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कचरा देते हैं या नहीं, शुल्क तो देना होगा

Sat, 12 Dec 2020 09:32 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 12 Dec 2020 09:32 PM IST
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Whether you give garbage or not, you have to pay the fee
चंडीगढ़। नगर निगम को दुकानदार कचरा दें या न दें, शुल्क देना पड़ेगा। नए वर्ष से पानी के बिल के साथ दो माह के कचरे का बिल (500 रुपये प्रति माह) एक हजार रुपये जुड़कर आ जाएगा। वहीं, दुकानदारों का कहना है कि कुछ दुकानें ऐसी हैं, जिसमें न के बराबर कचरा निकलता है। ऐसे में उनके ऊपर यह शुल्क जबरन थोपा जा रहा है। इस मामले को लेकर मार्केट प्रधान जल्द निगम आयुक्त केके यादव से मिलेंगे और एक सर्वे कराने को कहेंगे ताकि छोटे दुकानदारों पर बोझ न पड़े।
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स्मार्ट सिटी की ओर से नगर निगम को जल्द 390 गाड़ियां मिलने जा रही हैं। इन गाड़ियों में गीला-सूखा कचरा अलग-अलग लेने की व्यवस्था होगी। नए साल में वाहन चलते ही कचरा लेने के एवज में शुल्क लगना शुरू हो जाएगा। निगम ने करीब साढ़े तीन लाख इमारतों से यह शुल्क वसूलने की योजना बनाई है। इनमें आवासीय के साथ-साथ व्यावसायिक इमारतें भी शामिल हैं। अभी तक प्रशासन की ओर से नगर निगम में शामिल हुए 13 गांवों और बाजारों में कचरा लेने के लिए शुल्क नहीं लिया जाता था लेकिन अब इनसे भी शुल्क वसूला जाएगा, जिससे निगम को हर साल करीब 42 करोड़ का राजस्व मिलेगा। इस मामले में दुकानदारों का कहना है कि निगम ने बिना सर्वे यह निर्णय थोप दिया है। स्टेशनरी, कपड़े की दुकानों पर बहुत कम कचरा निकलता है। उन्हें एक हजार रुपये देना अखर रहा है। हालांकि, जहां खाने का सामान मिलता है, उनके लिए तो यह शुल्क ठीक है।
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क्या कहते हैं दुकानदार
मेरी कॉस्मेटिक की दुकान है। कोरोना के कारण वैसे ही ग्राहक नहीं आ रहे। न के बराबर कचरा निकलता है। एक हजार रुपये का शुल्क ज्यादा है। इसमें कचरा लेने वाला तय करे कि दुकान से कितना कचरा निकल रहा है तो उस हिसाब से पर्ची काटकर शुल्क लिया जाना चाहिए। - अनुज सहगल, सेक्टर-36, दुकानदार
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मेरी मोबाइल की दुकान है। मेरे यहां कचरा तो एसेसरीज का होता है। इसके अलावा दुकान में कोई कचरा नहीं होता। यह कचरा एक छोटी सी पॉलीथिन में आ जाता है। अब इसके लिए 500 रुपये महीना ज्यादा है। - परमिंदर सिंह, सेक्टर-15, दुकानदार
मेरी कपड़ों की दुकान है। कोरोना के कारण कपड़ों में कागज व पॉलीथिन का कम उपयोग हो रहा है। ग्राहक आते हैं और सामान देखकर निकल जाते हैं। ऐसी स्थिति में कचरा तो कुछ निकला नहीं। 500 रुपये तो वैसे ही चले गए। - रॉकी, दुकानदार, सेक्टर-15

मेरी स्टेशनरी की दुकान है। कचरे के नाम पर ज्यादातर रद्दी होती है। उसे बेच दिया जाता है। उसके बाद कुछ कचरा बचता ही नहीं। ऐसी स्थिति में घर और दुकान दोनों जगह कचरे का शुल्क देना तो दोगुना बोझ बढ़ना है। - संदीप बंसल, दुकानदार, सेक्टर-37
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