शराब पीने के शौकीनों के लिए बड़ी बुरी खबर
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हरियाणा सरकार ने नई आबकारी नीति के तहत शराब महंगी कर दी है। शराब पर सरचार्ज के साथ वैट चार प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत कर दिया गया है। शराब के बढ़े हुए दाम एक अप्रैल से लागू होंगे। सरकार ने अपनी नई नीति के तहत देसी और अंग्रेजी की सभी वैरायटी की शराब महंगी कर दी है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में वर्ष 2015-16 के लिए हरियाणा की नई शराब नीति को मंजूरी दी गई। स्ट्रॉग बियर को छोड़कर अंग्रेजी और देसी शराब के दामों में बीस प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई है।
बार लाइसेंस फीस भी बढ़ी
गुड़गांव और फरीदाबाद में बार की लाइसेंस फीस में ज्यादा इजाफा किया गया हैं, जबकि बाकी जिलों में बार लाइसेंस फीस गुड़गांव और फरीदाबाद से कम रखी गई है। आबकारी एवं कराधान मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि इस बार भी पिछले साल की तरह 3700 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
पिछली सरकार ने वर्ष 2013-14 और वर्ष 2014-15 के लिए शराब ठेकों का आवंटन किया था, लेकिन इस बार मनोहर सरकार ने इस नीति में बदलाव करते हुए एक ही साल के लिए ठेकों का आवंटन किया है। सभी ठेकों का आवंटन ऑनलाइन प्रक्रिया से होगा। एक ग्रुप को तीन से अधिक ठेके नहीं मिलेंगे।
ये होगी बार की लाइसेंस फीस
पहले हर जिले में बार की लाइसेंस फीस छह लाख रुपये थी। अब गुड़गांव में बार के लिए प्रति वर्ष लाइसेंस फीस 12.5 लाख, फरीदाबाद में10 लाख रुपये देनी होगी। जबकि, अन्य सभी जिलों को 7.5 लाख रुपये वार्षिक बार लाइसेंस फीस का भुगतान करना होगा।
एक्सपोर्ट ड्यूटी कम की
हरियाणा में बनने वाली अंग्रेजी शराब के निर्यात के लिए एक्सपोर्ट ड्यूटी कम कर दी गई है। इसे 75 प्रतिशत प्रति प्रूफ लीटर तक कम कर दिया गया है। इंडस्ट्रियल उपयोग के लिए स्प्रिट और दवाओं के लिए अल्कोहल का आयात शुल्क छह से तीन प्रतिशत प्रति प्रूफ लीटर कर दिया गया है।
27 ग्राम पंचायतों में ठेके नहीं
पिछली बार हरियाणा की नौ ग्राम पंचायतों के अनुरोध पर वहां ठेका नहीं खुला था। इस बार 27 पंचायतों में ठेका नहीं खुल पाएगा। करीब डेढ़ दर्जन पंचायतों के प्रस्ताव आए हुए है। उन्हें रिव्यू किया जा रहा है। यदि पंचायतें चाहेंगी तो वहां भी ठेके नहीं खोले जाएंगे।
ड्रिंकिंग को प्रमोट नहीं करेगी सरकार
आबकारी मंत्री के मुताबिक, ड्रिंकिंग को प्रमोट करके हम राजस्व नहीं कमाएंगे, लेकिन सरकार का यह प्रयास है कि जिनका स्वभाव पीने का है वे पारदर्शी व्यवस्था के तहत शराब का सेवन करें। नेशनल हाईवे के ठेके बंद होने से राजस्व प्रभावित हुआ है, लेकिन हम न्यायालय के आदेशों की पालना कर रहे हैं।