्काल डॉक्टर के पास जाएं ताकि समय रहते मर्ज की पहचान कर बचाव किया जा सके अन्यथा जान भी जा सकती है।
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प्रो. धीरज ने बताया कि वृद्धावस्था का यह मर्ज अब युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। जरूरी है कि इसके कारणों पर गौर कर बचाव किया जाए। प्रो. धीरज का कहना है कि तकनीक के विकास से अब स्ट्रोक के मरीजों का इलाज आसान हो गया है। जहां तक पीजीआई की बात है तो डोर-टु-निडिल टाइम को महज चार से पांच वर्षों में दो घंटे से कम कर 10 मिनट पर ला दिया गया है। प्रो. धीरज का कहना है कि जागरुकता के कारण अब लोग स्ट्रोक के लक्षणाें को समय रहते पहचानने लगे हैं लेकिन अब भी दूर-दराज से आने वाले रेफर केस में स्थिति नियंत्रण से बाहर हाे जाती है, इसलिए स्वास्थ्य केंद्रों को अपडेट कर एमबीबीएस छात्रों को स्ट्रोक के प्रबंधन की जानकारी देनी जरूरी है। अगर ऐसा हुआ तो स्ट्रोक के मरीजों का इलाज आसान होगा, क्योंकि हैमरेज वाले मरीज को इलाज के बजाय सुपरविजन की जरूरत होती है। वहीं, स्ट्रोक के मरीज को समय रहते इलाज देना जरूरी होता है।
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ब्रेन स्ट्रोक

जब दिमाग की एक नस में अचानक खून पहुंचना बंद हो जाए तो उसे ब्रेन स्ट्रोक कहते हैं। दिमाग की कोशिकाओं के रक्त में से आक्सीजन की लगातार आवश्यकता होती है, जैसे ही रक्त पहुंचना बंद हो जाता है तो मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।
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