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'बेटे को जगह दिए बिना घर से निकालना गलत'
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 18 Feb 2015 10:31 AM IST
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यदि पिता के घर में बेटे का नाजायज कब्जा साबित नहीं होता तो उसे वैकल्पिक जगह दिए बिना घर से नहीं निकाला जा सकता। यह व्यवस्था पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस के. कानन ने चंडीगढ़, सेक्टर-43 निवासी एक व्यक्ति की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए दी। हालांकि इस मुद्दे को फिलहाल सिविल सूट के माध्यम से उठाने की छूट भी याचिकाकर्ता को दी गई है।
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एकल बेंच ने स्पष्ट किया कि सिविल सूट में लिबर्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ पैरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि व्यक्ति को अपने बेटे से खतरा है या नहीं। ऐसा न हो कि इस एक्ट को हू-ब-हू मानते हुए पिता को बेटे से खतरा भांपे बगैर घर से निकाल दिया जाए। बेंच ने यह भी कहा है कि यदि पिता को बेटे से सचमुच खतरा है, तब भी उसके रहने की सहूलियतों का सबूत पिता को देना होगा कि घर से निकालने पर वह कहां शिफ्ट होगा।
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पिता की ओर से बेटे को घर से बाहर निकालने पर राहत के लिए उक्त प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया है।
यह है मामला
चंडीगढ़ के मनमोहन सिंह ने याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें अपने बेटे गुरमीत सिंह से खतरा है, लिहाजा उसे उनके घर से बाहर निकालने के लिए उपायुक्त को निर्देश दिए जाएं। इस पर हाईकोर्ट ने उपायुक्त को स्थिति का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था। जांच में उपायुक्त ने पाया कि बेटे के लिए घर में उपयुक्त जगह नहीं है। उधर, मनमोहन सिंह ने कहा कि उनकी पत्नी के नाम जायदाद है, जहां वे अपने बेटे को शिफ्ट कर देंगे।
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हाईकोर्ट ने कहा कि नियमानुसार बेटे को उसी सूरत में बाहर निकाला जा सकता है, जब वह अनधिकृत कब्जा करके रह रहा हो। उधर, उपायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बेटा लंबे समय से लगातार पिता के घर में रह रहा है और उसने कोई कब्जा नहीं किया। उपायुक्त की इस रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में मनमोहन सिंह की मांग नहीं मानी जा सकती और न ही हाईकोर्ट कोई हस्तक्षेप कर सकता है।
जस्टिस दीवान का मामला भी आया था हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस (दिवंगत) शांति स्वरूप दीवान ने भी अपने बेटे से खतरा बताते हुए उसे घर से बाहर निकालने की याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने कहा था कि बेटे को वे पंचकूला में अलग प्लॉट दे चुके हैं। इसके बावजूद वह उनके घर की ऊपरी मंजिल में आकर रहने लगा है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि बेटा झगड़ा करता है और उसे घर से निकाला जाए। हाईकोर्ट ने इस मामले में बेटे को बाहर निकालने का आदेश दिया था। बाद में मीडिएटर के माध्यम से मामला हल करने की कोशिश विफल होने पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया। सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को घर छोड़ने का आदेश दिया था।