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पंजाब में गेहूं खरीद: इस बार भी गोदामों में सड़ेगा गेहूं

Thu, 31 Mar 2016 12:49 AM IST
नरिंदर वैद्य/अमर उजाला, जालंधर
नरिंदर वैद्य/अमर उजाला, जालंधर Updated Thu, 31 Mar 2016 12:49 AM IST
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Wheat procurement in Punjab: wheat will rot in warehouses
गेहूं

पंजाब में गेहूं की खरीद एक अप्रैल से शुरू होने जा रही है लेकिन मंडियों और सरकारी खरीद एजेंसियों के गोदामों में इसे रखने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। कई खरीद एजेंसियों के गोदामों में तो साल 2014-15 का गेहूं अब तक पड़ा हुआ है। ऐसे में इस साल आने वाली फसल पर संकट मंडरा सकता है।

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जालंधर में इस बार गेहूं की आवक लगभग एक लाख मीट्रिक टन होने की संभावना है। पिछले साल साल इसका ग्राफ मात्र 66 हजार मीट्रिक टन तक ही रह गया था। इसके अलावा नवांशहर में पिछली बार आया 45,326 मीट्रिक टन गेहूं कम होकर 32 हजार मीट्रिक टन तक ही सीमित रह सकता है।
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राज्य सरकार किसानों से गेहूं की खरीद 100 प्रतिशत तक करने के दावे तो कर रही है लेकिन इस खरीद के बाद गेहूं को संभालने का जिम्मा जिन एजेंसियों को सौंपा जाना है, उनके पास तो पहले से ही गेहूं रखने के लिए जगह कम पड़ रही है।
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पनसप के एक गोदाम में साल 14-15 की दो लाख के करीब गेहूं की बोरियां पड़ी हुई हैं। इतना ही नहीं एफसीआई के गोदाम में भी साल 14-15 का कुल 99 हजार मीट्रिक टन गेहूं पड़ा हुआ है। जिले की मंडियों में भी ऐसे पुख्ता इंतजाम नहीं हैं कि किसानों की मंडी में पड़ी फसल को बारिश से बचाया जा सके। आढ़तियों के सहारे छोड़ी गई फसल मात्र तिरपाल के सहारे छोड़ दी जाती है। ऐसे में बारिश होने से किसानों की मेहनत पर पानी फिरना तय है।

किसानों को नहीं मिली राहत
हाल में हुई बारिश के कारण किसानों की फसल भीग जाने के बावजूद अब तक किसानों को फसल में होने वाली नमी में राहत नहीं मिली है। सरकार के आदेश अनुसार 12 प्रतिशत तक नमी वाला गेहूं ही खरीदा जाएगा। किसान 14 प्रतिशत तक की नमी कटवाना चाहता है तो उसे क्वालिटी कट लगवाना ही होगा। हो सकता है कि आने वाले समय में सरकार इस मामले में किसानों को कुछ राहत दे दे। किसानों के गेहूं का सरकारी मूल्य 1525 रुपये रखा गया है।

सरकार ने बदली स्कीम
दो साल पहले सरकार ने किसानों को उनकी फसल का मूल्य सीधे उनके बैंक खाते में भेजने का प्लान तैयार किया था। आढ़तियों के विरोध के कारण अब यह ठंडे बस्ते में चला गया है। एक बार फिर सरकार ने किसानों के बारे में न सोच पूंजीपतियों का ही साथ दिया। तब से लेकर आज तक किसानों को अपनी फसल का मूल्य लेने के लिए आढ़तियों की तरफ देखना पड़ रहा है।

रमनदीप सिंह, सचिव, मार्केट कमेटी ने बताया कि मंडियों में गेहूं आने के बाद उसे संभालने की खरीद से पहले किसान और खरीद के बाद खरीद एजेंसी की जिम्मेदारी होती है। हम किसानों को पानी, छत, बिजली और किसी भी तरह के झगड़े को निपटाने की जिम्मेदारी लेते हैं। फसल को बारिश से बचाने की जिम्मेदारी आढ़तियों की होती है। आढ़ती इसी बात की पांच प्रतिशत कमीशन लेते हैं कि किसान की फसल की देखभाल करें।


राजेश कुमार, प्रोक्यूरमैट मैनेजर, एफसीआई  के मुताबिक हमारे गोदामों में पड़े अनाज को उठवाने के लिए सरकार से 80 से 90 स्पेशल ट्रेनें मांगी गई हैं। उम्मीद है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में यह ट्रेनें मिल जाएंगी। ट्रेनें मिलते ही गेहूं की लागत हो जाएगी।

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