हमें हर नागरिक की जिदंगी की परवाह है पर ब्लैकमेल सहन नहीं सहेंगे: हाईकोर्ट
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नियुक्ति की मांग को लेकर मोबाईल टावर पर चढ़े शिक्षकों के मामले में स्वयं संज्ञान याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने बताया कि भर्ती के दौरान जो रिजर्व पद रिक्त रह गए हैं उन्हें समान्य में तब्दील करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।
इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उन्हें 31 मार्च तक का समय दिया जाए। इसपर हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार इस बारे में अंडर टेकिंग दे। इसपर हाईकोर्ट ने शिक्षकों के प्रतिनिधि से कहा कि अब टावर पर चढ़े शिक्षकों को नीचे आने के लिए कह दिया जाए।
जब शिक्षकों की ओर से कहा गया कि उन्हें नियुक्ति देने के बाद ही वे नीचे उतरेंगे तो हाईकोर्ट ने कहा कि हर नागरिक की जान हमारे लिए अहम है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ब्लैकमेल सहा जाएगा।
हालांकि कोर्ट ने शिक्षकों को दो वकील मुहैया करवाते हुए मंगलवार को दोबारा सुनवाई करने का निर्णय लिया है। सोमवार को सुनवाई आरंभ होते ही हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से रिक्त पदों को लेकर जवाब तलब किया।
इसपर पंजाब सरकार की ओर से बताया गया कि जो 4500 पदों पर भर्ती निकाली गई थी उसमें से रिजर्व क्षेणी के पद रिक्त रह गए हैं। इन पदों को भरने के लिए इन्हें सामान्य में तब्दील करने का फैसला लिया गया है।
इस फैसले को अमली जामा पहनाने के लिए संबंधित विभागों से मंजूरी लेनी होगी। एक्स सर्विसमैन, पिछड़ा वर्ग और खेल कोटे की सीटों के लिए संबंधित विभाग को लिखा गया है और इस सब प्रक्रिया में कुछ समय लगेगा।
'राजनीतिक कदम है इस प्रकार शिक्षकों का टावर पर चढ़ना'
पंजाब सरकार के इस जवाब पर हाईकोर्ट ने सुनवाई को लंच के बाद के लिए रखते हुए शिक्षकों के प्रतिनिधियों को कहा कि वे जाकर टावर पर मौजूद शिक्षकों को इस बारे में बताएं और उनहें नीचे उतरने के लिए मनाएं।
लंच के सुनवाई आरंभ हुई तो हाईकोर्ट ने शिक्षकों के प्रतिनिधियों से जवाब मांगा। इसपर उन्होंने बताया कि उन्होंने टावर पर चढ़े युवकों से बात की है और वे तभी नीचे उतरेंगे जब उन्हें नियुक्ति दी जाएगी।
हाईकोर्ट ने इसपर उन्हों समझाया कि इस प्रक्रिया में समय लगेगा और प्रक्रिया को नजरअंदाज करने के हाईकोर्ट भी आदेश जारी नहीं कर सकता है। साथ ही हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश जारी किए कि वे एक हलफनामा सौंपे कि वेटिंग लिस्ट तैयार करेंगे और इसके अनुरूप मेरिट सूची तैयार कर नियुक्तियों की प्रक्रिया 31 मार्च से पहले पूरी कर लेंगे।
इसके साथ ही शिक्षकों को मौका देते हुए कहा कि हाईकोर्ट को हर नागरिक की जान प्रिय है परंतु इसका मतलब यह नहीं है कि ब्लैकमेल सहा जाए। कोर्ट ने शिक्षकों के लिए एडवोकेट जगमोहन भट्टी और तनु बेदी को कोर्ट मित्र बनाते हुए उन्हें शिक्षकों की समस्या को समझने और पंजाब सरकार की बात को सही तरीके से उन तक पहुंचाने के साथ ही शिक्षकों का पक्ष कानून के अनुरूप मंगलवार से हाईकोर्ट के सामने रखने के आदेश दिए हैं।
इस दौरान पंजाब सरकार की ओर से कहा गया था कि शिक्षकों का यह कदम राजनीति के तहत है और ऐसे में इसकी अनुमति न दी जाए। इसपर हाईकोर्ट ने पूछा कि जो शिक्षक टावर पर चढ़े हैं वे कितनी उम्र के है। कोर्ट को बताया गया कि उनकी उम्र 25 साल से कम है। इसपर कोर्ट ने कहा कि यह राजनीति नहंी बल्कि बचपना है। हाईकोर्ट में अब मंगलवार को इस मामले की सुनवाई होगी।