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Womens Day: आंखों की टीबी के इलाज को बनाई ऐसी गाइडलाइंस, जो दुनिया के लिए बनी नजीर
Sun, 08 Mar 2020 02:54 PM IST
खुशबू गोयल
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 08 Mar 2020 02:54 PM IST
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डॉ. वैशाली गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
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पीजीआई एडवांस आई सेंटर की डॉ. वैशाली गुप्ता आंखों की टीबी के इलाज में केवल भारत को ही नहीं पूरी दुनिया को राह दिखा रही हैं। 54 साल की उम्र में भी आई सेंटर की ओपीडी में 300 से 400 मरीजों को देखने वाली डॉ. वैशाली ने आंखों की टीबी के इलाज के लिए कोलाबरेटिव ऑक्युलर ट्यूबरकुलोसिस स्टडी ग्रुप बनाया है। इसमें दुनियाभर के 26 सेंटर के विशेषज्ञ शामिल हैं।
इस ग्रुप के माध्यम से वे पूरी दुनिया में आंखों की टीबी के इलाज से जुड़ी गाइडलाइंस को प्रसारित कर रही हैं। खास बात यह है कि इससे पहले तक आंखों की टीबी के इलाज से जुड़ी कोई भी गाइडलाइन दुनिया में उपलब्ध नहीं थी। पहली बार डॉ. वैशाली के माध्यम से यह संभव हो पाया है। दो साल पहले पीजीआई से शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट को डॉ. वैशाली लीड कर रही हैं।
डॉ. वैशाली का कहना है कि आंखों के टीबी केमरीज दिनों दिन बढ़ते जा रहे थे लेकिन उनके इलाज से जुड़ी कोई जानकारी उपलब्ध न होने के कारण डॉक्टर असमंजस की स्थिति में थे। इसलिए इस विशेष प्रोजेक्ट को तैयार किया गया। दो सालों में इससे जुड़े 12 जरनल प्रकाशित हो चुकेहैं। इसकेमाध्यम से आंखों की टीबी से जुड़े मरीजों का इलाज संभव होने लगा है।
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कुकिंग से लेकर ट्रैवलिंग तक का शौक
डॉ. वैशाली को अपने हाथ से बनाया खाना बेहद पसंद आता है। इसके अलावा उन्हें ट्रेवल का शौक है। काम के दौरान सुबह से रात तक व्यस्त रहने वाली डॉ. वैशाली का कहना है कि पढ़ाई, मरीज और रिसर्च से जुड़े अन्य काम में जिंदगी इतनी तेज रफ्तार से आगे निकल रही है कि वक्त का पता ही नहीं चल पाता। लेकिन इस बात की खुशी हर वक्त महसूस करती हूं कि मैं अपने काम के बल पर अपने जीवन की सार्थकता को बेहतर तरीके से सिद्ध कर रही हूं।
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इस ग्रुप के माध्यम से वे पूरी दुनिया में आंखों की टीबी के इलाज से जुड़ी गाइडलाइंस को प्रसारित कर रही हैं। खास बात यह है कि इससे पहले तक आंखों की टीबी के इलाज से जुड़ी कोई भी गाइडलाइन दुनिया में उपलब्ध नहीं थी। पहली बार डॉ. वैशाली के माध्यम से यह संभव हो पाया है। दो साल पहले पीजीआई से शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट को डॉ. वैशाली लीड कर रही हैं।
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डॉ. वैशाली का कहना है कि आंखों के टीबी केमरीज दिनों दिन बढ़ते जा रहे थे लेकिन उनके इलाज से जुड़ी कोई जानकारी उपलब्ध न होने के कारण डॉक्टर असमंजस की स्थिति में थे। इसलिए इस विशेष प्रोजेक्ट को तैयार किया गया। दो सालों में इससे जुड़े 12 जरनल प्रकाशित हो चुकेहैं। इसकेमाध्यम से आंखों की टीबी से जुड़े मरीजों का इलाज संभव होने लगा है।
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डॉ. वैशाली को अपने हाथ से बनाया खाना बेहद पसंद आता है। इसके अलावा उन्हें ट्रेवल का शौक है। काम के दौरान सुबह से रात तक व्यस्त रहने वाली डॉ. वैशाली का कहना है कि पढ़ाई, मरीज और रिसर्च से जुड़े अन्य काम में जिंदगी इतनी तेज रफ्तार से आगे निकल रही है कि वक्त का पता ही नहीं चल पाता। लेकिन इस बात की खुशी हर वक्त महसूस करती हूं कि मैं अपने काम के बल पर अपने जीवन की सार्थकता को बेहतर तरीके से सिद्ध कर रही हूं।